राजद कार्यालय में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी पहुंचे. लेकिन कार्यक्रम की शुरुआत में ही कुछ ऐसा हुआ कि मंच पर मौजूद नेताओं से लेकर वहां बैठे लोगों तक, हर किसी का ध्यान एक पल के लिए तेजस्वी यादव की तरफ टिक गया. दरअसल, श्रद्धांजलि सभा में तेजस्वी यादव की जुबान ऐसी फिसली कि दशरथ मांझी की जगह उन्होंने दो बार जीतन राम मांझी का नाम ले लिया. तेजस्वी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, आज जीतन राम मांझी के श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित सभी लोगों का आभार करता हूं.
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एक बार नहीं, दो बार फिसली जुबान
अब यहां मामला थोड़ा दिलचस्प था, क्योंकि कार्यक्रम किसी और मांझी के सम्मान में था और नाम किसी और मांझी का लिया जा रहा था. मंच पर मौजूद लोगों ने तुरंत तेजस्वी को टोका. इसके बाद तेजस्वी ने अपनी गलती सुधारी और दशरथ मांझी का नाम लिया. हालांकि, जुबान फिसलने का यह छोटा सा पल कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय जरूर बन गया. क्योंकि दशरथ मांझी और जीतन राम मांझी दोनों बिहार की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में अलग-अलग पहचान रखने वाले बड़े नाम हैं. एक ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाया तो दूसरे बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं.
मांझी ने तेजस्वी पर कसा तंज
वहीं, तेजस्वी यादव की जुबान फिसलने पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने तेजस्वी पर तंज कसा है. जीतन राम मांझी ने वीडियो साझा करते हुए लिखा, 'नशा शराब में होती तो नाचती बोतल'। उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि लगता है कि 'बाबू साहब का रात वाला उतरा नहीं था, इसलिए मुझे श्रद्धांजलि दे रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने अपने पोस्ट में तेजस्वी पर निशाना साधते हुए यह भी लिखा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में वह जीते जी अपने पिता लालू प्रसाद और मां राबड़ी देवी को भी श्रद्धांजलि दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि नशा कुछ भी करा सकता है.
तेजस्वी ने मंच से कर दी बड़ी मांग
हालांकि तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी के संघर्ष और उनके साहस को याद किया. उन्होंने कहा कि मुसहर समाज के लोग दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं और सभी को नमन किया. तेजस्वी ने दशरथ मांझी के उस ऐतिहासिक संघर्ष को भी याद किया, जब उन्होंने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का असंभव सा काम कर दिखाया था. तेजस्वी ने कहा कि दशरथ मांझी का संकल्प था, जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं. उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी ने अपने संघर्ष से समाज के सामने एक बड़ी मिसाल कायम की. तेजस्वी यादव ने दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की मांग भी उठाई. इसके साथ ही पटना के किसी प्रमुख चौराहे पर उनकी आदमकद प्रतिमा लगाने और उनके नाम पर आश्रम बनाने की मांग की.
तेजस्वी का बीजेपी पर बड़ा हमला
श्रद्धांजलि सभा में तेजस्वी यादव ने सिर्फ दशरथ मांझी को याद नहीं किया, बल्कि इसी मंच से भाजपा, जदयू और NDA पर भी हमला बोला. तेजस्वी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग दशरथ मांझी के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन उनके समाज और गरीबों की भलाई के लिए काम नहीं करते. उन्होंने दावा किया कि राजद के शासनकाल में गरीबों और दलितों को बसाने का काम किया गया, जबकि आज भाजपा-NDA की सरकार गरीबों को उजाड़ने का काम कर रही है. तेजस्वी ने कहा कि गरीबों को पानी, भोजन, दवाई और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए. उन्होंने सरकार पर गरीबों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. फिलहाल, श्रद्धांजलि सभा में तेजस्वी यादव का दशरथ मांझी की जगह जीतन राम मांझी का नाम लेना दिनभर चर्चा में रहा. मंच पर हुई यह छोटी सी जुबानी चूक राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक अलग ही चर्चा का विषय बन गई. बाद में तेजस्वी ने नाम सुधार लिया, लेकिन कैमरे में कैद हुआ यह पल अब सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है.
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