तेजस्वी यादव के सड़क पर उतरने के कई फायदे, छात्रों की लड़ाई के साथ सियासी जमीन भी होगी मजबूत?

आशीष अभिनव

• 04:06 PM • 19 Aug 2026

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव छात्रों के मुद्दे पर सड़क पर उतरे. लोकभवन मार्च के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया. लेकिन क्या सड़क पर उतरने के फायदे तेजस्वी यादव को मिलेंगे? पढ़िए खबर विस्तार से...

तेजस्वी यादव
Tejashwi Yadav
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न्यूज़ हाइलाइट्स

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छात्रों के मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने लोकभवन मार्च किया

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आरजेडी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मार्च से रोका

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तेजस्वी यादव पुलिस की हिरासत में लिए गए

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तेजस्वी बोले- छात्रों की आवाज दबने नहीं देंगे

बिहार की सियासत में बुधवार को एक बार फिर सड़क बनाम सरकार की तस्वीर दिखाई दी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव छात्रों और युवाओं के मुद्दे को लेकर लोक भवन मार्च पर निकले, लेकिन पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया. बैरिकेडिंग की गई, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और आखिरकार तेजस्वी यादव समेत कई आरजेडी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर तेजस्वी यादव को छात्रों के मुद्दे पर खुद सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी?

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पहली वजह- छात्र और युवा सबसे बड़ा राजनीतिक केंद्र 

बिहार की राजनीति में युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहे हैं. पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, रोजगार और नियुक्तियों में पारदर्शिता जैसे सवाल लगातार उठते रहे हैं. इसी बीच सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल का मुद्दा सामने आया. इसी मामले को लेकर आरजेडी सरकार से जवाब मांग रही है. तेजस्वी ने इस मुद्दे को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रखा, बल्कि इसे छात्रों के भविष्य और अधिकारों से जोड़ दिया है. यानी तेजस्वी की कोशिश साफ है छात्रों के गुस्से को राजनीतिक मुद्दे में बदलना.

दूसरी वजह - सड़क पर उतरकर विपक्ष की सक्रियता दिखाना

नेता प्रतिपक्ष के तौर पर तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार के खिलाफ लगातार राजनीतिक दबाव बनाए रखना है. विधानसभा के बाहर अगर विपक्ष सिर्फ बयान देता रहे तो उसका असर सीमित रह सकता है. लेकिन जब नेता खुद सड़क पर उतरता है, पुलिस से टकराव होता है और हिरासत की तस्वीर सामने आती है, तो पूरा मुद्दा मीडिया और जनता के बीच ज्यादा बड़ा बन जाता है. आज की तस्वीर भी यही रही. मार्च को रोका गया, वाटर कैनन चला और तेजस्वी को हिरासत में लिया गया. यानी तेजस्वी ने सरकार के खिलाफ एक ऐसी राजनीतिक तस्वीर तैयार की जिसमें वह खुद 'सरकार से लड़ते विपक्ष' के चेहरे के तौर पर दिखाई दे रहे हैं.

तीसरी वजह - युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना

तेजस्वी यादव की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा रोजगार और युवा वोटर के इर्द-गिर्द रहा है. लेकिन बिहार में छात्र आंदोलन की राजनीति अब कई अलग-अलग चेहरों और संगठनों के हाथ में भी दिखाई देती है. ऐसे में तेजस्वी के सामने चुनौती यह है कि छात्र और युवा आंदोलन का नेतृत्व विपक्ष के दूसरे चेहरों या छात्र नेताओं के पास न चला जाए. TRE-4.0 समेत भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर पटना में छात्र और अभ्यर्थी पहले से आंदोलन कर रहे हैं. इसलिए तेजस्वी का सड़क पर उतरना एक संदेश भी है छात्रों के आंदोलन से आरजेडी खुद को अलग नहीं रखेगी.

विपक्ष के लिए ये मुद्दे सरकार को घेरने का बड़ा मौका

लेकिन क्या यह सिर्फ छात्रों की लड़ाई है? यहीं से राजनीति का दूसरा पहलू शुरू होता है. सत्ताधारी एनडीए पहले ही आरजेडी के इस मार्च को राजनीतिक प्रदर्शन बता चुका है. यानी सरकार की तरफ से सवाल उठाया जा रहा है कि क्या यह आंदोलन वास्तव में छात्रों के मुद्दों के लिए है या तेजस्वी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. राजनीति में दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं. छात्रों के वास्तविक मुद्दे भी हैं और विपक्ष के लिए ये मुद्दे सरकार को घेरने का बड़ा मौका भी हैं.

तेजस्वी को इससे क्या हासिल होगा?

  • पहला- फायदा युवाओं के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका.
  • दूसरा- सरकार को छात्र विरोधी बताने का नैरेटिव तैयार करना.
  • तीसरा- नेता प्रतिपक्ष के तौर पर अपनी सक्रिय भूमिका दिखाना.
  • चौथा- तेजस्वी आंदोलन की राजनीतिक आवाज के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं.

तेजस्वी के लिए क्या है चुनौतियां? 

लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी है. असली सवाल यह है कि क्या तेजस्वी इस मुद्दे को लगातार उठाते हैं? क्या छात्रों के साथ सड़क से लेकर विधानसभा तक खड़े रहते हैं? क्या पेपर लीक, भर्ती और रोजगार के मुद्दों पर सरकार से ठोस जवाब मांगते हैं? अगर ऐसा होता है, तो आज का मार्च सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं रहेगा. यह तेजस्वी यादव की युवा राजनीति की नई पारी की शुरुआत बन सकता है. इसलिए आज की तस्वीर सिर्फ तेजस्वी के हिरासत में लिए जाने की नहीं है. असली कहानी यह है कि बिहार की राजनीति में छात्र और युवा फिर से एक बड़े राजनीतिक हथियार के तौर पर उभर रहे हैं और तेजस्वी यादव इस मौके को अपने पक्ष में कितना बदल पाते हैं, यही आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल होगा.