बिहार में बाढ़ से हाहाकार: तेजस्वी यादव ने PM मोदी को लिखा पत्र, कर दी ये बड़ी मांग

शशि भूषण कुमार

• 09:05 AM • 08 Sep 2026

बिहार में बाढ़ के प्रकोप से करीब 29 लाख लोग प्रभावित हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर 7 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिसमें 5000 करोड़ का पैकेज और CAG जांच शामिल है.

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बिहार में गंगा और उसकी सहायक नदियों के उफान के चलते बाढ़ का दायरा लगातार चौड़ा होता जा रहा है. राज्य के करीब 13 से अधिक जिलों के लाखों लोग जलप्रलय की चपेट में हैं. इस विकराल प्राकृतिक आपदा के बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मोर्चा खोल दिया है. तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप करने और बिहार की बाढ़ को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की पुरजोर गुहार लगाई है. तेजस्वी ने पीएम मोदी से खुद बिहार आकर जमीनी स्थिति का जायजा लेने की अपील भी की है.

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लाखों की आबादी बेहाल, खजाना खाली होने का आरोप

पत्र का हवाला देते हुए राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य की एनडीए सरकार बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि बाढ़ आने से ठीक पहले राज्य सरकार ने आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से करीब 4,000 करोड़ रुपये निकालकर नियमित खर्चों में उड़ा दिए, जिसकी वजह से आज संकट के समय बिहार का खजाना खाली हो चुका है. तेजस्वी ने कहा कि एनडीए के केंद्रीय मंत्री और सांसद बेबस नजर आ रहे हैं और केंद्र से बिहार के हक का राहत पैकेज भी नहीं ला पा रहे हैं.

तेजस्वी यादव की प्रधानमंत्री से 7 मुख्य मांगें:

  • राष्ट्रीय आपदा घोषित हो: बिहार में आई भीषण बाढ़ को केंद्र सरकार आधिकारिक रूप से 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करे.
  • ₹5,000 करोड़ का राहत पैकेज: बाढ़ पीड़ितों की मदद और ध्वस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए राज्य को तुरंत 5,000 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए.
  • सेना और एयरफोर्स की मदद: दूर-दराज़ और पानी से घिरे इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना (Air Force) के हेलीकॉप्टरों और सेना के जवानों को तुरंत तैनात किया जाए.
  • अतिरिक्त बोट और राहत सामग्री: नावों की संख्या बढ़ाई जाए और प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाएं, पॉलिथीन और पशुचारे की व्यवस्था हो.
  • किसान और मजदूरों को अलग मदद: फसल और रोजगार गंवाने वाले किसानों व दैनिक मजदूरों के लिए अलग से विशेष आर्थिक सहायता पैकेज लागू किया जाए.
  • CAG से खातों की जांच: बिहार सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और आपदा कोष/आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) के इस्तेमाल की CAG या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए.
  • फ्लड रेजिलिएंस मिशन का गठन: बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए एक दीर्घकालिक 'फ्लड रेजिलिएंस मिशन' (Flood Resilience Mission) शुरू किया जाए, जो नेपाल और पड़ोसी देशों के साथ बेहतर जल प्रबंधन पर काम करे.

'राजनीति का नहीं, जवाबदेही और राहत का वक्त'

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में तेजस्वी यादव ने इस बात पर जोर दिया कि बिहार का करीब 76 से 80 प्रतिशत भूभाग बाढ़ की त्रासदी झेलता है. इस संकट की घड़ी में बिहार की जनता को खोखली बयानबाजी नहीं, बल्कि त्वरित राहत और जवाबदेही की जरूरत है. उन्होंने केंद्र सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बिना किसी भेदभाव के बिहार को भरपूर वित्तीय व ढांचागत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.

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