बिहार में एक बार फिर एक IAS अधिकारी चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया आदेश नहीं, बल्कि उनके खिलाफ की गई एक अभद्र टिप्पणी और उस पर हुई त्वरित पुलिसिया कार्रवाई है. सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (DM) रिची पांडेय के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले एक युवक को साइबर थाना पुलिस ने धर दबोचा है.
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फेसबुक लाइव में दी थी गालियां
गिरफ्तार युवक की पहचान सुप्पी थाना क्षेत्र के गम्हरिया गांव निवासी सत्यनारायण सिंह के रूप में हुई है. आरोप है कि सत्यनारायण ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर लाइव आकर डीएम रिचि पांडे और जिला प्रशासन के खिलाफ बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था. वीडियो में उसने डीएम को 'भ्रष्टाचारी' और 'अधर्मी' तक कह डाला था. यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया.
साइबर पुलिस ने ऐसे दबोचा
मामला संज्ञान में आते ही साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की. आईपी एड्रेस (IP Address) और लोकेशन ट्रेस करने के बाद पुलिस की विशेष टीम गम्हरिया गांव पहुंची और आरोपी को उसके घर से ही हिरासत में ले लिया. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस कृत्य के पीछे क्या किसी और का भी हाथ था. आरोपी पर IT एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है.
कौन हैं IAS रिची पांडेय?
बिहार के प्रशासनिक गलियारों में रिची पांडेय एक जाना-माना नाम हैं. 2016 बैच के इस IAS अधिकारी की छवि एक 'सख्त और संवेदनशील' ऑफिसर की है.
पढ़ाई: उन्होंने B.E. और MBA किया है, जिसका असर उनकी कार्यशैली (मैनेजमेंट और तकनीकी समझ) में दिखता है.
अनुभव: इससे पहले वे पटना में उप विकास आयुक्त (DDC) और जहानाबाद के जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
उपलब्धि: बेहतर कार्यप्रणाली के लिए उन्हें BEST DEO Award से भी नवाजा जा चुका है.
सख्ती और सादगी का संगम: रिची पांडेय भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही के खिलाफ जितने सख्त हैं, व्यक्तिगत जीवन में उतने ही सरल. वे अक्सर चर्चा में रहते हैं क्योंकि वे प्रोटोकॉल तोड़कर अपने छोटे कर्मचारियों (जैसे चपरासी) के घर आमंत्रण पर पहुंच जाते हैं.
सोशल मीडिया पर 'आजादी' की भी सीमा है
अक्सर लोग समझते हैं कि इंटरनेट पर किसी को भी गाली देकर बचा जा सकता है, लेकिन कानून की नजर से बचना नामुमकिन है. सत्यनारायण सिंह की गिरफ्तारी उन लोगों के लिए एक सबक है जो अभिव्यक्ति की आजादी और बदतमीजी के बीच का फर्क भूल जाते हैं.
इन धाराओं में हो सकती है जेल:
IT Act की धारा 67: आपत्तिजनक सामग्री फैलाने पर 3 साल तक की जेल.
IPC की धारा 504: जानबूझकर अपमानित करने पर 2 साल की सजा.
IPC की धारा 353: सरकारी काम में बाधा डालना.
गाली नहीं, 'RTI' से हिलाएं सिस्टम
अगर आपको प्रशासन या किसी अधिकारी से शिकायत है, तो गाली देना समाधान नहीं बल्कि खुद को मुसीबत में डालना है. लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के कई संवैधानिक तरीके हैं:
लोक शिकायत पोर्टल (CPGRAMS): सीधे केंद्र सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं.
RTI (सूचना का अधिकार): तथ्यों और कागजों से सिस्टम से सवाल पूछें.
न्यायालय: गंभीर मामलों में PIL (जनहित याचिका) दाखिल करें.
मीडिया: जिम्मेदार पत्रकारों तक तथ्यों के साथ अपनी बात पहुंचाएं.
यहां देखें वीडियो
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