'रिल्स नहीं रिएलिटी की बात करिए मोदी जी..' तेजस्वी का PM मोदी पर हमला, GDP ग्रोथ पर घेरा

आशीष अभिनव

• 08:51 AM • 03 Sep 2026

RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के GDP और आर्थिक विकास के दावों पर तीखा पलटवार किया है. तेजस्वी ने कहा कि असल GDP सरकारी आंकड़ों और हेडलाइन में नहीं, बल्कि लोगों की जेब, रसोई और जमीन पर उनकी जिंदगी में दिखाई देती है.

Tejashwi on PM Modi
तेजस्वी का पीएम मोदी पर हमला
Google CTA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से GDP और आर्थिक विकास को लेकर किए जा रहे दावों के बीच राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है. तेजस्वी यादव ने GDP के आंकड़ों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि वह रील्स से बाहर निकलकर रिएलिटी की बात करें. उन्होंने कहा कि देश की असल GDP सरकारी आंकड़ों और हेडलाइन में नहीं, बल्कि जमीन पर लोगों की जिंदगी, उनकी जेब और रसोई में दिखाई देती है. तेजस्वी यादव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री जो दिखाते हैं, वह जरूरी नहीं कि जमीन पर वैसा ही हो और जो नहीं दिखाया जाता, वही असल में जमीन पर मौजूद है.

Read more!

‘मुनाफा ऊपर के 5%, नुकसान नीचे के 95% लोगों को’

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार के आर्थिक मॉडल और GDP मॉडल पर भी सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का फायदा ऊपर के 5 फीसदी लोगों को मिल रहा है, जबकि नुकसान नीचे के 95 फीसदी लोगों को उठाना पड़ रहा है. तेजस्वी ने RBI के डिविडेंड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार के दौर में भारतीय रिजर्व बैंक का डिविडेंड हर साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार को अपना डेफिसिट कम दिखाना होता है तो RBI से मिलने वाला डिविडेंड बढ़ा लिया जाता है. तेजस्वी ने दावा किया कि मोदी सरकार के दौरान पहली बार RBI से 2 लाख 68 हजार करोड़ रुपये निकाले गए.

‘रुपया गिर रहा है, महंगाई बढ़ रही है- तेजस्वी

GDP ग्रोथ को लेकर तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे सवाल किया. उन्होंने कहा कि अगर GDP ग्रोथ इतना मजबूत है तो देश में बढ़ती महंगाई, गिरते रुपये, बेरोजगारी, रोजगार में कमी और बढ़ते घरेलू कर्ज की समस्या क्यों है? तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कई मुद्दे गिनाए. उन्होंने कहा कि रिकॉर्डतोड़ महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी की स्थिति गंभीर है, रोजगार कम हो रहे हैं और घरेलू कर्ज बढ़ रहा है. छोटे व्यापार टूट रहे हैं और युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में अपनी उम्र खपा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग EMI और उधार के सहारे अपनी जिंदगी चला रहे हैं. ऐसे में सिर्फ GDP के आंकड़े दिखाकर विकास का दावा करने पर सवाल उठना स्वाभाविक है.

8.7 करोड़ युवाओं का मुद्दा उठाया

तेजस्वी यादव ने युवाओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री किस बात की GDP ग्रोथ की बात कर रहे हैं, जब उनके मुताबिक देश में 8.7 करोड़ युवा पढ़ाई नहीं कर रहे हैं. इसके साथ ही तेजस्वी ने स्कूलों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि NDA सरकार के 10 साल में 94 हजार स्कूल बंद हुए, यानी औसतन प्रतिदिन 26 स्कूल बंद हो रहे हैं. तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि देश के करीब 1 लाख स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं.

‘85 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज देना उपलब्धि क्यों?’

तेजस्वी यादव ने केंद्र की मुफ्त राशन योजना को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि 12 साल से सत्ता में रहने के बावजूद अगर सरकार 85 करोड़ लोगों को पेट भरने के लिए 5 किलो अनाज देने को अपनी उपलब्धि मानती है, तो इस पर सवाल होना चाहिए. तेजस्वी ने कहा कि जिस देश में 85 करोड़ लोगों को अनाज देना पड़े, वहां ऐसी GDP का क्या फायदा है?

बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका का भी जिक्र

अपने बयान में तेजस्वी यादव ने भारत की प्रति व्यक्ति आय की तुलना पड़ोसी देशों से भी की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब GDP की बात करते हैं तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक है. इसी आधार पर तेजस्वी ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किया कि आखिर किस बात की ग्रोथ को सेलिब्रेट किया जा रहा है.तेजस्वी यादव ने अपने हमले के अंत में प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि सत्ता में 12 साल हो गए हैं और अब झूठ और जुमलों को छोड़कर जमीन पर काम करने का समय है.

महंगाई, बेरोजगारी, रोजगार, शिक्षा पर सरकार को घेरा

तेजस्वी यादव का पूरा हमला GDP के सरकारी आंकड़ों और आम लोगों की आर्थिक स्थिति के बीच अंतर को लेकर है. उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, रोजगार, शिक्षा, घरेलू कर्ज, RBI डिविडेंड और प्रति व्यक्ति आय जैसे मुद्दों को उठाकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं. फिलहाल, उनका यह बयान बिहार की राजनीति के साथ-साथ केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी सियासी बहस को तेज करता दिख रहा है.