जिसकी हत्या के केस में पति-ससुर समेत 8 लोग गए जेल, 12 साल बाद वही महिला जिंदा मिली

रंजन कुमार

• 09:33 AM • 12 Sep 2026

बिहार के रोहतास में 2014 में सरस्वती देवी की हत्या का मामला दर्ज हुआ था. पति, ससुर और जेठ समेत आठ लोगों पर आरोप लगे और कई जेल गए. अब 12 साल बाद सरस्वती झारखंड में जिंदा मिली हैं. इससे नहर से मिले शव की पहचान और पूरी पुरानी जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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बिहार के रोहतास जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. 12 साल पहले जिस महिला को मृत मान लिया गया था, वह अब झारखंड में जिंदा मिली है. महिला की हत्या के आरोप में उसके पति, ससुर और जेठ समेत परिवार के आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था. इनमें से कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा था.

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अब महिला के जिंदा मिलने के बाद पूरे मामले की जांच और उस समय की पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि 22 अगस्त 2014 को नहर से जो महिला का शव मिला था, वह आखिर किसका था?

2014 में अचानक घर से गायब हुई थी सरस्वती देवी

मामला डेहरी इलाके का है. अगस्त 2014 में मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बालरति बिगहा-दहाउर इलाके की रहने वाली सरस्वती देवी अचानक घर से गायब हो गई थी. बताया गया कि वह अपने रिश्ते के एक देवर के साथ घर से चली गई थी.

परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. इसी दौरान 22 अगस्त 2014 को खंडा गांव के पास नहर से एक महिला का शव बरामद हुआ. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इसके बाद सरस्वती देवी के भाई ने शव की पहचान अपनी बहन के रूप में की.

पति, ससुर और जेठ समेत 8 लोगों पर हत्या का केस

शव की पहचान सरस्वती देवी के तौर पर होने के बाद उसके मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया. पुलिस ने इस मामले में पति अरुण मेहता, ससुर दिलीप मेहता और जेठ गोविंद कुमार समेत परिवार के आठ लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया.

पुलिस ने जांच के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया. पति, ससुर और जेठ को भी जेल भेज दिया गया. परिवार के लोगों को लंबे समय तक इस हत्या के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा. उस समय सभी के सामने यही कहानी थी कि सरस्वती देवी की हत्या कर उसका शव नहर में फेंक दिया गया.

12 साल बाद अचानक सामने आई महिला

समय बीतता गया और मामला पुराना होता चला गया. लेकिन हाल में परिवार के लोगों को ऐसी जानकारी मिली, जिसने पूरे केस को पलट दिया. बताया गया कि सरस्वती देवी जिंदा है और झारखंड में रह रही है. सूचना मिलने के बाद डेहरी मुफस्सिल थाना पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू की.

जांच करते हुए पुलिस झारखंड के गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी गांव पहुंची. वहां पुलिस को एक महिला मिली. पुलिस के मुताबिक, महिला की पहचान सरस्वती देवी के रूप में हुई.

नाम बदलकर कांति देवी के रूप में रह रही थी

पुलिस के अनुसार, महिला झारखंड में अपना नाम बदलकर कांति देवी के नाम से रह रही थी. वह लभारी गांव में रट्टू सिंह नाम के व्यक्ति के साथ रह रही थी. पुलिस महिला को अपने साथ बिहार लेकर आई. इसके बाद उसे सासाराम कोर्ट में पेश किया गया. महिला के सामने आने के बाद 2014 के उस हत्या केस की पूरी कहानी पर सवाल उठने लगे हैं.

अब 2014 में मिले शव का क्या होगा?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल नहर से मिले उस शव को लेकर है. अगर पुलिस की बरामदगी वाली महिला वास्तव में सरस्वती देवी ही है, तो 2014 में नहर से मिला शव किसी दूसरी महिला का था.

ऐसे में यह पता लगाना बेहद जरूरी होगा कि उस शव की पहचान सरस्वती देवी के रूप में कैसे हुई थी. पहचान किस आधार पर की गई थी और पोस्टमार्टम के दौरान क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा.

परिवार ने नए सिरे से जांच की मांग की

सरस्वती देवी के जिंदा मिलने के बाद ससुराल पक्ष ने पूरे मामले की दोबारा जांच की मांग की है. परिवार का कहना है कि जिस केस में उन्हें आरोपी बनाया गया और जेल तक जाना पड़ा, उसकी अब नए सिरे से पड़ताल होनी चाहिए. सरस्वती देवी का एक 22 साल का बेटा भी है. जब वह घर से गायब हुई थी, तब उसका बेटा काफी छोटा था.

पुलिस के सामने कई अनसुलझे सवाल

अब जांच में कई अहम सवाल सामने हैं. 2014 में नहर से मिला शव आखिर किस महिला का था? उसकी पहचान सरस्वती देवी के रूप में किस आधार पर हुई? क्या पहचान की प्रक्रिया में कोई गलती हुई थी? पोस्टमार्टम और उस समय की जांच में क्या सामने आया था? इसके अलावा हत्या के आरोप में जेल जाने वाले आठ लोगों की कानूनी स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 12 साल पहले मिले शव की वास्तविक पहचान पता करना है. अगर झारखंड से मिली महिला की पहचान सरस्वती देवी के तौर पर पुख्ता होती है, तो 2014 की जांच में हुई कथित चूक की तस्वीर भी सामने आ सकती है. आगे की जांच से ही साफ होगा कि उस समय नहर से मिला शव किसका था और इस पूरे मामले की असली कहानी क्या है.