बिहार प्रशासनिक महकमे में हड़कंप! रिशु श्री घोटाले में एक और बड़े IAS का नाम आया सामने, जानें पूरा खेल

Rishu Shri Scam: रिशु श्री घोटाले की जांच में बिहार प्रशासनिक महकमे में एक और बड़ा नाम सामने आया है. ED और SVU की पड़ताल में नगर विकास एवं आवास विभाग, सरकारी टेंडरों, SULM परियोजनाओं और कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क को लेकर नए खुलासे हुए हैं. जांच के दायरे में आए वरिष्ठ IAS अधिकारी, टेंडर में कथित हेराफेरी और करोड़ों रुपये के खेल की पूरी कहानी जानिए.

Rishu Shri Scam
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ऋचा शर्मा

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बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है और वह नाम है रिशु श्री का. ED और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, उनसे पता चलता है कि रिशु श्री उर्फ ऋषु रंजन सिन्हा महज कोई साधारण दलाल या बिचौलिया नहीं था. वह एक ऐसे बड़े भ्रष्टाचार के नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है, जिसने बिहार सरकार की बड़ी योजनाओं, टेंडर प्रक्रियाओं और अधिकारियों तक की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से प्रभावित कर रखा था.

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सारण जिले के रहने वाले रिशु श्री को फिलहाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी के बाद हर दिन नए और सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं. इस जांच की आंच अब बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग तक पहुंच गई है, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.

भ्रष्टाचार के खेल में सामने आया एक और बड़े IAS का नाम

जांच एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट ने बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार के एक बहुत बड़े अध्याय से पर्दा उठा दिया है. इस मामले में सबसे बड़ी खबर यह है कि अब एक और बेहद वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी का नाम इस पूरे सिंडिकेट और जांच के घेरे में आ गया है. जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु श्री ने सबसे बड़ा खेल नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत संचालित स्टेट अर्बन लाइवलीहुड मिशन (SULM) के अंदर खेला था. यह मिशन असल में केंद्र सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी योजना नेशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन (NULM) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

गरीबों की योजना को बनाया कमाई का जरिया

केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के गरीबों को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, आश्रय और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनका उत्थान करना है. लेकिन बेहद अफसोसजनक और हैरान करने वाला आरोप यह है कि गरीबों की भलाई के लिए बनी इस योजना को ही भ्रष्टाचार और अवैध कमाई का जरिया बना दिया गया. विभाग के अंदर बैठे कुछ बेहद प्रभावशाली लोगों और बाहरी नेटवर्क के आपसी तालमेल से पूरे सिस्टम को इस कदर घुमाया गया कि इस सरकारी योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों और गरीबों को मिलने के बजाय सीधे इस भ्रष्ट सिंडिकेट की जेबों में जाने लगा.

टेंडर की शर्तों में मनमाने बदलाव का खेल

जांच में यह बात सामने आई है कि SULM की मॉनिटरिंग और इसके संचालन के लिए बनाई जाने वाली 'प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट' के टेंडरों में अपनी मर्जी के मुताबिक मनमाने बदलाव करवाए जाते थे. आरोप है कि मास्टरमाइंड रिशु श्री पहले ही पर्दे के पीछे से यह तय कर लेता था कि सरकारी काम किस खास कंपनी को दिलवाना है. इसके बाद टेंडर की शर्तें और नियम उसी चुनिंदा कंपनी की प्रोफाइल के हिसाब से तैयार करवाए जाते थे. 

नियमों में इस तरह की हेराफेरी की जाती थी कि बाजार की दूसरी बड़ी कंपनियां रेस से बाहर हो जाएं और केवल सिंडिकेट की खास कंपनियां ही इसके लिए पात्र साबित हो सकें. नतीजा यह हुआ कि टेंडर प्रक्रिया की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और सरकारी योजनाओं के फंड का एक बहुत बड़ा हिस्सा कुछ विशेष कंपनियों के कब्जे में चला गया, जिनकी जांच अब एजेंसियां गहराई से कर रही हैं.

कर्मचारियों के वेतन में बड़ी कटौती और अवैध वसूली

इस कथित महाघोटाले का एक और सबसे दर्दनाक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि इसमें गरीब कर्मचारियों के वेतन तक में भारी कटौती की गई. सरकार द्वारा सिटी मिशन मैनेजर के लिए जो राशि तय की गई थी और जो वास्तविक भुगतान उन्हें जमीन पर किया जा रहा था, उसमें जमीन-आसमान का अंतर पाया गया है. आरोप है कि सरकार जहां प्रति कर्मचारी लगभग 75,000 रुपये का भुगतान करती थी, वहीं बिचौलियों और सिंडिकेट के खेल के कारण असली कर्मचारियों तक केवल 40 से 45 हजार रुपये ही पहुंच पाते थे. 

इसी तरह स्टेट मिशन मैनेजर के वेतन में भी बड़ी कटौती की शिकायतें मिली हैं. इसके अलावा अर्बन लोकल बॉडी में कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 25 से 30 हजार रुपये की अवैध वसूली भी की जाती थी. यह अवैध राशि पहले स्थानीय स्तर पर इकट्ठा की जाती थी, फिर सिटी मिशन मैनेजरों के माध्यम से स्टेट मिशन मैनेजरों तक और वहां से आगे विभाग के बड़े रसूखदार लोगों तक पहुंचाई जाती थी.

जांच के घेरे में आए पूर्व प्रधान सचिव आनंद किशोर

रिशु श्री मामले में भ्रष्टाचार की परतें खुलने के बाद सरकार अब तक दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा पर बड़ी कार्रवाई कर चुकी है और दोनों को ही निलंबित (सस्पेंड) किया जा चुका है. लेकिन अब यह मामला इसलिए और ज्यादा गंभीर हो गया है क्योंकि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में एक और बेहद कड़क और बड़े आईएएस अधिकारी आनंद किशोर का नाम भी सामने आ चुका है. आनंद किशोर लंबे समय तक नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के पद पर तैनात रहे थे. 

जांच एजेंसियां अब इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि आनंद किशोर के कार्यकाल के दौरान विभाग में जो भी बड़े निर्णय और टेंडर पास हुए, क्या उनके और रिशु श्री के इस बड़े नेटवर्क के बीच कोई सीधा संबंध या सांठगांठ थी या नहीं. रिशु श्री की इस गिरफ्तारी ने बिहार के पूरे प्रशासनिक ढांचे की कलई खोलकर रख दी है, जिसके तार बड़े सरकारी विभागों, टेंडरों, नियुक्तियों और करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के लेनदेन से जुड़े हुए हैं.

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करोड़ों के टेंडर और भ्रष्टाचार का 'मास्टरमाइंड' रिशु श्री! ED और SVU की जांच में खुली इन 5 कंपनियों की पोल

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