बिहार की राजनीति से इस वक्त एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है. RJD के दिग्गज नेताओं में शुमार और तेजस्वी यादव की बेहद करीबी मानी जाने वाली रितु जायसवाल ने BJP का दामन थाम लिया है. रितु जायसवाल आज अपने भारी-भरकम समर्थकों की फौज के साथ पटना स्थित बीजेपी दफ्तर पहुंचीं और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की. उनके इस कदम को बिहार में आरजेडी के लिए एक बड़े संगठनात्मक झटके के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी में शामिल होने से पहले उन्होंने साफ किया कि उनके साथ बड़ी संख्या में वे महिलाएं और कार्यकर्ता भी बीजेपी में आ रहे हैं, जो कल तक आरजेडी के बड़े कार्यक्रमों की रीढ़ हुआ करती थीं.
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करीब 2000 समर्थकों के साथ बीजेपी दफ्तर में एंट्री
बीजेपी दफ्तर पहुंचने पर जब रितु जायसवाल से बातचीत की गई, तो उन्होंने दावा किया कि आज उनके साथ तकरीबन 2000 लोग बीजेपी की सदस्यता ले रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि ये लोग किस पृष्ठभूमि से आते हैं, तो उन्होंने बताया कि इसमें कई लोग अलग-अलग दलों से जुड़े रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ताओं की है. उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें एक नेता के रूप में देखते हैं, पसंद करते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं, वे तमाम लोग आज उनके फैसले के साथ खड़े हैं और बीजेपी परिवार का हिस्सा बन रहे हैं.
तेजस्वी यादव और आरजेडी नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप
आरजेडी में हुई इस बड़ी टूट और नाराजगी की वजहों को लेकर रितु जायसवाल ने अपनी बात खुलकर रखी. उन्होंने बताया कि उनके साथ आने वाली महिलाओं में कई ऐसी हैं जो आरजेडी में प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश महासचिव, प्रदेश सचिव और युवा विंग की सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाल रही थीं. इन महिला कार्यकर्ताओं का हवाला देते हुए रितु ने कहा कि जब उन्होंने खुद उनसे पार्टी छोड़ने की वजह पूछी, तो कार्यकर्ताओं का दर्द छलक उठा.
कार्यकर्ताओं का कहना था कि जहां सम्मान न मिले, वहां रहने का कोई औचित्य नहीं है. रितु ने परिहार विधानसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की जनता उनके लिए तड़प रही थी और उन्हें चाहती थी, लेकिन आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को अपने ही कार्यकर्ताओं की आवाज सुनाई नहीं देती है. इसी अनदेखी और कार्यकर्ताओं की आवाज दबाए जाने की वजह से उन लोगों ने काफी पहले ही आरजेडी से दूरी बना ली थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और योजनाओं की तारीफ
तेजस्वी की करीबी होने के बावजूद बीजेपी में आने की मजबूरी के सवाल पर रितु ने स्पष्ट किया कि यह कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक बड़ा वैचारिक बदलाव है. उन्होंने कहा कि पहले वह सिर्फ एक विचारधारा से जुड़ी थीं, जिसके कारण उन्हें दूसरी तरफ की अच्छी चीजें नजर नहीं आती थीं.
लेकिन जब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और उन्हें दोनों ही विचारधाराओं के लोगों का समर्थन और वोट मिला, तब उन्हें समझ आया कि जनता की समस्याएं एक ही हैं. रितु ने दावा किया कि इन समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कृतसंकल्पित हैं. उन्होंने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक सीधे योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए मोदी सरकार की जमकर सराहना की.
आयुष्मान भारत योजना को बताया गरीबों के लिए संजीवनी
बीजेपी की नीतियों पर भरोसा जताते हुए रितु जायसवाल ने केंद्र सरकार की योजनाओं का विशेष तौर पर उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार में बिचौलियों का अंत हो चुका है और लाभार्थियों के खाते में डायरेक्ट पैसा जाता है. इसके साथ ही उन्होंने 'आयुष्मान भारत योजना' की तारीफ करते हुए कहा कि पहले जब किसी गरीब को कैंसर, ब्रेन हेमरेज या हार्ट जैसी गंभीर बीमारी होती थी, तो वह पैसों के अभाव में अपनी मौत के दिन गिनना शुरू कर देता था.
लेकिन आज आयुष्मान कार्ड की बदौलत एक गरीब व्यक्ति भी बड़े से बड़े अस्पताल में अपना मुफ्त इलाज कराकर ठीक हो रहा है. रितु ने इसे गरीबों के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक और सामाजिक संबल बताया और कहा कि इसी जनहित और देशहित के काम को देखकर उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है.
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