दीपक प्रकाश के MLC बनने के बाद भी बढ़ी मुश्किलें, Supreme Court ने मांगा रिकॉर्ड

हर्षिता सिंह

• 05:16 PM • 08 Aug 2026

बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के MLC बनने के बाद भी बढ़ीं मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बिहार सरकार से नामांकन और नियुक्ति का मांगा पूरा रिकॉर्ड, 20 अगस्त को अगली सुनवाई।

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बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं. लेकिन विधान परिषद के सदस्य बनने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश की नियुक्ति को लेकर बिहार सरकार से नियुक्ति और नामांकन से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं. 7 अगस्त को दीपक प्रकाश के मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि दीपक प्रकाश बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और उन्होंने इसकी शपथ भी ले ली है.

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अदालत ने मांगा रिकॉर्ड

विधान परिषद में दीपक प्रकाश की नियुक्ति को लेकर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बिहार सरकार से जवाब मांगा है. अदालत ने MLC पद पर दीपक प्रकाश की नियुक्ति और नामांकन से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने को कहा है. साथ ही, राज्य सरकार से विधान परिषद में उनकी नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना भी पेश करने को कहा गया है.

वहीं, मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दीपक प्रकाश के खिलाफ कथित अयोग्यता का मुद्दा अब नहीं है.

 MLC के चयन पर उठ रहे सवाल

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दावा किया कि दीपक प्रकाश की नियुक्ति की प्रक्रिया गलत है. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कथित संवैधानिक उल्लंघन पहले ही हो चुका है और विधान परिषद का सदस्य बनाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया भी गलत है.

याचिकाकर्ता ने जोर देकर कहा कि दीपक प्रकाश साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा से जुड़े नहीं हैं. ऐसे में राज्यपाल की ओर से उनका मनोनयन गलत तरीके से किया गया है. वहीं अब इस मामले में अगली सुनवाई 20 अगस्त को होने की संभावना है.

विवाद की वजह क्या है?

बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री बनने के समय दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, लेकिन वह बिहार सरकार में मंत्री थे. इसी को लेकर पूरा विवाद शुरू हुआ. 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA को मिली प्रचंड जीत के बाद नीतीश कुमार की अगुवाई में नई सरकार का गठन हुआ था. इस सरकार में दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया था. नियम के मुताबिक, मंत्री बनने के छह महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है.

लेकिन इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 15 अप्रैल को इस्तीफा दिया और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ. नई सरकार में दीपक प्रकाश को 7 मई को फिर से पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया.

इसी बीच 31 जुलाई को बीजेपी MLC देवेश कुमार ने बिहार विधान परिषद की अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया. देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया. अब दीपक प्रकाश के MLC बनने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठ रहे हैं और अदालत ने बिहार सरकार से इससे जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं.