बिहार की सियासत में उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपने सियासी कुनबे को सेट करने में वो कितने माहिर हैं. दिल्ली से लेकर पटना तक बिछाई गई गोटियों का नतीजा यह रहा कि उनके बेटे और बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की गिरती हुई कुर्सी आखिरकार बच ही गई.
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दीपक प्रकाश को एमएलसी (MLC) बनाकर मंत्री पद सुरक्षित रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधान पार्षद देवेश कुमार ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
ऐसे सेट हुई पूरे परिवार की 'सियासी गोटियां'
इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही कुशवाहा परिवार के लिए 'सियासी रोजगार' का चक्र पूरा होता दिख रहा है.
उपेंद्र कुशवाहा खुद संसद (MP) पहुंचे हुए हैं.
स्नेहलता कुशवाहा (पत्नी) विधानसभा में विधायक (MLA) के रूप में मौजूद हैं.
दीपक प्रकाश (बेटा) विधान परिषद के सदस्य (MLC) बनने जा रहे हैं.
देवेश कुमार के इस्तीफे से साफ हुआ रास्ता
दीपक प्रकाश फिलहाल न तो विधानसभा के सदस्य थे और न ही विधान परिषद के वैधानिक नियमों के तहत बिना किसी सदन का सदस्य बने कोई व्यक्ति अधिकतम 6 महीने तक ही मंत्री रह सकता है.
दीपक प्रकाश की यह समयसीमा खत्म हो रही थी और सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी नियुक्ति को लेकर सुनवाई चल रही है. ऐसे में बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी के साथ विधान परिषद पहुंचे और सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना इस्तीफा सौंप दिया.
देवेश कुमार का मनोनयन राज्यपाल कोटे से 17 मार्च 2021 को हुआ था और उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था. अब देवेश की बची हुई अवधि के लिए दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जाएगा.
सियासी उठापटक पर चुप्पी, मंत्री जी बोले "मुझे जानकारी नहीं"
इस पूरे अप्रत्याशित डेवलपमेंट पर बीजेपी या राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) का कोई भी बड़ा नेता खुलकर बोलने से बच रहा है. जब मीडियाकर्मियों ने देवेश कुमार से इस्तीफे की वजह पूछी तो उन्होंने कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया.
वहीं दरभंगा पहुंचे मंत्री दीपक प्रकाश से जब सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख और देवेश कुमार के इस्तीफे पर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए पल्ला झाड़ लिया. दीपक प्रकाश ने कहा, "उन्होंने किस कारण से इस्तीफा दिया है, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है.मुझे इस विषय पर कुछ नहीं बोलना है"
दो बार मंत्री बने, लेकिन सदन के सदस्य नहीं थे
गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे. इसके बाद जब 14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया और बाद में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनी, तो 7 मई 2026 के मंत्रिमंडल विस्तार में दीपक को फिर से मंत्री बनाया गया था. अब एमएलसी पद का रास्ता साफ होने के बाद उनकी मंत्री पद की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है.
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