बिहार में शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बड़ा ऐलान किया है. प्रशांत किशोर ने कहा है कि बिहार के शिक्षक लंबे समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, चाहे वह नियोजित शिक्षकों का मामला हो, टीआरई (TRE) परीक्षा का मामला हो, वेतनमान का मुद्दा हो या फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की संलिप्तता का मामला हो. इन तमाम समस्याओं के समाधान और शिक्षकों को उनका हक दिलाने के लिए जन सुराज अब आगे आया है.
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सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने की तैयारी
प्रशांत किशोर ने बताया कि बिहार का शिक्षक समुदाय अलग-अलग संघों और वर्गों में बंटा हुआ है, जैसे कोई नियोजित शिक्षक है, कोई विद्यालय शिक्षक, कोई विशिष्ट शिक्षक तो कोई वित्त रहित शिक्षक है. इन सबका अपना-अपना संगठन चल रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए जन सुराज की यह सोच रही है कि जब तक सभी शिक्षकों की स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक सुधार संभव नहीं है. इसलिए, आने वाले तीन-चार महीनों यानी मार्च से पहले बिहार के सभी शिक्षक और शिक्षक संगठनों को एक साथ लाकर एक संयुक्त संघर्ष समिति बनाई जाएगी. जिस प्रकार दिल्ली में किसानों ने विभिन्न संगठनों को मिलाकर एक संघर्ष समिति बनाई और सरकार को झुका दिया, उसी तर्ज पर बिहार के करीब 6 लाख शिक्षकों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा.
जन सुराज की संघर्ष समिति की तीन प्रमुख मांगें
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि जन सुराज इस संघर्ष समिति के माध्यम से मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा और लोकसभा चुनाव से पहले इन्हें पूरा करवाएगा:
- सातवां वेतनमान: राज्य के सभी शिक्षकों के लिए सातवां वेतनमान लागू कराया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके.
- वित्त रहित-वित्त पोषित शिक्षकों का समायोजन: 'वित्त रहित' और 'वित्त पोषित' जैसी शब्दावली को खत्म किया जाए और इन संस्थानों तथा शिक्षकों को उचित श्रेणी में समायोजित किया जाए, ताकि दशकों से चली आ रही कुव्यवस्था समाप्त हो सके.
- गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए मानक तय करना: शिक्षकों को आए दिन प्रशासनिक इच्छा के अनुसार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है, इस पर रोक लगे. चुनाव जैसे विशेष कार्यों को छोड़कर हर दिन शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराने के लिए स्पष्ट मानक (पैरामीटर) तय किए जाएं.
लोकसभा चुनाव से पहले सरकार से मांगें मनवाने का भरोसा
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि जन सुराज इसके लिए पूरी ताकत से संघर्ष करेगा. उन्होंने कहा कि जैसे पहले बुजुर्गों की पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कराई गई थी, वैसे ही शिक्षक यदि जाति, धर्म और दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर अपने बच्चों, शिक्षण संस्थानों और अपने भविष्य की चिंता करते हुए एकजुट होंगे, तो लोकसभा चुनाव से पहले इन तीनों मांगों को सरकार से मनवाकर दिखाया जाएगा. यह किसी राजनीतिक दल को वोट देने की शर्त पर नहीं, बल्कि शिक्षकों के हक की लड़ाई के रूप में लड़ा जाएगा.
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