बिहार के चर्चित शिक्षक और ज्ञानबिंदु जीएस एकेडमी के संचालक रौशन आनंद सर अपने भाई प्रिंस की मौत के बाद पूरी तरह टूट चुके हैं. पटना में अपने भाई की श्रद्धांजलि सभा के दौरान रौशन आनंद सर का दर्द छलक पड़ा. उन्होंने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निचले स्तर के पुलिस अधिकारियों की गलत और एकतरफा कार्रवाई की वजह से ही आज उनका भाई इस दुनिया में नहीं है. रौशन आनंद सर ने अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री (कार्यवाहक/डिप्टी सीएम) सम्राट चौधरी को अपना गार्जियन बताते हुए सीधे उनसे न्याय की गुहार लगाई है.
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प्रशासन ने 4 घंटे में मुझे जेल भेजा
रुंधे गले से रोते हुए रौशन आनंद सर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए. उन्होंने पूरी घटना का टाइमलाइन बताते हुए कहा, "यह घटना 2 जून की रात करीब 10 बजे की है. रात 12 बजे एफआईआर दर्ज होती है और पुलिस आनन-फानन में महज 4 घंटे के भीतर मुझे झूठे केस में गिरफ्तार करके जेल भेज देती है. दूसरी तरफ, मुख्य आरोपी फैजल खान पर 4 जून को सच्चा एफआईआर दर्ज होता है, लेकिन पुलिस को 48 से 72 घंटे का समय मिलने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं की जाती."
उन्होंने कदमकुआं थाना प्रभारी (SHO) पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के वक्त SHO ने उन्हें धमकी दी थी कि 'तुम्हें बर्बाद कर देंगे और रोड पर भीख मांगने के लिए मजबूर कर देंगे', और आज प्रशासनिक तंत्र ने उन्हें उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है.
आरा के भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठाए सवाल
सिस्टम से निराश रौशन आनंद सर ने बिहार पुलिस की नीति पर सवाल उठाते हुए आरा के भरत तिवारी केस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "पुलिस जनता की रक्षक है, भक्षक नहीं. जब भरत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, तो फिर नेपाल पुलिस या बिहार पुलिस के तंत्र द्वारा उनका एनकाउंटर क्यों किया गया? प्रशासन को वेतन आम जनता के टैक्स के पैसे से मिलता है, लेकिन आज पूरा प्रशासनिक तंत्र ऊपर से नीचे तक मैनेज लग रहा है."
PM मोदी और सम्राट चौधरी से आखिरी उम्मीद
रौशन आनंद सर ने कहा कि भले ही वो सिस्टम से हार चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी भी देश और राज्य के शीर्ष नेतृत्व पर भरोसा है. उन्होंने कहा, "हमारे गार्जियन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी हैं. हमें सिर्फ उन्हीं से आशा है कि वो इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाएंगे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. जो भी दोषी हो, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले." उन्होंने देशभर के शिक्षकों और छात्रों से भी भावुक अपील की कि वे इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हों ताकि उन्हें इस लड़ाई को लड़ने का आत्मबल मिल सके.
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