बिहार की राजनीति में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी चुनावी रणनीति और बयानों को लेकर लगातार चर्चा में हैं. हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह का समर्थन मिलने और उनके जन सुराज में शामिल होने को लेकर तीखे सवाल पूछे, तो प्रशांत किशोर ने बेबाकी से अपनी बात रखी.
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क्या अनंत सिंह थामेंगे जन सुराज का दामन?
पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या अनंत सिंह का भविष्य में जन सुराज में स्वागत होगा, प्रशांत किशोर ने कहा:
हजारों लोग हमें समर्थन दे रहे हैं. जन सुराज को जितने लोग वोट या समर्थन दे रहे हैं, वे हर व्यक्ति पार्टी में आ जाएं, यह जरूरी नहीं है. क्या अनंत सिंह ने ऐसा कुछ कहा है कि वे पार्टी में आ रहे हैं? जब वह विषय आएगा और आप उनसे सुनेंगे कि वे जन सुराज जॉइन करने वाले हैं, तब पार्टी इस पर निर्णय लेगी और आपको बता दिया जाएगा.
'जन सुराज में बाहुबल और धनबल का कोई महत्व नहीं'
जब प्रशांत किशोर से पूछा गया कि क्या वे चुनाव जीतने के लिए बाहुबलियों का सहारा ले रहे हैं, तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जन सुराज का प्रयास पिछले चार सालों से बिहार की जनता के सामने है. उन्होंने स्पष्ट किया:
- विचारधारा से जुड़ाव: जो भी युवा रोजगार चाहता है, वित्त रहित शिक्षक अपना अधिकार चाहते हैं, वे जन सुराज की सोच से जुड़ रहे हैं.
- बाहुबल पर रुख: बिहार में जन सुराज की इस लड़ाई में किसी बाहुबली या धनबली का कोई महत्व नहीं है.
राजनीतिक समीकरण बदलने पर क्या बोले PK
जेडीयू द्वारा अनंत सिंह पर कार्रवाई करने या राजनीतिक समीकरण बदलने के सवाल पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने बाल कविता की पंक्तियां सुनाईं— 'उत्सुक होकर शिशु ने पूछा, फिर क्या होगा उसके बाद...' उन्होंने कहा कि भविष्य में 'क्या होगा तो क्या करेंगे' जैसे काल्पनिक सवालों का कोई मतलब नहीं है. आज की तारीख में जन सुराज बिना किसी गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ रहा है. जिस किसी को भी जन सुराज के विचार, प्रयास और प्रत्याशियों में भरोसा है, वह मदद कर रहा है और पार्टी उसके लिए उनका आभार व्यक्त करती है.
'हम सिर्फ अपने उम्मीदवारों के लिए जिम्मेदार हैं'
विपक्षी नेताओं और अनंत सिंह की पृष्ठभूमि पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अनंत सिंह न तो उनकी टीम में हैं और न ही PK उनके नेता हैं. उन्होंने कहा कि
सत्ता में बैठे जेडीयू और एनडीए के नेताओं को इन बातों का जवाब देना चाहिए. जन सुराज अपने प्रत्याशी और अपने कार्यकर्ताओं के आचार-विचार के लिए जिम्मेदार है. दूसरे दल का व्यक्ति क्या करता है या कौन समर्थन दे रहा है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है.
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