पर्दे के पीछे का 'किंगमेकर' अब खुद बना 'किंग'! बीजेपी का अभेद्य किला ढहाकर बांकीपुर से विधायक बने प्रशांत किशोर

हर्षिता सिंह

• 01:14 PM • 04 Aug 2026

प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव जीतकर रचा इतिहास! बीजेपी के अभेद्य किले में नितिन नवीन के गढ़ को ढहाया। जानिए कैसे रणनीतिकार से विधायक बने PK की यह फिल्मी कहानी।

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बिहार की सियासत में आखिरकार वो ऐतिहासिक मोड़ आ ही गया जिसका किसी ने अंदाजा भी नहीं लगाया था. देश के सबसे बड़े और बहुचर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) अब महज पर्दे के पीछे खेल रचने वाले खिलाड़ी नहीं रहे, बल्कि बिहार विधानसभा में बैठकर जनता की आवाज उठाने वाले 'विधायक जी' बन चुके हैं.

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पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल और बीजेपी का अभेद्य गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने ऐसा बड़ा उलटफेर किया कि पूरी भारतीय जनता पार्टी सन्न रह गई. 1995 से जिस सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज था और जहां से पांच बार के विधायक नितिन नवीन का जलवा था, उसी किले में सेंध लगाकर PK ने अपनी जीत का परचम लहरा दिया है.

2014 के 'मोदी लहर' के रणनीतिकार से 'जन सुराज' की पैदल यात्रा तक

प्रशांत किशोर का यह सफर किसी थ्रिलर बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है

2014 का लोकसभा चुनाव: संयुक्त राष्ट्र (UN) की आरामदेह नौकरी छोड़ PK ने नरेंद्र मोदी के लिए 'चाय पर चर्चा' और '3D रैली' जैसे इनोवेटिव अभियान चलाए और बीजेपी को प्रचंड जीत दिलाई.

2015 का बिहार चुनाव: मोदी से मतभेद के बाद नीतीश कुमार से हाथ मिलाया और बिहार में फिर से 'सुशासन बाबू' की वापसी कराई. जेडीयू में उन्हें नीतीश के ठीक नीचे 'नंबर-2' का दर्जा मिला.

ताकतवर रणनीतिकार का दौर: पंजाब में कैप्टन अमरिंदर, बंगाल में ममता बनर्जी, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और आंध्र में जगन मोहन रेड्डी को ऐतिहासिक जीत दिलाई.

लेकिन 2021 में PK ने यह महसूस किया कि केवल नेताओं की किस्मत बदलकर सिस्टम नहीं सुधारा जा सकता. उन्होंने संन्यास का ऐलान किया और बिहार की सड़कों पर 'जन सुराज' की पदयात्रा शुरू कर दी.

2025 की करारी हार के बाद 'ऑक्सीजन' बनी बांकीपुर सीट

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर किस्मत आजमाई, लेकिन एक भी उम्मीदवार नहीं जीत सका और 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई. भले ही PK की पार्टी ने 15 लाख वोट (4.44%) हासिल किए और 35 सीटों पर 'गेमचेंजर' बनी, लेकिन बिना किसी सीट के जन सुराज का भविष्य अंधकार में दिख रहा था.

इसी बीच, नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से बांकीपुर सीट खाली हो गई. जब आलोचक PK के राजनीतिक करियर पर सवाल उठा रहे थे, तब प्रशांत किशोर ने सीधे बीजेपी के इस 'सुपर-सेफ' किले में खुद उतरने का जोखिम भरा और ऐतिहासिक फैसला किया.

कैसे ढहाया बीजेपी का दशकों पुराना किला?

बीजेपी ने नितिन नवीन के बदले नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा और आरजेडी ने रेखा गुप्ता पर दांव लगाया. लेकिन प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के गली-मोहल्लों में सीधी पदयात्रा की, डेटा आधारित तर्क रखे और युवाओं व नाराज वोटरों को साध लिया. नतीजा यह रहा कि बीजेपी का सबसे सुरक्षित दुर्ग ढह गया और PK भारी मतों से जीतकर विधानसभा पहुंच गए.

अब क्या बदलेगा बिहार की राजनीति में?

बांकीपुर की जीत जन सुराज के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई है. प्रशांत किशोर के विधायक बनने के बाद बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में बहुत कुछ बदलने वाला है:

सदन में तीखी बहस: डेटा और तर्कों के साथ बात करने वाले PK जब बिहार विधानसभा में रोजगार, शिक्षा और विकास पर बोलेंगे, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पसीने छूटेंगे.

तेजस्वी यादव के लिए चुनौती: अब तक विपक्ष के मुख्य चेहरे रहे तेजस्वी यादव के लिए PK का तार्किक और तीखा अंदाज एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनेगा.

आरजेडी-बीजेपी दोनों पर नजर: हालांकि PK सीधे तौर पर सीएम सम्राट चौधरी पर हमलावर रहे हैं, लेकिन बांकीपुर की जीत ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की जनता अब पारंपरिक जातीय चक्रव्यूह से हटकर एक नया और पढ़ा-लिखा विकल्प तलाश रही है.