बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब बड़े संगठनात्मक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है. चुनावी झटके से उबरने और संगठन में नई जान फूंकने के लिए पार्टी आलाकमान जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है. सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा आरजेडी के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हो रही है. माना जा रहा है कि वर्तमान संगठनात्मक ढांचे को बदलते हुए तेजस्वी यादव जल्द ही किसी नए चेहरे को बिहार की कमान सौंप सकते हैं.
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विधानसभा चुनाव की हार के बाद बदलाव की सुगबुगाहट
पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और पार्टी महज 25 सीटों पर सिमट कर रह गई थी. इस करारी हार के बाद से ही संगठन में ओवरहॉलिंग (बदलाव) की मांग उठ रही थी. राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार में होने वाले आगामी 9 सीटों के एमएलसी (MLC) चुनाव के फौरन बाद इस बदलाव की प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जा सकता है. तेजस्वी यादव नई रणनीति के साथ पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं.
प्रदेश अध्यक्ष की रेस में ये 3 नाम हैं सबसे आगे
नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश के बीच तीन प्रमुख नेताओं के नामों की चर्चा सबसे तेज है, जिन्हें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है:
1. कुमार सर्वजीत: खबरों के बाजार और आरजेडी के अंदरूनी हलकों में बोधगया से विधायक कुमार सर्वजीत का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है. कुमार सर्वजीत, लालू और तेजस्वी दोनों के ही बेहद भरोसेमंद माने जाते हैं. उनके पिता राजेश कुमार की साल 2005 के विधानसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद सर्वजीत ने अपनी नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था.
2. आलोक मेहता: दूसरा बड़ा नाम पूर्व मंत्री और उजियारपुर से आरजेडी विधायक आलोक मेहता का है. आलोक मेहता के पास केंद्र और राज्य दोनों स्तर की राजनीति का लंबा अनुभव है. वह सांसद भी रह चुके हैं और पार्टी के भीतर कैडर पर उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है. उन्हें संगठन चलाने के अनुभव के कारण एक बेहद गंभीर दावेदार माना जा रहा है.
3. सुधाकर सिंह: बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह का नाम भी इस रेस में तेजी से उभरा है. अपने बेबाक बयानों और आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाने वाले सुधाकर सिंह के नाम पर भी पार्टी का एक धड़ा विचार कर रहा है.
नई रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महज 25 सीटों पर सिमटने के बाद आरजेडी के लिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ नए समीकरण साधना बड़ी चुनौती है. ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी ऐसे चेहरे को बिठाने की तैयारी है जो युवाओं को आकर्षित कर सके और जातिगत समीकरणों में भी फिट बैठता हो.
हालांकि, इन तीनों नामों में से अंतिम मुहर किस पर लगेगी, यह तो एमएलसी चुनाव के बाद ही साफ हो पाएगा, लेकिन यह पूरी तरह तय है कि आरजेडी में एक बड़े और नए युग की शुरुआत होने जा रही है.
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