सहरसा के सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील बना 'जहर'! खाने में सांप मिलने का दावा, 200 से ज्यादा बच्चे बीमार

Saharsa Mid Day Meal News: बिहार के सहरसा जिले के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील खाने के बाद 200 से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया. परिजनों ने भोजन में सांप का बच्चा मिलने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच के लिए FSL टीम और ड्रग इंस्पेक्टर को लगाया है. जानिए सहरसा स्कूल मिड-डे-मील मामले की पूरी कहानी, प्रशासन का बयान और जांच में अब तक क्या सामने आया.

Saharsa Mid Day Meal News
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धीरज कुमार सिंह

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बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है. यहां एक सरकारी स्कूल में मिड-डे-मील यानी मध्यान भोजन खाने के बाद सैकड़ों बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. घटना के बाद स्कूल परिसर में चीख-पुकार मच गई और आनन-फानन में बच्चों को अस्पताल ले जाया गया. परिजनों और बच्चों का आरोप है कि उन्हें जो खाना परोसा गया था, उसमें सांप का बच्चा गिरा हुआ था. इस खबर के फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल और अस्पताल पहुंच गए.

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खाने की थाली में दिखा तेलिया सांप

घटना सहरसा जिले के महशी प्रखंड के मध्य विद्यालय बलवाहा की है. परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बच्चों को परोसे गए खाने में सांप का बच्चा मिला था. एक परिजन ने बताया कि जब उनका बच्चा स्कूल से घर लौटा, तो उसने डरे हुए स्वर में बताया कि खाने में सांप था. जब गांव वाले और परिजन स्कूल पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि खाने की थाली और बर्तन में तेलिया सांप जैसा जीव पड़ा हुआ था. आरोप है कि यह बात जानते हुए भी बच्चों को वही खाना परोसा गया, जिसे खाने के बाद बच्चों को उल्टी और पेट दर्द की शिकायत होने लगी.

अस्पताल में मची अफरा-तफरी, 150 से अधिक बच्चे भर्ती

मिड-डे-मील खाने के बाद जैसे ही बच्चों की हालत बिगड़ी, उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. बच्चों ने बताया कि खाना खाने के बाद उन्हें घबराहट और पेट में तेज दर्द महसूस होने लगा था. हालात को देखते हुए करीब 100 से 115 बच्चों को सहरसा के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 40 से 50 बच्चों का इलाज महशी पीएचसी में चल रहा है. कई बच्चे डर के मारे बेहोश भी हो गए. स्थिति इतनी गंभीर थी कि परिजनों को निजी वाहनों और जैसे-तैसे इंतजाम करके बच्चों को जिला अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा.

प्रशासन का बयान और जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहरसा के DM दीपेश कुमार और एसपी हिमांशु ने खुद सदर अस्पताल पहुंचकर बीमार बच्चों का हाल जाना. जिलाधिकारी ने बताया कि बच्चों को फिलहाल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है और उनकी स्थिति खतरे से बाहर है. कुछ बच्चों को मामूली बुखार (99.5 डिग्री फारेनहाइट) की शिकायत है, जिसका इलाज किया जा रहा है. डीएम ने यह भी कहा कि सांप मिलने की बात जांच का विषय है और इसके लिए एफएसएल (FSL) की टीम को लगा दिया गया है. ड्रग इंस्पेक्टर को भी खाने के सैंपल कलेक्ट करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके.

अफवाह या लापरवाही? जांच के घेरे में शिक्षक

जिला प्रशासन का कहना है कि सांप मिलने की अफवाह के बाद पैनिक फैल गया, जिससे आसपास के स्कूलों के बच्चे भी डर के मारे अस्पताल पहुंच गए जो पूरी तरह स्वस्थ हैं. डीएम ने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक न करें. हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि नियम के मुताबिक खाना परोसने से पहले क्या शिक्षकों ने उसे चखा था? इस पर प्रशासन का कहना है कि यह जांच और अनुसंधान का विषय है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि चूक कहां हुई. बिहार में मिड-डे-मील में इस तरह की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है, जिसने अब सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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