बिहार के जाने माने यूट्युबर मनीष कश्यप ने हाल ही में 20% इथेनॉल वाले फ्यूल को लेकर एक वीडियो बनाते हुए दावा किया था की उनकी 40 लाख की हाईब्रिड कार टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस, महज 12,000 किलोमीटर चलने के बाद खराब हो गई. मनीष कश्यप के अनुसार गाड़ी का इंजन पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) के मिश्रण और फ्यूल में कचरे या मिलावट के कारण खराब हुआ है. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होने लगा. जिसके बाद अब इस पूरे विवाद पर खुद कार निर्माता कंपनी टोयोटा (Toyota Kirloskar Motor) ने चुप्पी तोड़ी है.
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टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने अपना आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ की है. कंपनी ने कहा कि उनकी Innova Hycross गाड़ी को E20 पेट्रोल के हिसाब से ही डिजाइन, टेस्ट और सर्टिफाई किया गया है, इसलिए ईंधन का एथेनॉल ब्लेंड होना इस खराबी की वजह बिल्कुल नहीं है. कंपनी की टेक्निकल टीम ने जब गाड़ी की बारीकी से जांच की तो पाया कि असली विलेन E20 पेट्रोल नहीं, बल्कि दूषित और मिलावटी (नॉन-स्टैंडर्ड) ईंधन था. आसान शब्दों में कहें तो पेट्रोल पंप से जो तेल गाड़ी में डाला गया, वह साफ नहीं था और उसमें मिलावट या गंदगी थी.
क्या था पूरा मामला और मनीष कश्यप का दावा?
दरअसल, सोशल मीडिया पर मनीष कश्यप के दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. पहले वीडियो में उन्होंने अपनी करीब 12,000 किलोमीटर चल चुकी टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस (Hybrid MPV) को लेकर एक बड़ा दावा किया. उनका कहना था कि गाड़ी में E20 पेट्रोल डलवाने के बाद से ही उसका इंजन अजीब तरह से थरथराने यानी वाइब्रेशन करने लगा, उसमें से आवाजें आने लगीं और चलती गाड़ी बार-बार बंद होने लगी. मनीष ने आरोप लगाया कि जब गाड़ी से फ्यूल का सैंपल लिया गया तो उसमें तय मानक से ज्यादा इथेनॉल और काफी गंदगी पाई गई.
अपने दूसरे वीडियो में मनीष सीधे टोयोटा के सर्विस सेंटर में नजर आए. वहां कार की जांच के लिए उसका पूरा फ्यूल टैंक नीचे उतारा गया था. वीडियो में उन्होंने कार का फ्यूल पंप और फिल्टर दिखाते हुए कहा कि ईंधन इंजन तक जाने से पहले कई चरणों की छननी से गुजरता है. उन्होंने अलग-अलग जगहों से जुटाए गए पेट्रोल के सैंपल भी दिखाए, जिनके रंग एक-दूसरे से काफी अलग थे और कुछ बोतलों में साफ तौर पर कचरा तैरता दिख रहा था.
सरकार और सिस्टम पर उठे थे गंभीर सवाल
मनीष कश्यप ने वीडियो के जरिए सीधे सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर निशाना साधा था. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इनोवा हाईक्रॉस के फ्यूल कैप पर साफ-साफ लिखा है कि यह गाड़ी Up to E20 Petrol (E20 पेट्रोल तक के लिए उपयुक्त) है, तो फिर ऐसा क्यों हुआ? उन्होंने पूछा कि पेट्रोल में मिलने वाली इस गंदगी और खराबी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है- पेट्रोल पंप मालिक की, तेल रिफाइनरी की, कार बनाने वाली कंपनी की या फिर सरकार की? उन्होंने इस मामले में कानूनी कदम उठाने की चेतावनी भी दी थी.
टोयोटा की सलाह
कंपनी ने इस पूरे विवाद को खत्म करते हुए अपने ग्राहकों से अपील की है कि वे हमेशा प्रामाणिक और भरोसेमंद पेट्रोल पंपों से ही तेल डलवाएं. खराब या मिलावटी क्वालिटी का फ्यूल किसी भी आधुनिक गाड़ी के परफॉर्मेंस को बिगाड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है.
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