वैशाली हत्याकांड: अदालत ने दोषी सूरज महतो को सुनाई सश्रम आजीवन कारावास की सजा

वैशाली के चर्चित हत्याकांड में हाजीपुर की जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी सूरज महतो को सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी है. वर्ष 2021 में करैलामन चौक पर शोफी महतो की चाकू मारकर हत्या के मामले में कोर्ट ने छह गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध माना. जानिए पूरा मामला, अदालत का फैसला और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया.

Vaishali Murder Case
लोक अभियोजक श्याम बाबू राय

विकाश कुमार

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वैशाली जिले के एक चर्चित हत्याकांड में हाजीपुर की जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने हत्या के आरोपी को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है. यह फैसला जिला अपर सत्र न्यायाधीश (अष्टम) श्री उमेश कुमार शर्मा की अदालत द्वारा सुनाया गया, जिसके बाद दोषी को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया.

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करैलामन चौक पर हुआ था जानलेवा हमला

लोक अभियोजक श्याम बाबू राय ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि घटना 27 मार्च 2021 की रात करीब 8:45 बजे की है. उस वक्त वादी छोटन महतो अपने पिता शोफी महतो के साथ बरडीहा चौक से वापस लौट रहे थे. इसी दौरान करैलामन चौक के पास पहले से घात लगाए बैठे सूरज महतो ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दोनों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी.

चाकू गोदकर की गई थी बुजुर्ग की हत्या

आरोप के मुताबिक, मारपीट के दौरान ही सूरज महतो ने अचानक बड़े चाकू से शोफी महतो के पेट पर कई ताबड़तोड़ वार कर दिए. इस जानलेवा हमले में शोफी महतो गंभीर रूप से घायल होकर घटनास्थल पर ही गिर पड़े. आनन-फानन में उन्हें महुआ अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. इस घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश फैल गया था.

छह गवाहों की गवाही पर कोर्ट ने सुनाया फैसला

घटना के बाद तिसिऔता थाना में हत्या और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था. पुलिस ने तफ्तीश के बाद सूरज महतो के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया. मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मुस्तैदी से पैरवी की और अदालत के सामने छह महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही व अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे सूरज महतो पर दोष सिद्ध हो गया.

उम्रकैद के साथ लगा 30 हजार का जुर्माना

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद सूरज महतो को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी पाया. इसके बाद 4 जून 2026 को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषी को सश्रम आजीवन कारावास तथा 30 हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई. करीब चार वर्ष पुराने इस मामले में आए फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है.

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