UPSC Result Fake Claims: बिहार से यूपी तक फर्जी IAS की बाढ़! कहीं सम्मान के बाद भागे 'साहब', तो कहीं जश्न पड़ा भारी

UPSC Result Fake Claims: यूपीएससी परीक्षा में समान नाम का फायदा उठाकर फर्जी आईएएस बनने के कई मामले सामने आए हैं. जहां बिहार के रंजीत समेत कई उम्मीदवारों ने गलत रैंक दिखाकर सम्मान पाया और पोल खुलने पर फरार हो गए.

UPSC Result Fake Claims
UPSC Result Fake Claims

ऋचा शर्मा

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यूपीएससी का परिणाम आना किसी भी छात्र के लिए उसके सपनों की उड़ान जैसा होता है लेकिन इस बार के नतीजों ने कुछ ऐसे मामले सामने लाए हैं जिन्होंने पूरे देश को हैरान कर दिया है. बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में कई ऐसे 'उम्मीदवार' सामने आए जिन्होंने समान नाम का फायदा उठाकर यूपीएससी में चयन का झूठा दावा किया. कहीं फूल-मालाएं पहनाई गईं, तो कहीं पुलिस ने सम्मानित किया, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो जश्न शर्मिंदगी में बदल गया.

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जिसे पुलिस ने पहनाई माला, अब उसी को ढूंढ रही

सबसे चौंकाने वाला मामला बिहार के शेखपुरा से आया. रंजीत कुमार नाम के युवक ने दावा किया कि उसने यूपीएससी में 440वीं रैंक हासिल की है. गांव में उत्सव शुरू हुआ, पूर्व विधायक ने सम्मानित किया और पुलिस ने भी माला पहनाई. लेकिन जब आधिकारिक लिस्ट देखी गई, तो पता चला कि यह रैंक कर्नाटक के रंजीत की है. इसके बाद रंजीत फरार हो गया है और अब पुलिस उसकी तलाश कर रही है.

दो आकांक्षाएं और एक रैंक

दूसरा मामला 301वीं रैंक को लेकर सामने आया. बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह ने इस रैंक पर दावा ठोका और बधाइयों का तांता लग गया. हालांकि, जब यूपी के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने भी यही दावा किया, तो मामला यूपीएससी तक पहुंचा. आयोग ने स्पष्ट किया कि गाजीपुर की आकांक्षा सही हैं और आरा की आकांक्षा का दावा झूठा निकला.

नाम की समानता और जल्दबाजी ने बिगाड़ा खेल

यूपी के बुलंदशहर की शिखा गौतम ने 113वीं रैंक का दावा किया था लेकिन वह रैंक हरियाणा की शिखा की निकली. शिखा ने बाद में सफाई दी कि उन्होंने सिर्फ नाम देखा था और रोल नंबर चेक नहीं किया. वहीं गाजीपुर की प्रियंका चौधरी का मामला भी भावनात्मक रहा. उनके पिता, जो एसडीएम के ड्राइवर थे, का भावुक वीडियो वायरल हुआ. बाद में पता चला कि 79वीं रैंक राजस्थान की प्रियंका की है, जबकि यूपी की प्रियंका वर्तमान में जीएसटी इंस्पेक्टर हैं.

क्यों हो रही हैं ऐसी गलतियां?

इन सभी मामलों में एक बात सामान्य है. नाम की समानता आकांक्षा, शिखा और प्रियंका जैसे नाम भारत में बेहद आम हैं. रिजल्ट के समय उत्साह और जल्दबाजी में रोल नंबर और जन्मतिथि न मिलाने के कारण ऐसी भारी चूक हो रही है. जहां कुछ मामले अनजाने में हुई गलती लग रहे हैं, वहीं रंजीत जैसे मामले सुनियोजित धोखे की ओर इशारा कर रहे हैं.

 

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