बिहार की राजनीति से इस वक्त एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को एक बड़ा झटका लगा है, जहां पार्टी के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और आरजेडी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे देने का ऐलान कर दिया है. इस्तीफा देने की घोषणा के दौरान शिवचंद्र राम का एक बेहद भावुक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह मीडिया और कैमरों के सामने फूट-फूटकर रोते हुए नजर आ रहे हैं. उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर अनदेखी और वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए हैं. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
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इस्तीफा देते हुए कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोए पूर्व मंत्री
शिवचंद्र राम ने न सिर्फ एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से नाता तोड़ा है, बल्कि उन्होंने आरजेडी के भीतर अपने तमाम पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है. इस फैसले को सार्वजनिक करते हुए शिवचंद्र राम अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रख पाए और फफक-फफक कर रो पड़े. उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा कि वह इस सियासी घटनाक्रम के कारण पिछले चार रातों से ठीक से सो भी नहीं पाए हैं. उनके इस तरह कैमरे के सामने रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है और बिहार के सियासी गलियारों में इसकी जमकर चर्चा हो रही है.
आरजेडी नेतृत्व पर लगाया वादाखिलाफी और अनदेखी का आरोप
जब शिवचंद्र राम से आरजेडी के पद छोड़ने की मुख्य वजह पूछी गई, तो उन्होंने पार्टी आलाकमान पर सीधा निशाना साधा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके साथ बड़ी वादाखिलाफी की गई है. उन्हें पहले पार्टी की तरफ से यह आश्वासन और भरोसा दिया गया था कि उन्हें संगठन में पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. शिवचंद्र राम ने आरोप लगाया कि पार्टी के जो शीर्ष लोग और दल के नेता हैं, उन्होंने उन्हें सिर्फ झूठे आश्वासन दिए. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में पार्टी के अंदर अब ईमानदार, सक्रिय और रात-दिन मेहनत करने वाले दबे-कुचले शोषित कार्यकर्ता की अनदेखी हो रही है और वहां सिर्फ मजबूत लोगों की जीत हुई है.
MLC का टिकट न मिलने से थी भारी नाराजगी
इस पूरी सियासी बगावत और इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव में टिकट का न मिलना माना जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में यह पुरजोर चर्चा थी कि आरजेडी इस बार शिवचंद्र राम को अपना एमएलसी उम्मीदवार बना सकती है, लेकिन पार्टी ने उन पर दांव न लगाकर सुनील सिंह को अपना उम्मीदवार चुन लिया. पार्टी की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाए जाने और नजरअंदाज किए जाने से शिवचंद्र राम गहरे असंतोष में थे, जिसके चलते आखिरकार उन्होंने पार्टी नेतृत्व से पूरी तरह दूरी बनाते हुए अपने सभी सांगठनिक पदों को छोड़ने का बड़ा फैसला ले लिया.
आरजेडी के मजबूत दलित चेहरा रहे हैं शिवचंद्र राम
शिवचंद्र राम बिहार आरजेडी के भीतर एक बड़ा और बेहद मजबूत दलित चेहरा माने जाते रहे हैं, जो विशेष रूप से रविदास समुदाय से आते हैं. वह पूर्व में युवा आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान भी संभाल चुके हैं और पार्टी के जमीनी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ रही है. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने वैशाली जिले की राजापाकर सीट से महागठबंधन के टिकट पर चुनाव जीता था. इसके बाद बनी नीतीश-तेजस्वी की महागठबंधन सरकार में उन्हें कला, संस्कृति एवं खेल विभाग का कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था.
पिछले चुनाव और बदलते राजनीतिक समीकरण
साल 2020 के विधानसभा चुनाव के वक्त आरजेडी के समीकरण बदले और शिवचंद्र राम की राजापाकर सीट समझौते के तहत कांग्रेस के खाते में चली गई, जहां से प्रतिमा दास विधायक बनीं. इसके बाद पिछले साल 2024 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने उन पर भरोसा जताते हुए हाजीपुर लोकसभा सीट से चिराग पासवान के खिलाफ मैदान में उतारा था, हालांकि वह यह चुनाव हार गए थे. लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही वह पार्टी में किसी बड़े सम्मान या सदन में भेजे जाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन एमएलसी चुनाव में टिकट कटने के बाद उनके सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने आरजेडी को यह बड़ा झटका दे दिया.
यहां देखें वीडियो
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