बिहार सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक बार फिर जोरदार हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य के खजाने की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और आरोप लगाया है कि बिहार की सरकार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है.
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तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है, जिसके चलते सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समय पर उनका हक नहीं मिल पा रहा है.
'वेतन और पेंशन के लिए भी तरस रहे लोग'
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिहार में वित्तीय हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों को समय पर वेतन और पेंशन का भुगतान तक नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि जिस राज्य में कर्मचारियों को अपने ही वेतन के लिए आंदोलन या इंतजार करना पड़े, वहां सरकार की वित्तीय सेहत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.तेजस्वी ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही है और चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है.
'मुझे खुद 5-6 महीने तक नहीं मिला था वेतन'
अपने निजी अनुभव का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने कहा कि जब वे सरकार में थे, तब उन्हें खुद 5 से 6 महीने तक वेतन नहीं मिला था.
"मुझे खुद महीनों तक वेतन नहीं दिया गया था. जब मैंने मीडिया के सामने आकर इस मुद्दे को उठाया और आवाज उठाई, तब जाकर मुझे वेतन का भुगतान किया गया. जब राज्य में मंत्रियों तक के वेतन अटक रहे हों, तो आम कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनभोगियों की स्थिति कितनी दयनीय होगी, यह समझा जा सकता है."
वित्तीय स्थिति पर तेजस्वी का तीखा सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि किसी भी राज्य के लिए इससे ज्यादा चिंताजनक बात क्या हो सकती है कि वहां विकास कार्यों की बात तो दूर, बुनियादी वेतन और पेंशन जैसे प्राथमिक मुद्दों पर चर्चा करनी पड़ रही है. तेजस्वी यादव के इस पत्र और तीखे बयानों के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में खजाने की स्थिति को लेकर बयानबाजी और सियासत तेज हो गई है.
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