बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी की हार को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं. इस सीट पर लंबे समय से बीजेपी का प्रभाव रहा है और यह पार्टी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन से भी जुड़ी रही है. ऐसे में बांकीपुर में मिली हार को लेकर जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे समीक्षा का विषय बताया. सम्राट चौधरी ने कहा कि चुनाव में समय और परिस्थिति के हिसाब से फैसले लिए जाते हैं और यह संभव है कि पार्टी से किसी तरह की गलती हुई हो. उन्होंने कहा कि जनता सर्वोच्च है और अगर जनता को पार्टी का कोई फैसला पसंद नहीं आया होगा तो उसकी वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता है.
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‘कोई डिसीजन हम लोगों से गलत हुआ होगा’
बांकीपुर सीट पर बीजेपी की हार को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा कि समीक्षा का विषय है. उनके मुताबिक, पार्टी के किसी फैसले में गलती हुई हो सकती है और जनता को लगा होगा कि इससे बेहतर निर्णय लिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि जनता कभी जिताती है और कभी हराती है. इसलिए किसी एक विधानसभा सीट के परिणाम को पूरे राजनीतिक जनादेश का अकेला आधार नहीं माना जा सकता.
क्या बांकीपुर का रिजल्ट सरकार पर ‘रेफरेंडम’ है?
विपक्ष की ओर से बांकीपुर के नतीजे को सरकार के कामकाज पर रेफरेंडम बताए जाने के सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि 243 सीटों पर चुनाव हुआ और गठबंधन को 202 सीटों पर जीत मिली. उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों की जनता ने अपना फैसला दिया है. सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि एक सीट का चुनाव पूरे बिहार के जनादेश को तय नहीं करता. उनके अनुसार सभी 243 विधायक जनता के बीच काम करने के लिए चुने गए हैं और उन्हें अपने क्षेत्र में काम करना चाहिए.
अगड़ी जातियों की नाराजगी के सवाल पर क्या बोले?
बांकीपुर जैसे शहरी विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के पारंपरिक समर्थन को लेकर भी सम्राट चौधरी से सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या अगड़ी जातियों के बीच नाराजगी चुनाव परिणाम में दिखाई दी. इस पर उन्होंने कहा कि बीजेपी जाति के आधार पर राजनीति नहीं करती. उन्होंने साथ ही कहा कि बिहार की जनता का आशीर्वाद एनडीए को मिला है.
प्रशांत किशोर की जीत पर भी सवाल
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत को लेकर पूछे गए सवाल पर सम्राट चौधरी ने इसे किसी व्यक्तिगत राजनीतिक लड़ाई के तौर पर देखने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार की जनता के बीच काम करने का मौका मिला है और सरकार को अपना काम करना है. उन्होंने 2030 के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय फिर बिहार की जनता सरकार के काम का आकलन करेगी.
बांकीपुर का नतीजा क्यों अहम?
बांकीपुर का चुनाव परिणाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह सीट लंबे समय से बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिनी जाती रही है. ऐसे में यहां पार्टी की हार ने उम्मीदवार, चुनावी रणनीति, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख को लेकर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि सम्राट चौधरी ने इस परिणाम को सीधे सरकार के खिलाफ जनादेश मानने के बजाय एक विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम बताया और पार्टी के स्तर पर इसकी समीक्षा की बात कही.
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