Meenakshi Madan Roy: बिहार की न्यायपालिका और पटना हाईकोर्ट के इतिहास में एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन रॉय ने पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया है. वह न केवल पटना हाईकोर्ट बल्कि पूर्वोत्तर भारत से किसी भी हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली पहली महिला बन गई हैं. इस नियुक्ति के बाद से ही उनका नाम हर किसी की जुबान पर है.
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दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई, ऐसा रहा शुरुआती सफर
12 जुलाई 1964 को जन्मीं जस्टिस मीनाक्षी मदन रॉय का शैक्षणिक बैकग्राउंड बेहद मजबूत और प्रेरणादायक रहा है. उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा गंगटोक और कुर्सियांग से पूरी की. इसके बाद सिक्किम सरकार द्वारा दी गई मेरिट छात्रवृत्ति के बल पर उन्होंने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. कानून के प्रति अपनी रुचि के कारण उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के ही कैंपस लॉ सेंटर से LLB की डिग्री पूरी की.
सुप्रीम कोर्ट में वकालत से लेकर जज बनने तक का सफर
न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवा शुरू करने से पहले, जस्टिस मीनाक्षी ने साल 1990 में दिल्ली बार एसोसिएशन में खुद को पंजीकृत कराया. उन्होंने एक 'एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड' के अधीन दिल्ली हाईकोर्ट और देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में वकालत की बारीकियों को सीखा.
इसके बाद दिसंबर 1990 में उन्होंने न्यायिक सेवा में प्रवेश किया और सिक्किम में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के रूप में बहाल हुईं. खास बात यह है कि इस पद पर पहुंचने वाली भी वह सिक्किम राज्य की पहली महिला थीं. इसके बाद साल 2004 में वह जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District & Sessions Judge) बनीं और बाद में हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार के पद पर भी रहीं.
सिक्किम से पटना हाईकोर्ट तक का ऐतिहासिक सफर
जस्टिस मीनाक्षी मदन रॉय के शानदार करियर में सबसे बड़ा मोड़ 15 अप्रैल 2015 को आया, जब उन्हें सिक्किम हाईकोर्ट की पहली महिला स्थाई जज नियुक्त किया गया. वहां रहते हुए उन्होंने कई बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. अब पूर्वोत्तर भारत की इस सबसे अनुभवी और कड़क महिला न्यायाधीश को बिहार के सबसे पुराने और सबसे बड़े हाईकोर्ट्स में से एक, यानी पटना हाईकोर्ट का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
न्यायपालिका में महिलाओं के लिए बड़ा संदेश
पटना हाईकोर्ट में उनकी यह नियुक्ति इसलिए सबसे खास है क्योंकि इसके स्थापना इतिहास में आज तक कोई भी महिला मुख्य न्यायाधीश के पद तक नहीं पहुंची थी. इसे भारतीय न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी और समान अवसरों की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. न्यायिक क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जस्टिस मीनाक्षी मदन रॉय का लंबा अनुभव, उनकी कार्यशैली और बेहतरीन न्यायिक समझ पटना हाईकोर्ट के कामकाज को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाएगी.
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