बिहार की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस बदलाव के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है. जहां एक ओर सम्राट चौधरी का कद बढ़कर राज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर नीतीश सरकार में उनके साथ डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा के सियासी भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. लगातार चर्चाएं हो रही है कि अब विजय सिन्हा का क्या होगा और क्या अब भी वे बीजेपी के लिए जरूरी है? विस्तार से जानिए पूरी बात.
ADVERTISEMENT
डिप्टी सीएम से हटे, कैबिनेट में फिलहाल जगह नहीं
जनवरी 2024 से नीतीश सरकार में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा दोनों डिप्टी सीएम थे. सत्ता परिवर्तन के बाद सम्राट चौधरी को 'प्रमोशन' देकर मुख्यमंत्री बना दिया गया, लेकिन विजय कुमार सिन्हा को फिलहाल कैबिनेट में जगह नहीं मिली है. उनकी जगह जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है. इस फेरबदल के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या विजय सिन्हा को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा या संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी.
'पार्टी के लिए पसीना बहाया, लहू दिया'-विजय सिन्हा
बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगने के बाद विजय कुमार सिन्हा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्होंने पार्टी को सत्ता में लाने के लिए लंबे समय तक जमीन पर पसीना बहाया और लहू दिया है. उन्होंने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव शीर्ष नेतृत्व का आदेश मानकर किया. उनके इस बयान में नेतृत्व के प्रति वफादारी के साथ-साथ एक अनकहा दर्द भी साफ झलकता नजर आया.
क्या तारकिशोर और रेणू देवी जैसा होगा हाल?
सियासी जानकार विजय सिन्हा की स्थिति की तुलना पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणू देवी से कर रहे हैं. साल 2021 में सुशील कुमार मोदी को हटाकर इन दोनों को डिप्टी सीएम बनाया गया था, लेकिन बाद में इन्हें न तो दोबारा डिप्टी सीएम बनाया गया और न ही कैबिनेट में जगह दी गई. अब सवाल यह है कि क्या विजय सिन्हा को भी इसी तरह 'साइडलाइन' किया जाएगा या उन्हें कोई नया ओहदा मिलेगा.
बीजेपी के लिए क्यों जरूरी हैं विजय कुमार सिन्हा?
विजय कुमार सिन्हा बीजेपी के उन कद्दावर नेताओं में से हैं जिनकी जड़ें आरएसएस से जुड़ी हैं. वे 2005 से लगातार लखीसराय से विधायक हैं और विधानसभा के स्पीकर के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी बखूबी निभा चुके हैं. वे भूमिहार जाति से आते हैं, जो बीजेपी का परंपरागत और मजबूत वोट बैंक माना जाता है. ऐसे में उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है.
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी की सरकार के विस्तार में विजय सिन्हा को मंत्री बनाया जाता है या फिर उन्हें दिल्ली की राजनीति या संगठन में एडजस्ट किया जाता है.
यहां देखें वीडियो
ADVERTISEMENT


