लालू ने दी पहचान, नीतीश के बने सिपहसालार..जानें कौन हैं सम्राट चौधरी, जो बिहार में होंगे बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री!

Samrat Chaudhary Journey: सम्राट चौधरी बिहार के 24वें और बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. 1999 में राबड़ी सरकार में मंत्री पद से शुरुआत करने वाले सम्राट ने आरजेडी और जेडीयू में रहने के बाद 2017 में बीजेपी जॉइन की.

samrat choudhary
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न्यूज तक डेस्क

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Samrat Chaudhary News: बिहार की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा जा रहा है. दशकों के इंतजार के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहा है. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना है. आज बुधवार सुबह 11 बजे सम्राट चौधरी बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे.

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गैर-बीजेपी बैकग्राउंड 

सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है, वे उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जिनका न तो आरएसएस (RSS) से कोई पुराना नाता रहा है और न ही उन्होंने बीजेपी से अपनी राजनीति शुरू की है. इसके बावजूद मात्र 8 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए सम्राट पार्टी के कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए बिहार के सीएम बनने जा रहे हैं. 

1999 में पहली बार बने मंत्री  

सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली. उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के बड़े ओबीसी चेहरा रहे. इसी पृष्ठभूमि के चलते सम्राट ने 90 के दशक में राजनीति में कदम रखा. 1999 में वे राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बने, लेकिन उम्र विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. इस विवाद ने उन्हें रातों-रात चर्चित नेता बना दिया.

RJD छोड़ JDU में पहुंचे

2010 में आरजेडी ने सम्राट चौधरी को बिहार विधानसभा में विपक्ष का मुख्य सचेतक बनाया. ये वो दौर था जब बिहार में आरजेडी की बुरी हार हुई थी. विधानसभा में आरजेडी विधायकों की कम संख्या होने के बावजूद वे विपक्षी नेता के तौर पर मुखर रहे. 

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद सम्राट ने लालू यादव का साथ छोड़ दिया और नीतीश कुमार के साथ हो लिए. जीतन राम मांझी की सरकार में वे नगर विकास मंत्री बने, जहां से उनकी एनडीए की राजनीति में औपचारिक एंट्री हुई. 2017 में वे भाजपा में शामिल हुए और पार्टी की कार्यशैली को गहराई से समझना शुरू किया. हालांकि जब मांझी ने नीतीश कुमार से बगावत की तो सम्राट जीतन राम मांझी के साथ खड़े नजर आए. 

बीजेपी का पॉलिटिकल इन्वेस्टमेंट 

साल 2020 में बीजेपी ने सम्राट चौधरी को विधान परिषद भेजकर उन पर बड़ा दांव लगाया. पार्टी उन्हें कुशवाहा समाज के एक बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहती थी. 2021 में पंचायती राज मंत्री के तौर पर उनकी निडर कार्यशैली ने सबको प्रभावित किया, विशेषकर विधानसभा में तत्कालीन अध्यक्ष के साथ हुए उनके तीखे संवाद ने वह काफी सुर्खियों में आ गए थे. 

2022 में मुरेठा का संकल्प 

2022 में जब नीतीश कुमार ने पाला बदला तो बीजेपी ने सम्राट को प्रदेश अध्यक्ष और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की दोहरी जिम्मेदारी दी. इसी दौरान उन्होंने नीतीश कुमार को कुर्सी से हटाने तक 'मुरेठा' (पगड़ी) न खोलने का संकल्प लिया. 2024 में सरकार बदली तो वे डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री बने. 2025 के चुनावों में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद उनका कद तब और बढ़ गया जब उन्हें बिहार का पहला बीजेपी गृह मंत्री बनाया गया. 

नीतीश के उत्तराधिकारी से मुख्यमंत्री तक

बीजेपी ने सम्राट को नीतीश कुमार के 'लव-कुश' वोट बैंक में सेंध लगाने की जिम्मेदारी दी थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया. डिप्टी सीएम रहते हुए उन्होंने खुद को एक कुशल प्रशासक के रूप में पेश किया. 2025 के चुनावों में उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए बीजेपी विधायकों ने उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता माना. आज सम्राट चौधरी बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनकर एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं.

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