बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, और वह नाम है रिशु श्री. स्पेशल विजिलेंस यूनिट और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया है. कभी एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाला खगड़िया का यह युवक महज 13 सालों के भीतर करोड़ों की अकूत संपत्ति और सरकारी टेंडरों के एक कथित बड़े नेटवर्क का बेताज बादशाह बन बैठा. आज वह जांच एजेंसियों के सबसे बड़े निशाने पर है. आइए विस्तार से जानते है कौन है यह शख्स और कैसे फैलाया अपना साम्राज्य?
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खगड़िया से NIT पटना और फिर कॉर्पोरेट का सफर
रिशु श्री मूल रूप से बिहार के खगड़िया का रहने वाला है, जहां उसके पिता विनोद कुमार रिटेल में दवा का कारोबार करते हैं. रिशु ने अपनी शुरुआती पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए साल 2012 में एनआईटी (NIT) पटना से बीटेक की डिग्री हासिल की. इसके ठीक अगले साल यानी 2013 में उसे गुजरात की एक नामी कंपनी में नौकरी मिल गई, जो उस वक्त बिहार में बोको की विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही थी. जांच एजेंसियों की मानें तो इसी नौकरी के दौरान रिशु ने सरकारी विभागों के कामकाज और टेंडर प्रक्रिया के दांव-पेचों को बहुत ही करीब से समझा और यहीं से उसकी जिंदगी ने एक नया मोड़ ले लिया.
नौकरी छोड़ खड़ी कीं 5 कंपनियां और फैलाया नेटवर्क
सरकारी टेंडर के खेल को समझने के बाद रिशु ने कुछ ही सालों में नौकरी को अलविदा कह दिया और खुद का व्यापार शुरू किया. उसने अपनी पत्नी और कुछ करीबी सहयोगियों को साथ मिलाकर एक के बाद एक करीब 5 कंपनियां खड़ी कर दीं. इन्हीं कंपनियों के सहारे उसने नगर विकास विभाग, जल संसाधन विभाग और अन्य सरकारी महकमों की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में सीधे दखल देना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उसका नेटवर्क इतना मजबूत हो गया कि वह बिहार में सरकारी टेंडरों की दुनिया का एक बहुत बड़ा और रसूखदार नाम बन गया.
छापेमारी में मिली 2.5 करोड़ की कारें और 61 प्लॉट के दस्तावेज
13 साल पहले एक बेहद सामान्य परिवार से आने वाला रिशु आज करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति का मालिक है. पटना के मीठापुर स्थित उसके आलीशान फ्लैट पर जब स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने छापेमारी की, तो वहां मौजूद संपत्ति को देखकर अधिकारी भी दंग रह गए. छापेमारी के दौरान वहां से करोड़ों रुपये की कीमती ज्वेलरी, भारी मात्रा में नकदी और जमीन से जुड़े करीब 61 अहम दस्तावेज बरामद किए गए. इसके अलावा जांच में सामने आया है कि रिशु के पास BMW, पोर्श मैकान और डिस्कवरी स्पोर्ट्स जैसी करीब 2.5 करोड़ रुपये की लग्जरी गाड़ियों का काफिला है. यही नहीं, पटना और हाजीपुर के पेट्रोल पंपों में भी उसके भारी-भरकम निवेश की बात सामने आई है.
IAS संजीव हंस से नजदीकियां और टेंडर फिक्सिंग का खेल
जांच एजेंसियों का दावा है कि जल संसाधन विभाग में काम करने के दौरान रिशु श्री की नजदीकियां सूबे के कद्दावर आईएएस अधिकारी संजीव हंस से बेहद बढ़ गई थीं. आरोप है कि इसी रसूख और सांठगांठ के दम पर रिशु को कई बड़े और महत्वपूर्ण सरकारी टेंडरों में सीधे तौर पर फायदा पहुंचाया गया. ईडी और एसवीयू के मुताबिक, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, स्मार्ट रोड और अन्य प्रमुख विकास परियोजनाओं से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडरों में उसकी मुख्य भूमिका रही है. एजेंसियां बताती हैं कि रिशु न सिर्फ खुद टेंडर लेता था, बल्कि दूसरी कंपनियों को भी टेंडर दिलवाने का काम करता था और बाद में उन्हीं प्रोजेक्ट्स में सब-कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर मोटी कमाई करता था.
यौन शोषण मामले की जांच से खुला 'काले साम्राज्य' का राज
रिशु श्री का नाम पहली बार मुख्यधारा की सुर्खियों में तब आया, जब साल 2023 में दर्ज हुए एक यौन शोषण के मामले की जांच शुरू हुई. इस केस की परतें जैसे-जैसे खुलीं, वैसे-वैसे कथित मनी लॉन्ड्रिंग के चौंकाने वाले सुराग हाथ लगने लगे. इसी मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को जोड़ते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई और रिशु श्री जांच के दायरे में आ गया. लगातार हुई पूछताछ और छापेमारी के बाद एजेंसियों के हाथ कई ऐसे पुख्ता दस्तावेज और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन लगे, जिसने टेंडर फिक्सिंग और महाभ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को उजागर कर दिया.
15 महीनों में 13 बार विदेश यात्राएं और गिरफ्तारी
जांचकर्ताओं को रिशु के पासपोर्ट और ट्रेवल हिस्ट्री से एक और बड़ी जानकारी मिली है. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 2021 से लेकर दिसंबर 2022 के बीच महज 15 महीनों में रिशु ने 13 बार विदेश यात्राएं कीं. जांच एजेंसियां अब इन विदेश यात्राओं के पीछे के मुख्य मकसद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए वित्तीय लेनदेन के रूट की गहराई से जांच कर रही हैं. आखिरकार, भ्रष्टाचार के इस पूरे मामले में ठोस सबूत जुटाने के बाद 27 मई 2026 को SVU ने रिशु श्री को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
फिलहाल, जांच एजेंसियां रिशु के पास से जब्त किए गए 61 जमीन के कागजातों, करोड़ों रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन और इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य बड़े अधिकारियों व रसूखदार कारोबारियों की भूमिका को खंगालने में जुटी हैं. रिशु श्री की यह कहानी महज एक व्यक्ति के फर्श से अर्श तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बिहार के सरकारी टेंडरों, नौकरशाहों की कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार के उस गहरे नेक्सस का पर्दाफाश है, जिसकी परतें अब एक-एक कर खुल रही हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी संभावना है.
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