RLM Crisis: उपेंद्र कुशवाहा पर उठे सवाल, तीन विधायकों के अगले कदम पर सस्पेंस, परिवारवाद पर भी घेरा

आशीष अभिनव

• 05:08 PM • 13 Oct 2026

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में टूट के संकेत? राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में राम पुकार सिन्हा के निलंबन के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी सामने आ रही है. विधायक रामेश्वर महतो ने कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती, तो आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीनों विधायक आपस में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे. इस्तीफे या नई पार्टी बनाने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.

RLM Crisis
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Patna: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भीतर नाराजगी के संकेत मिल रहे हैं. पार्टी नेता राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए निलंबित किए जाने के बाद अब पार्टी के विधायक ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. विधायक रामेश्वर महतो का कहना है कि पार्टी के लिए लंबे समय तक मेहनत करने वाले कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उनसे बातचीत की जानी चाहिए थी. विधायक ने साफ कहा कि अगर राम पुकार सिन्हा के साथ कार्रवाई की गई है, तो उनके समर्थन में सक्रिय रहे विधायकों और कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई होनी चाहिए थी. उन्होंने कार्यकर्ताओं के सम्मान को पार्टी की मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि केवल लोगों को पार्टी से निकालने से संगठन मजबूत नहीं होगा.

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राम पुकार सिन्हा के निलंबन पर क्यों उठे सवाल?

इंटरव्यू के दौरान रामेश्वर महतो  ने कहा कि राम पुकार सिन्हा ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए दिन-रात मेहनत की और पार्टी का झंडा बुलंद किया. वह करीब एक साल से चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे. विधायक के मुताबिक, अगर पार्टी राम पुकार सिन्हा को चुनाव लड़ते हुए नहीं देखना चाहती थी, तो उन्हें पहले ही समझाया जा सकता था. उनका कहना है कि नामांकन के बाद भी पार्टी नेतृत्व बातचीत का रास्ता अपना सकता था और किसी समाधान पर पहुंचने की कोशिश की जा सकती थी. उन्होंने कहा कि किसी कार्यकर्ता से वर्षों तक काम लेने के बाद उसे अंधेरे में रखना और फिर निलंबित कर देना उचित नहीं है. उनके मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हो सकता है.

तीन विधायकों पर भी कार्रवाई की मांग

इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात विधायक का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर राम पुकार सिन्हा के समर्थन में सक्रिय रहने के कारण कार्रवाई की गई है, तो कार्रवाई सभी पर होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राम पुकार सिन्हा के साथ-साथ उन तीनों विधायकों और कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो उनके समर्थन में सक्रिय थे. विधायक ने सवाल उठाया कि आखिर एक ही व्यक्ति को निशाना क्यों बनाया गया? उनके मुताबिक, पार्टी में कई नेता, जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ता राम पुकार सिन्हा के समर्थन में मौजूद थे. उनका तर्क था कि निलंबन के बजाय बातचीत और समझौते का रास्ता अपनाया जाता, तो यह पार्टी के हित में बेहतर होता.

'कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं होगा तो पार्टी कैसे चलेगी?'

विधायक ने पार्टी में कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कार्यकर्ता किसी भी संगठन की रीढ़ होते हैं. अगर कार्यकर्ता पार्टी छोड़ने लगेंगे या कमजोर पड़ जाएंगे, तो संगठन को चलाना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि पार्टी का काम लोगों को जोड़ना होना चाहिए, न कि उन्हें तोड़ना या बाहर निकालना. विधायक ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाती, तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. उनके मुताबिक, कार्यकर्ताओं का सम्मान बनाए रखना नेतृत्व की जिम्मेदारी है.

परिवारवाद पर भी उठाए सवाल

जब उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री बनने को लेकर परिवारवाद का सवाल पूछा गया, तो विधायक ने इस पर सहमति जताई. उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व केवल अपने परिवार के बारे में सोचेगा, तो पार्टी के कार्यकर्ता उपेक्षित महसूस करेंगे. विधायक के मुताबिक, जिस तरह परिवार के सदस्य महत्वपूर्ण होते हैं, उसी तरह पार्टी के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को भी सम्मान और महत्व मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि पार्टी केवल परिवार चलाने का माध्यम नहीं है. संगठन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं का भरोसा और उनका सम्मान जरूरी है. विधायक ने जोर दिया कि कार्यकर्ता नेतृत्व पर भरोसा करके उसके साथ खड़े होते हैं, इसलिए नेतृत्व की भी जिम्मेदारी है कि वह कार्यकर्ताओं के हितों के लिए खड़ा रहे.

क्या RLM में टूट होगी? तीन विधायकों के फैसले पर नजर

इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि क्या आने वाले दिनों में राष्ट्रीय लोक मोर्चा में फूट देखने को मिल सकती है, तो विधायक ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला सुनाने से इनकार किया.उन्होंने कहा कि उनके दोनों साथी विधायक अभी बाहर हैं. पटना लौटने के बाद तीनों आपस में बैठकर बातचीत करेंगे और फिर आगे की रणनीति तय करेंगे. इस्तीफा देने या नई पार्टी बनाने के सवाल पर भी उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि जिस पार्टी में कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं होता, वहां बने रहने का कोई मतलब नहीं है. उनके इस बयान के बाद RLM के भीतर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम होता है, इस पर नजर बनी हुई है.

उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत पर क्या बोले विधायक?

विधायक ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी उपेंद्र कुशवाहा से आखिरी बातचीत 4 अक्टूबर को हुई थी. उनके अनुसार, उस समय राम पुकार सिन्हा को चुनाव में सहयोग करने और उन्हें जिताने के लिए मिलकर काम करने की बात हुई थी. जब उनसे पूछा गया कि क्या उपेंद्र कुशवाहा ने इस मामले में कोई आश्वासन दिया था, तो उन्होंने कहा कि उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. विधायक ने दोहराया कि उनकी मुख्य मांग कार्यकर्ताओं का सम्मान सुनिश्चित करना है. उनका कहना है कि राम पुकार सिन्हा को निलंबित करने के बजाय उनसे बातचीत की जाती, तो विवाद को बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता था.

अब RLM नेतृत्व के रुख पर नजर

राम पुकार सिन्हा के निलंबन को लेकर उठे सवालों और तीन विधायकों के बयानों ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर असंतोष की चर्चा को तेज कर दिया है. एक तरफ विधायक कार्यकर्ताओं के सम्मान और नेतृत्व से संवाद की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके अगले कदम को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उपेंद्र कुशवाहा इस नाराजगी पर क्या रुख अपनाते हैं और तीनों विधायक आपसी बैठक के बाद क्या फैसला लेते हैं. फिलहाल इस्तीफे या नई पार्टी बनाने की कोई घोषणा नहीं हुई है.