बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद अब प्रशांत किशोर (PK) ने अपनी अगली रणनीति का खुलासा कर दिया है. पीके की पार्टी की ओर से औपचारिक ऐलान किया गया है कि वे 8 फरवरी से एक बार फिर बिहार की सड़कों पर उतरने जा रहे हैं. चुनाव हारने के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया था कि वे बिहार छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे और जब तक व्यवस्था नहीं बदलेंगे, डटे रहेंगे. आइए विस्तार से जानते हैं उनके खास प्लान की पूरी डिटेल.
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8 फरवरी से हर जिले का दौरा: क्या है मकसद?
प्रशांत किशोर की यह नई यात्रा संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से जीवित करने के लिए है. करीब 3 साल तक पदयात्रा करने के बावजूद चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने वाली जन सुराज पार्टी अब नए सिरे से अपनी संगठनात्मक इकाई को मजबूत करेगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीके इस यात्रा के जरिए उन कमियों को दूर करने की कोशिश करेंगे, जिनकी वजह से चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
महिलाओं के लिए '2 लाख का फॉर्म'- नीतीश सरकार को घेरने की तैयारी
प्रशांत किशोर की इस यात्रा का एक मुख्य हिस्सा महिलाओं को लेकर नीतीश कुमार के चुनावी वादों पर उन्हें घेरना होगा. पीके की पार्टी ने कहा है कि जब वे यात्रा पर होंगे, तो हर महिला से 2 लाख रुपये का फॉर्म भरवाएंगे. यह वही वादा है जो चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने किया था कि महिलाओं के खाते में 2 लाख रुपये दिए जाएंगे. पीके सरकार पर दबाव बनाएंगे कि वादे के मुताबिक यह राशि तुरंत महिलाओं को दी जाए.
पंचायत और विधान परिषद चुनाव पर नजर
जन सुराज का लक्ष्य अब बिहार की राजनीति में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभाना है. आने वाले समय में होने वाले विधान परिषद चुनाव और पंचायत चुनाव को देखते हुए पीके का फोकस पंचायत स्तर तक संगठन खड़ा करने पर है. उनका मानना है कि किसी भी संगठन की मजबूती पंचायतों से ही शुरू होती है, इसलिए वे इस बार गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं की एक नई फौज तैयार करेंगे.
विपक्ष की भूमिका में जन सुराज?
प्रशांत किशोर का कहना है कि उनकी पार्टी अब बिहार में विपक्ष के तौर पर काम करेगी और एनडीए सरकार की नीतियों को चुनौती देगी. 8 फरवरी से शुरू होने वाली इस यात्रा में पीके जनता के किन मुद्दों को उठाते हैं और महिलाओं के साथ उनका यह 'फॉर्म पॉलिटिक्स' कितना सफल होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.
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