बिहार के बेगूसराय पहुंचे किसान नेता राकेश टिकैत ने वोट चोरी, चुनाव आयोग और किसानों की समस्याओं को लेकर कई बड़े बयान दिए हैं. प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने SIR के खिलाफ चल रहे आंदोलन को समर्थन देते हुए चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की. टिकैत ने आरोप लगाया कि वोट चोरी का फॉर्मूला बिहार से शुरू हुआ और बाद में इसे दूसरे राज्यों में भी अपनाया गया. राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में उनके संगठन से जुड़े लोग शामिल होंगे. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद इस प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे. उनके मुताबिक, वह दूसरे स्थान पर चल रहे आंदोलन में शामिल होंगे.
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'वोट चोरी बिहार से शुरू हुई', राकेश टिकैत ने क्या कहा?
बेगूसराय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने वोट चोरी के आरोपों पर कहा कि यह एक गंभीर मामला है. उन्होंने दावा किया कि बिहार में चुनाव के दौरान वोट काटने और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश हुई. टिकैत ने आरोप लगाया कि जीतने वाले उम्मीदवारों को हराने और बीजेपी के उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने का काम किया गया.किसान नेता ने कहा कि अगर बिहार में उस समय राजनीतिक दलों और लोगों ने मजबूती से विरोध किया होता, तो उनके मुताबिक इस तरह का फॉर्मूला दूसरे राज्यों में नहीं अपनाया जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव बनाने और उन्हें नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर करने की कोशिश की जा सकती है.
राकेश टिकैत ने दावा किया कि अब चुनावी प्रक्रिया में दबाव और डराने-धमकाने का तरीका अपनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त को इन आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए. ये सभी आरोप राकेश टिकैत ने प्रेस वार्ता के दौरान लगाए. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के लिए उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है.
10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन, टिकैत ने दिया समर्थन
SIR और वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन पर सवाल पूछे जाने पर राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है. उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में उनके संगठन के लोग भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, टिकैत ने साफ किया कि वह खुद दिल्ली के इस प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि आंदोलन को समर्थन देना जरूरी है और उनके समर्थक अपनी इच्छा के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं. उनके इस बयान के बाद चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच किसान संगठनों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है.
बिहार में किसानों की जमीन का मुद्दा उठाया
प्रेस वार्ता के दौरान राकेश टिकैत ने बिहार के किसानों की समस्याओं पर भी बात की. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पिछले 20 से 25 वर्षों से किसानों की जमीन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं. टिकैत ने कहा कि बिहार के किसानों की जमीन और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आवाज उठाने की जरूरत है. उन्होंने सर्किल रेट का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि वर्ष 2013 के बाद से जमीन की सरकारी दरों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है. उनके मुताबिक, पुरानी दरों पर जमीन लिए जाने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.
टिकैत ने कहा कि बिहार के किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे को राज्य में किसानों के सामने मौजूद प्रमुख समस्याओं में से एक बताया.
MSP और मंडियों को लेकर सरकार पर निशाना
किसान नेता ने बिहार में फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीद का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकारी खरीद की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है. राकेश टिकैत ने दावा किया कि बिहार में MSP पर पर्याप्त खरीद नहीं होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि जब किसानों को स्थानीय स्तर पर उचित बाजार नहीं मिलता, तो उन्हें दूसरे राज्यों में अपनी फसल बेचने के लिए जाना पड़ता है. टिकैत ने बिहार में कृषि मंडियों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था का फायदा किसानों के बजाय बड़े कारोबारियों को मिल रहा है.हालांकि, बिहार में जमीन की दरों, MSP पर खरीद और मंडियों से जुड़े उनके दावों के समर्थन में प्रेस वार्ता के दौरान कोई दस्तावेजी आंकड़ा प्रस्तुत किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है.
'पटना में दिल्ली से बड़ा आंदोलन होगा'
बिहार के किसानों की समस्याओं को लेकर राकेश टिकैत ने पटना में बड़े आंदोलन की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि अगर किसानों की जमीन और फसल को बचाना है, तो लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी. टिकैत ने बिहार के उन लोगों से भी अपील की जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार के लोग अपने गांवों में ट्रैक्टर भेजें, ताकि किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन खड़ा किया जा सके. उन्होंने आंदोलन की संभावित तस्वीर बताते हुए कहा कि बिहार में ट्रैक्टरों और पुलिस की गाड़ियों के बीच टकराव जैसी स्थिति बन सकती है. उनके बयान का आशय बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी से था. हालांकि, पटना में इस आंदोलन की तारीख और कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.
बिहार की राजनीति में क्यों अहम है यह बयान?
राकेश टिकैत ने एक ही प्रेस वार्ता में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों और किसानों की आर्थिक समस्याओं को उठाया. एक ओर उन्होंने SIR और कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को समर्थन दिया, वहीं दूसरी ओर जमीन, MSP और मंडियों के मुद्दे पर बिहार में व्यापक किसान आंदोलन की जरूरत बताई. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिहार में किसानों के मुद्दों को लेकर किसी आंदोलन की औपचारिक तारीख और कार्यक्रम घोषित होता है या नहीं. साथ ही, SIR के खिलाफ आंदोलन में किसान संगठनों की भागीदारी किस स्तर तक होती है, इस पर भी नजर रहेगी.
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