लालू परिवार से जुड़ा एक भावुक पल पटना एयरपोर्ट पर देखने को मिला. रोहिणी आचार्य पटना पहुंचीं तो उन्हें रिसीव करने के लिए पिता लालू प्रसाद यादव और बहन मीसा भारती एयरपोर्ट पहुंचे. लंबे समय बाद परिवार के बीच यह मुलाकात चर्चा का विषय बन गई. एयरपोर्ट पर जैसे ही रोहिणी आचार्य की नजर मीसा भारती पर पड़ी, दोनों बहनें एक-दूसरे से गले मिल गईं. इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया. रोहिणी ने मीडिया की तरफ देखकर विक्ट्री साइन भी दिखाया. परिवार के सदस्यों की मौजूदगी और दोनों बहनों के इस मिलन की तस्वीरें अब चर्चा में हैं.
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रोहिणी ने पहले किया था पटना आने का ऐलान
रोहिणी आचार्य की पटना वापसी ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पिता लालू प्रसाद यादव के साथ तस्वीरें साझा की थीं. उन्होंने लिखा था कि उनके लिए पिता की खुशी और आशीर्वाद से बढ़कर कुछ नहीं है और वह अपने पिता के पास लौटकर बेटी का फर्ज निभाने आ रही हैं. रोहिणी का यह बयान इसलिए भी चर्चा में आया था क्योंकि इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक तौर पर राजनीति छोड़ने और परिवार से खुद को अलग करने की बात कही थी. ऐसे में पटना लौटने के बाद लालू परिवार के साथ उनकी तस्वीरें और मुलाकात को लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं.
राजनीति में एक्टिव होंगी रोहिणी आचार्य?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोहिणी आचार्य की पटना वापसी सिर्फ परिवार तक सीमित रहेगी या इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिलेगा? रोहिणी पहले ही चुनावी राजनीति का हिस्सा रह चुकी हैं. 2024 में उन्होंने सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. हाल के दिनों में भी वह राजनीतिक मुद्दों पर बयान देती रही हैं. सितंबर 2026 में आरजेडी की एमएलसी उम्मीदवारों की सूची पर भी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे. ऐसे में उनकी पटना वापसी के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वह दोबारा सक्रिय राजनीति में दिखाई देंगी.
पटना लौटने के बाद राजनीतिक भूमिका क्या होगी?
हालांकि अभी तक रोहिणी आचार्य की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पटना लौटने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी. इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक वापसी की घोषणा के तौर पर नहीं, बल्कि परिवार के बीच उनकी वापसी और उसके बाद पैदा हुई राजनीतिक चर्चाओं के तौर पर देखा जा रहा है. लालू प्रसाद यादव का परिवार लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहा है. परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं और अलग-अलग चुनावी भूमिकाएं निभाते रहे हैं. रोहिणी की वापसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह परिवार और राजनीति दोनों से जुड़ी रही हैं.सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि रोहिणी पटना क्यों आईं... सवाल ये भी है कि क्या बेटी की वापसी के बाद लालू परिवार की राजनीति में रोहिणी की भी फिर से कोई भूमिका बनने वाली है?
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