RJD में बदलने जा रहा है समीकरण ? तेजस्वी की नई टीम में किस जाति के कितने जिलाध्यक्ष?

ऋचा शर्मा

• 03:39 PM • 03 Sep 2026

तेजस्वी यादव RJD के 55 जिलों में नए जिलाध्यक्ष चुनने में जुटे हैं. इस बार पार्टी में यादवों के साथ EBC, गैर-यादव OBC और दलित वर्ग को भी ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है. जानिए तेजस्वी की नई टीम का जातीय गणित और जिलाध्यक्ष चयन का पूरा फॉर्मूला.

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आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव अपनी नई टीम तैयार करने में जुटे हैं. पार्टी के 55 नए जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया चल रही है. पटना ग्रामीण और पश्चिम चंपारण के नेताओं के साथ बैठक हो चुकी है, जबकि भागलपुर और मोतिहारी के नेताओं से भी बातचीत होनी है.लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जिलाध्यक्ष कौन बनेगा, बल्कि यह है कि तेजस्वी की नई टीम में किस सामाजिक वर्ग को कितनी हिस्सेदारी मिलेगी?

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सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव जिला संगठन में यादवों के साथ-साथ गैर-यादव OBC और EBC नेताओं को भी बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में हैं. यानी नई टीम में जातीय संतुलन साधने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है.

यादवों का दबदबा घटेगा, गैर-यादव पिछड़ों को ज्यादा जगह?

राजद का पारंपरिक सामाजिक आधार यादव-मुस्लिम माना जाता है. लेकिन तेजस्वी अब इस आधार को और बड़ा करने की कोशिश में हैं. यही वजह है कि जिलाध्यक्षों के चयन में सिर्फ यादव नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय गैर-यादव OBC और EBC चेहरों को भी आगे लाने पर जोर है.

खास तौर पर अति पिछड़ा वर्ग तेजस्वी की रणनीति के केंद्र में है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल और प्रदेश प्रधान महासचिव भी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं. बिहार में EBC की बड़ी आबादी को देखते हुए संगठन में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाना राजद की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

यानी नई टीम का फॉर्मूला कुछ ऐसा हो सकता है-
यादव + मुस्लिम वोट बैंक को बनाए रखना
और
OBC + EBC + दलित वर्ग में पकड़ मजबूत करना.

55 जिलाध्यक्षों में कितनी हिस्सेदारी?

अभी पार्टी की तरफ से 55 जिलाध्यक्षों का अंतिम जातिवार बंटवारा घोषित नहीं किया गया है. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि यादव, EBC, OBC, दलित या मुस्लिम समाज के कितने जिलाध्यक्ष बनाए जाएंगे. लेकिन संकेत साफ हैं कि यादवों की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम करने और सामाजिक आधार को ज्यादा व्यापक बनाने की कोशिश होगी.

पार्टी ने हर जिले से चार-चार नाम मंगाए हैं. तेजस्वी यादव इन नामों पर स्थानीय नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं और हर जिले की राजनीतिक जरूरत के हिसाब से फैसला करने वाले हैं.

आरक्षण पर भी पार्टी के अंदर खींचतान

जिलाध्यक्षों के चयन में आरक्षण को लेकर भी राजद के अंदर मतभेद सामने आए हैं. मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने बैठक में मांग की है कि जिलाध्यक्षों के चयन में आरक्षण नहीं होना चाहिए. उनका तर्क है कि पार्टी को जाति के आधार पर नहीं बल्कि मजबूत और सक्षम नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाना चाहिए.

वहीं राजद के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार साधु ने इसका विरोध किया है. उनका कहना है कि राजद संगठन में आरक्षण के पक्ष में है और कुछ जिलाध्यक्ष पद SC-ST के लिए आरक्षित किए जाएंगे. राजद के संविधान के मुताबिक, संगठनात्मक ढांचे में अति पिछड़े वर्गों के लिए 28% और SC-ST के लिए 17% आरक्षण का प्रावधान है. इसलिए असली लड़ाई सिर्फ जिलाध्यक्ष चुनने की नहीं है. असली सवाल यह है कि तेजस्वी यादव इस आरक्षण और सोशल इंजीनियरिंग के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं.

उम्र और छवि भी बनेगी चयन का आधार

तेजस्वी यादव की नजर युवा चेहरों पर भी है. 34 से 40 साल की उम्र के ऊर्जावान नेताओं को आगे लाने की तैयारी है. वहीं 55 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं के लिए जिलाध्यक्ष बनना मुश्किल माना जा रहा है. इसके साथ ही पार्टी के प्रति निष्ठा और साफ छवि भी अहम होगी. ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो संगठन के लिए काम कर सकें और चुनाव के समय पार्टी के उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़े रहें.

एक नेता दो बार से ज्यादा जिलाध्यक्ष नहीं?

पार्टी के अंदर इस बात पर भी चर्चा है कि एक व्यक्ति को दो से ज्यादा बार जिलाध्यक्ष न बनाया जाए. फिलहाल जिलाध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन दोबारा अध्यक्ष बनने की संख्या पर स्पष्ट सीमा नहीं है. इसके अलावा पार्टी यह भी चाहती है कि जिलाध्यक्ष संगठन पर पूरा फोकस करें और खुद विधानसभा चुनाव लड़ने की दौड़ में न रहें. तर्क है कि अगर जिलाध्यक्ष खुद चुनाव लड़ेंगे तो बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में दिक्कत आती है.

अब नजर 55 जिलों के जातीय गणित पर

तेजस्वी यादव की नई टीम में कौन-कौन चेहरे आते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. लेकिन उससे भी ज्यादा दिलचस्प होगा 55 जिलों का जातीय गणित.

क्या यादवों का दबदबा कम होगा?
क्या EBC और गैर-यादव OBC को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा?
SC-ST को कितना प्रतिनिधित्व मिलेगा?
और क्या मुस्लिम समाज को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी?

इन सवालों के जवाब ही बताएंगे कि 2025 के चुनावी झटके के बाद तेजस्वी यादव राजद के संगठन को किस नए सामाजिक समीकरण के साथ खड़ा करना चाहते हैं.