Bihar Flood: बाढ़ पीड़ितों पर पिस्तौल तानने वाले SHO संग्राम कुमार सिंह कौन हैं? 6 महीने पहले मिली थी मकेर थाने की कमान

ऋचा शर्मा

• 02:44 PM • 05 Oct 2026

सारण में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. 16 लोगों की मौत और कई लोगों के लापता होने की खबर है. इस मुश्किल वक्त में जब प्रशासन और पुलिस लोगों तक राहत पहुंचाने में जुटे हैं, तभी राहत वितरण के दौरान एक पुलिस अधिकारी का ऐसा वीडियो सामने आया जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया. वीडियो में मकेर थाना प्रभारी संग्राम कुमार सिंह बाढ़ पीड़ितों की भीड़ की ओर पिस्तौल ताने नजर आए. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया.

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बिहार के सारण जिले में बाढ़ की स्थिति ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई इलाकों में पानी भरने के कारण आम जनजीवन प्रभावित है. बाढ़ की इस त्रासदी में अब तक 16 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं. सरकार और प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है.

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इसी राहत अभियान के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए. बाढ़ प्रभावित इलाके में राहत सामग्री बांटी जा रही थी. बड़ी संख्या में लोग राहत पाने के लिए जुटे थे. इसी दौरान मकेर थाना प्रभारी संग्राम कुमार सिंह का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह लोगों की ओर पिस्तौल ताने नजर आ रहे हैं.

बताया जा रहा है कि राहत सामग्री जल्दी पाने की कोशिश कर रहे लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान थाना प्रभारी ने अपनी पिस्तौल निकाल ली. वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया और पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया.

वीडियो सामने आया तो हुई कार्रवाई

सारण वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मकेर थाना प्रभारी संग्राम कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. शुरुआती जांच में पूरे घटनाक्रम को ड्यूटी में भारी लापरवाही, अनुशासनहीनता और मनमानी का मामला माना गया है.

निलंबन के बाद संग्राम कुमार सिंह का मुख्यालय पुलिस केंद्र सारण निर्धारित किया गया है. यानी निलंबन अवधि के दौरान वह मकेर थाने में अपनी जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे. लेकिन सवाल यह है कि आखिर राहत वितरण के दौरान बाढ़ पीड़ितों पर पिस्तौल तानने वाले ये पुलिस अधिकारी संग्राम कुमार सिंह हैं कौन?

कौन हैं संग्राम कुमार सिंह?

संग्राम कुमार सिंह सारण जिले के मकेर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर यानी SHO हैं. करीब छह महीने पहले ही सारण के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने उन्हें मकेर थाने की जिम्मेदारी सौंपी थी.

मकेर थाना प्रभारी बनने से पहले संग्राम कुमार सिंह इसुआपुर थाने में अपर थानाध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे. पुलिस विभाग में उन्हें कड़े तेवर वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है. मकेर थाने की कमान संभालने के बाद भी वह इलाके में कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर सक्रिय रहे. हालांकि अब बाढ़ राहत वितरण के दौरान सामने आए इस वीडियो ने उन्हें एक अलग वजह से सुर्खियों में ला दिया है.

बाढ़ के बीच पुलिस की भूमिका पर सवाल

दरअसल, बाढ़ जैसी आपदा के समय पुलिस और प्रशासन की भूमिका सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती. प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना और भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी होती है.

सारण में भी पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत अभियान में जुटे हैं. लेकिन राहत बांटने के दौरान सामने आए इस वीडियो ने सवाल खड़ा कर दिया कि मुश्किल हालात से जूझ रहे लोगों के साथ पुलिस को किस तरह पेश आना चाहिए. पुलिस विभाग ने भी शुरुआती जांच के बाद संग्राम कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की है. उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है और निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र सारण रखा गया है.

नेपाल की बारिश के बाद बिगड़े हालात

सारण समेत बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति सितंबर के आखिरी सप्ताह में नेपाल और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद बिगड़ी. नेपाल से आने वाली नदियों, खासकर गंडक के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण कई इलाकों में पानी फैल गया. सारण के अलावा पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, दरभंगा और मुजफ्फरपुर भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.

एक तरफ बाढ़ पीड़ित अपने घर, सामान और जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन राहत पहुंचाने में जुटा है. ऐसे वक्त में राहत वितरण के दौरान पुलिस अधिकारी के हाथ में पिस्तौल का वीडियो सामने आना पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना देता है.

अब संग्राम कुमार सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी. फिलहाल पुलिस विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया है और मामले की शुरुआती जांच में उनके व्यवहार को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता माना गया है.