बिहार के नए राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन कौन हैं? जानिए उनके सफर की पूरी कहानी

Bihar New Governor Syed Ata Hasnain: बिहार की राजनीति में मचे बड़े उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति भवन से बड़ा आदेश जारी हुआ है. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. उन्होंने आरिफ मोहम्मद खान की जगह ली है जिनका कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है.

Lt. Gen. (Retd) Syed Ata Hasnain
Lt. Gen. (Retd) Syed Ata Hasnain

सैय्यद अलमदार हुसैन रिजवी

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Who is Lt. Gen. (Retd) Syed Ata Hasnain: बिहार में चल रहे बड़े सियासी फेरबदल के बीच राष्ट्रपति भवन की ओर से देर रात एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया. इस आदेश के तहत दिल्ली, बंगाल और बिहार समेत देश के 9 राज्यों के राज्यपाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर बदल दिए गए हैं. इसी क्रम में भारतीय सेना के अनुभवी और जांबाज अधिकारी रहे लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) (Lt. Gen. (Retd) Syed Ata Hasnain) को बिहार का नया राज्यपाल बनाया गया है. वह आरिफ मोहम्मद खान का की जगह लेंगे. प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और राजभवन की नई भूमिका के बीच आइए जानते हैं कि सैन्य रणनीतियों के माहिर और 'हार्ट्स एंड माइंड्स' नीति के जनक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन आखिर कौन हैं.

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कौन हैं बिहार के नए राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ?

सैयद अता हसनैन ने भारतीय सेना में करीब चार दशकों तक अपनी सेवाएं दी हैं. उनका सैन्य करियर उपलब्धियों से भरा रहा है. साल 2012 से 2014 के बीच उन्होंने श्रीनगर में सेना की सबसे महत्वपूर्ण '15 कोर' (चिनार कोर) के कमांडर के रूप में नेतृत्व किया. उनके पास न केवल युद्ध कौशल का अनुभव है, बल्कि उन्होंने पंजाब, उत्तर-पूर्वी राज्यों और श्रीलंका (IPKF) में भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दी हैं.

'हार्ट्स एंड माइंड्स' पहल से जीती कश्मीर की जनता

जनरल हसनैन की सबसे बड़ी खूबी उनकी 'हार्ट्स एंड माइंड्स' नीति रही है. कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने केवल हथियारों का सहारा नहीं लिया, बल्कि स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने पर जोर दिया. उनके नेतृत्व में सेना ने कश्मीर के युवाओं को शिक्षा, खेल और रोजगार से जोड़ने के लिए कई सामाजिक कार्यक्रम शुरू किए. उनकी इसी दूरदर्शिता के कारण उन्हें रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है.

आपदा प्रबंधन और शिक्षा जगत में योगदान

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी जनरल हसनैन लगातार राष्ट्र सेवा में सक्रिय रहे. उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सदस्य बनाया गया, जहां उन्होंने देश में आपदा राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा, वह कश्मीर विश्वविद्यालय के चांसलर और कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में शिक्षा जगत को भी अपना मार्गदर्शन दे चुके हैं. उनकी बौद्धिक क्षमता और प्रशासनिक अनुभव का लाभ अब बिहार को मिलेगा.

नीतीश के राज्यसभा जाने के बीच नई नियुक्ति

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर हैं. 16 मार्च के बाद राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव की उम्मीद है. ऐसे में एक अनुभवी पूर्व सैन्य अधिकारी का राज्यपाल बनना बिहार की प्रशासनिक मजबूती के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. अब सबकी नजरें इस पर हैं कि नए राज्यपाल के मार्गदर्शन में बिहार की अगली सरकार का स्वरूप क्या होगा.

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