विधायक बनते ही पावरफुल हुए प्रशांत किशोर, क्या- क्या सुविधाएं, Salary कितनी? क्या-क्या अधिकार मिलेंगे ?

ऋचा शर्मा

• 07:27 PM • 17 Aug 2026

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद विधायक पद की शपथ ले ली है. विधायक बनने के बाद उन्हें कानून बनाने, सरकार से सवाल पूछने, राष्ट्रपति और राज्यसभा चुनाव में मतदान समेत कई अहम अधिकार मिल गए हैं. जानिए विधायक के तौर पर प्रशांत किशोर को कितनी सैलरी, भत्ते और सुविधाएं मिलेंगी.

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जनसुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद सोमवार को विधायक पद की शपथ ले ली. इसके साथ ही प्रशांत किशोर की राजनीतिक भूमिका और ताकत दोनों बढ़ गई हैं. अब तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर विधानसभा के सदस्य के तौर पर सदन में कानून बनाने, सरकार से सवाल पूछने और जनता के मुद्दे उठाने की संवैधानिक भूमिका निभाएंगे.

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विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर को कई अहम विधायी और चुनावी अधिकार भी मिल गए हैं. वह विधानसभा में विधेयक और कानून से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा में हिस्सा ले सकेंगे. इसके अलावा विधानसभा के निर्वाचित सदस्य के तौर पर राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने और राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में वोट देने का अधिकार भी उन्हें मिलेगा.

सदन में बोलने और सवाल पूछने की आजादी

एक विधायक को विधानसभा में बिना किसी डर या दबाव के जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का अधिकार होता है. सदन में कही गई बात या दिए गए वोट को लेकर सामान्य तौर पर उनके खिलाफ किसी अदालत में कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती. विधायक मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज को लेकर तारांकित और अतारांकित सवाल पूछ सकते हैं. सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के लिए ध्यानाकर्षण, निंदा और अन्य संसदीय प्रस्तावों का सहारा लिया जा सकता है.

अगर सदन में सरकार के बहुमत पर सवाल खड़ा हो जाए तो विधायक अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में भी हिस्सा ले सकते हैं. प्रस्ताव पास होने की स्थिति में मुख्यमंत्री समेत पूरी मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ सकता है.

कानून और बजट में भी अहम भूमिका

विधानसभा सदस्य सदन में नया विधेयक पेश कर सकते हैं और उस पर चर्चा शुरू करवा सकते हैं. राज्य का बजट और धन विधेयक विधानसभा की प्रक्रिया से गुजरता है. सरकार के खर्च और अनुदान की मांगों पर विधायक चर्चा और मतदान करते हैं. विधायकों को सरकार के खर्चों पर कटौती प्रस्ताव लाने का भी अधिकार होता है. इस तरह विधायक सिर्फ कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते, बल्कि सरकार के वित्तीय कामकाज पर भी निगरानी रखते हैं.

राष्ट्रपति और राज्यसभा चुनाव में वोट

प्रशांत किशोर के विधायक बनने के बाद उन्हें चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार भी मिल गए हैं. विधानसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करते हैं. वहीं राज्य के विधायक राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में वोट डालते हैं. इसके अलावा विधानसभा के सदस्य अपने बीच से विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में भी मतदान करते हैं.

विधायक बनने के बाद मिलेंगी ये सुविधाएं

विधायक को वेतन के साथ कई तरह के भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं. इनमें यात्रा, आवास, चिकित्सा, कार्यालय और स्टाफ से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं. आधिकारिक काम के लिए यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता भी दिया जाता है.

विधायक और उनके परिवार को निर्धारित नियमों के तहत चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं. कामकाज के लिए निजी सहायक, कार्यालय स्टाफ और अन्य सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा आवास, बिजली, पानी और टेलीफोन जैसी सुविधाओं में भी निर्धारित नियमों के अनुसार रियायत मिलती है.

करीब 1.95 लाख रुपये की निश्चित मासिक राशि

बिहार विधान मंडल के सदस्यों के वेतन, भत्ता और पेंशन से जुड़े 2022 के संशोधित प्रावधानों के मुताबिक विधायक को 50 हजार रुपये मासिक मूल वेतन मिलता है. इसके अलावा निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, संसदीय/अनुषंगिक भत्ता, चिकित्सा भत्ता, स्टेशनरी एवं डाक भत्ता और आप्त सचिव समेत विभिन्न मदों में राशि मिलती है. वेतन और अलग-अलग भत्तों को मिलाकर विधायक को हर महीने करीब 1.95 लाख रुपये की निश्चित राशि मिलती है. इसके अलावा बैठक में शामिल होने पर दैनिक भत्ता भी मिलता है. विधायकों को सालाना रेल या हवाई यात्रा के लिए निर्धारित सीमा तक यात्रा भत्ता, आतिथ्य भत्ता और वाहन खरीदने के लिए 25 लाख रुपये तक का लोन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. बिहार में पूर्व विधायकों के लिए भी पेंशन का प्रावधान है.

यानी प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर उपचुनाव की जीत सिर्फ विधानसभा पहुंचने की जीत नहीं है. अब वह सदन के भीतर सीधे जनता के मुद्दे उठा सकेंगे, सरकार से सवाल कर सकेंगे और कानून बनाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे. रणनीतिकार से विधायक बने प्रशांत किशोर की राजनीति अब सड़क से निकलकर सीधे विधानसभा के सदन तक पहुंच गई है.