बिहार के रोहतास जिले स्थित सासाराम सदर अस्पताल के मॉडल इमरजेंसी वार्ड से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक बिजली गुल हो जाने के कारण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मरीजों की जांच और इलाज (ड्रिप और सलाइन चढ़ाना) करने पर मजबूर होना पड़ा.
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अंधेरे में टॉर्च की रोशनी के सहारे चल रहे इलाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है.
अलग ट्रांसफार्मर और जनरेटर के बावजूद छाया अंधेरा
गौरतलब है कि सासाराम सदर अस्पताल में निर्बाध और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से अलग ट्रांसफार्मर की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा पावर बैकअप के तौर पर अस्पताल परिसर में जनरेटर और अन्य वैकल्पिक इंतजाम भी मौजूद हैं.
बावजूद इसके, इमरजेंसी वार्ड में अचानक बिजली कट गई और बैकअप सिस्टम तुरंत काम नहीं कर सका. अंधेरा छाते ही वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई. स्थिति को संभालते हुए डॉक्टरों ने समय पर इलाज देने के लिए अपने-अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट और टॉर्च का सहारा लिया.
डीएम ने लिया संज्ञान, जांच टीम गठित
मामला सामने आने के बाद रोहतास के जिलाधिकारी (DM) दीपक कुमार मिश्रा ने घटना का संज्ञान लिया है. डीएम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि एमसीबी (MCB) डाउन होने के कारण कुछ देर के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी.
जिलाधिकारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अस्पताल के पावर बैकअप सिस्टम की स्थिति का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार कर्मियों और आउटसोर्सिंग एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
हालांकि, सदर अस्पताल जैसे बड़े मॉडल अस्पताल में बैकअप व्यवस्था का त्वरित प्रतिक्रिया न दे पाना आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है.
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