बेगूसराय के मटिहानी से राजद विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह हत्या के प्रयास, उपद्वव फैलाने और हंगामा करने के मामले में न्यायालय से आज बरी हो गए. 12 साल चले लंबे मुकदमे के बाद एमपी एमएलए कोर्ट के न्यायालय से राजद विधायक बोगो सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल 2014 में जदयू का विधायक रहते केशावे गांव में जमीन के घेराबंदी के दौरान स्थानीय कांग्रेस यादव के साथ विवाद हुआ था जिसमें तत्कालिन बेगूसराय अंचलाधिकारी निरंजन कुमार के द्वारा विधायक बोगो सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी जिसमें हत्या के प्रयास, उपद्रव फैलाने मारपीट करने सरकारी काम में बाधा डालने सहित कई आरोप लगाए गए थे. उस वक्त जदयू के विधायक थे और घटनास्थल से विधायक को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था. यह मामला 12 सालों तक न्यायालय में चला और आखिरकार न्यायालय से नरेंद्र कुमार सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, हालांकि इस मामले में अंचलाधिकारी सहित 6 पुलिस कर्मियों का गवाही कराई गई थी लेकिन किसी ने भी केस को साबित करने में सफल नहीं हुए और साक्ष्य के अभाव में न्यायालय में राजद विधायक को बड़ी कर दिया गया. विधायक की अधिवक्ता संजीत कुमार और विजय महाराज ने बताया कि न्यायालय ने विधायक को साक्ष्य के अभाव में बड़ी कर दिया है.
बरी होने के बाद विधायक क्या बोले?
बरी होने के बाद विधायक बोगो सिंह ने कहा कि महादेव का आशीर्वाद है मेरे ऊपर मुकदमा हुए थे हमारे अधिवक्ता 12 सालों से तपस्या किया, केस का अध्ययन किया समय पर केस का देख देख करते रहे किया इनके परिश्रम का फल है लोकतंत्र के न्यायपालिका से इनको विजय श्री मिला है उनके आशीर्वाद से हमें आज रिहाई का आदेश मिला है. हमको लोकतंत्र पर पूर्ण भरोसा था विधायिका कार्यपालिका पर भरोसा नहीं है 80 वर्षों के इतिहास में गरीब लोग गरीब होते जा रहे हैं और अमीर लोग अमीर होते जा रहे हैं न्यायपालिका जज पर हमें पूर्ण विश्वास था. इस लोकतंत्र की रक्षा न्यायपालिका के माध्यम से अधिवक्ता के माध्यम से हुआ जिसका फल हमें आशीर्वाद के रूप में मिला है
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