रौशन यादव के परिजनों से मिले प्रशांत किशोर, दिया 10 दिन का अल्टीमेटम

प्रशांत किशोर ने मधुबनी में कस्टोडियल डेथ के शिकार रौशन यादव के परिजनों से मुलाकात की और रहिका पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप लगाया. पीके ने एसएसपी से मिलकर 10 दिन का अल्टीमेटम दिया और 25 अगस्त तक कार्रवाई न होने पर दोबारा आने की चेतावनी दी.

Prashant Kishor
Prashant Kishor
Google CTA

बिहार के मधुबनी जिले के अररिया संग्राम थाना क्षेत्र के रौशन यादव की जेल  में हुई संदिग्ध कस्टोडियल डेथ के मामले ने तूल पकड़ लिया है. जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर रविवार को पीड़ित परिवार से मिलने मधुबनी पहुंचे और फिर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की.

Read more!

प्रशांत किशोर ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि यदि 10 दिनों के भीतर दोषी पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे फिर से मधुबनी आकर पुलिस कप्तान से जवाब मांगेंगे.

'बिना किसी कागजी सूचना के 3 दिनों तक थाने में रखकर टॉर्चर्ड किया गया'

पीड़ित परिवार के आरोपों का हवाला देते हुए प्रशांत किशोर ने बताया कि रौशन यादव को 27 मई को अररिया के बजाय रहिका थाने की पुलिस ने बिना किसी कागजी सूचना के हिरासत में लिया. 3 दिनों तक परिजनों को कोई खबर नहीं दी गई. जब परिजन रहिका थाने पहुंचे, तो रौशन ने बताया कि पुलिस ने उसे करंट लगाया और बेरहमी से मारपीट की. 31 मई को पुलिस ने उसे छोड़ा और आधे घंटे के भीतर ही आर्म्स एक्ट के फर्जी मामले में दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

करीब 2 महीने 10 दिन जेल में रहने के बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में कस्टोडियल डेथ हो गई. प्रशासन इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि परिजन पुलिसिया बर्बरता और मारपीट को वजह मान रहे हैं.

एसएसपी ने दिया 10 दिन का समय

एसएसपी के साथ हुई बैठक की जानकारी साझा करते हुए प्रशांत किशोर ने बताया कि एसएसपी ने दो मुख्य बातों पर सहमति जताई है. 27 मई को बिना कोर्ट में पेश किए युवक को अवैध हिरासत में रखने, टॉर्चर करने और सूचना न देने के मामले में पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. 10 दिनों में जांच पूरी कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है.

जेल के भीतर हुई मौत की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइन के तहत जिलाधिकारी की देखरेख में होगी. 2-3 दिनों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी.

'अगर कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आऊंगा'

प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर रहिका थाना और जिला पुलिस के दोषी अधिकारियों पर 25 अगस्त तक कार्रवाई नहीं होती है, तो मैं खुद 10 दिन बाद वापस मधुबनी आऊंगा और एसएसपी साहब से मुलाकात करूंगा. यह सीधे-सीधे पुलिसिया बर्बरता का मामला है और किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए.

तेजस्वी यादव करेंगे इस दिन राजभवन मार्च, छात्रों से की बड़ी अपील