बिहार में नया सियासी समीकरण? यूं ही प्रशांत किशोर से नहीं मिलने पहुंचे तेज प्रताप यादव, जानिए इस मुलाकात के मायने

Bihar politics news: बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की सुगबुगाहट तब तेज हो गई जब तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर से मुलाकात की. इस मीटिंग को संभावित नए गठबंधन, आरजेडी के अंदरूनी समीकरण और तीसरी ताकत के उभरने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. जानिए इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बड़े मायने.

Tej Pratap Yadav Prashant Kishor meeting
Tej Pratap Yadav Prashant Kishor meeting

आशीष अभिनव

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बिहार की राजनीति में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) से उनके शेखपुरा स्थित आवास पर मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. आइए विस्तार से जानते हैं इस मुलाकात के मायने.

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मुलाकात के मायने और सियासी संकेत

यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं मानी जा रही है. तेज प्रताप यादव ने खुद अपने X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण बताया है. उन्होंने लिखा, 'आज की मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें कई ऐसे मुद्दों पर विमर्श हुआ जो आने वाले समय में राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं.' 

तेज प्रताप और PK के बीच क्या पक रहा है?

मिली जानकारी के मुताबिक इस मुलाकात के पीछे कई बड़े सियासी संकेत छिपे हो सकते हैं:

बदलते राजनीतिक समीकरण: तेज प्रताप यादव ने बदलते राजनीतिक समीकरणों और जनता की अपेक्षाओं पर विस्तार से चर्चा की बात कही है.

लालू परिवार में अंदरूनी कलह की सुगबुगाहट: अक्सर तेजस्वी यादव को नसीहत देने वाले तेज प्रताप का प्रशांत किशोर से मिलना, जो लगातार लालू परिवार पर हमलावर रहे हैं, एक बड़े उलटफेर की ओर इशारा करता है.

गठबंधन की राजनीति: प्रशांत किशोर की पार्टी को चुनाव में खास सफलता नहीं मिली है, और उन्होंने भी स्वीकार किया है कि बिहार में एकला चलो की नीति काम नहीं आएगी. दूसरी तरफ, तेज प्रताप ने अपनी नई पार्टी बना ली है. ऐसे में क्या दोनों मिलकर कोई नया मोर्चा बना सकते हैं? 

आरजेडी में टूट की संभावना?

बिहार की राजनीति में चर्चा है कि क्या आरजेडी के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं है. हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान फैजल रहमान जैसे नेताओं का अलग रुख और तेज प्रताप का कांग्रेस व राहुल गांधी को बार-बार नसीहत देना इस ओर इशारा करता है कि बिहार में एक नई 'तीसरी ताकत' उभर सकती है.

नई पीढ़ी की राजनीति

नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के बाद बिहार में नई पीढ़ी के नेताओं के बीच नए गठजोड़ की संभावना बढ़ गई है. प्रशांत किशोर परंपरागत पार्टियों के बजाय परिवार से निकली नई पार्टियों के साथ मिलकर एक नया विकल्प तलाश रहे हों, इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

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