आज हम बात करेंगे उन लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की, जिनकी धड़कनें इस वक्त तेज हैं. सवाल एक ही है- क्या 8वें वेतन आयोग 8th CPC के आने से पहले ही उनकी सैलरी में बड़ा धमाका होने वाला है? क्या 50% महंगाई भत्ता (DA) बेसिक पे में मर्ज होने जा रहा है? महंगाई की मार के बीच, कर्मचारी संगठनों जैसे FNPO ने 8वें वेतन आयोग की अध्यक्ष, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को पत्र लिखकर 1 जनवरी 2026 से 50% DA को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग की है. तर्क है कि जब DA 50% पार कर जाए, तो इसे महंगाई वेतन के रूप में मर्ज कर देना चाहिए. अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो सैलरी का गणित पूरी तरह बदल जाएगा.
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बेसिक सैलरी सीधे तौर पर बढ़ जाएगी. चूंकि HRA (House Rent Allowance और बाकी अलाउसेंस बेसिक पे पर आधारित होते हैं, उनमें भी अपने आप बढ़ोतरी होगी. ग्रेच्युटी और पेंशन कैलकुलेशन एक बड़े बेस पर होगी, जिससे भविष्य सुरक्षित होगा.
लेकिन ठहरिए! सस्पेंस अभी बाकी है. सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर इस मर्जर के लिए कोई हरी झंडी नहीं दी है. वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल 7वें वेतन आयोग के नियमों के तहत ही DA का भुगतान जारी रहेगा. फिलहाल DA 58% तक पहुंच चुका है और जनवरी 2026 से इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है.
आठवें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है. जानकारों का मानना है कि अगर मर्जर नहीं भी होता, तो भी 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर के जरिए सैलरी में 30% से अधिक की भारी वृद्धि हो सकती है. सरकारी कर्मचारियों के लिए 'DA' सिर्फ दो अक्षर नहीं, बल्कि उनकी खुशहाली की चाबी है! लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह काम कैसे करता है और इसका असली फायदा क्या है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं.
DA क्या है और सैलरी में कैसे एड होता है
DA यानी Dearness Allowance (महंगाई भत्ता). ये सरकार का कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाने वाला वो पैसा है, जो महंगाई की मार को कम करने के लिए दिया जाता है. चूंकि समय के साथ दूध, पेट्रोल, अनाज जैसी चीजों की कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए सरकार सैलरी के साथ DA जोड़ती है. जैसे-जैसे बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई DA बढ़ाती है। इससे आपकी जेब पर महंगाई का असर कम होता है.
पेंशन पर भी मिलता है महंगाई भत्ता
जब DA 50% के आंकड़े को छूता है, तो HRA, ग्रेच्युटी जैसी लिमिट में अपने आप बढ़ोतरी हो जाती है. याद रखें, DA पूरी तरह से टैक्सेबल होता है, लेकिन यह आपकी नेट टेक-होम सैलरी को बढ़ा देता है. रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को जो पेंशन मिलती है, उस पर भी महंगाई राहत (DR - Dearness Relief) मिलती है, जिससे बुढ़ापा सुरक्षित रहता है.
50 फीसदी DA होने पर बेसिक पे में मर्ज करने की उठती है मांग
50% DA होने पर इसे बेसिक पे में मर्ज करने की मांग उठती है जैसा कि Financial Express की रिपोर्ट में बताया गया है, जिससे भविष्य में फिटमेंट फैक्टर और पूरी सैलरी का स्ट्रक्चर बदल जाता है. तो ये है DA का गणित! महंगाई बढ़ेगी तो DA भी बढ़ेगा, और आपकी सैलरी में इजाफा होगा. महंगाई भत्ता (DA) सिर्फ कर्मचारियों के लिए खुशखबरी नहीं होता, बल्कि ये देश के खजाने के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती भी है. जब भी सरकार DA में महज 3% या 4% की बढ़ोतरी करती है, तो सरकारी तिजोरी पर अरबों रुपयों का भार पड़ता है. आइए, आंकड़ों की जुबानी समझते हैं सरकार का ये भारी-भरकम खर्च.
DA बढ़ते ही सरकारी खजाने पर पड़ता है असर
हाल ही में जुलाई 2025 से लागू 3% DA बढ़ोतरी के फैसले से केंद्र सरकार के खजाने पर सालाना लगभग ₹10 हजार करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा. इससे पहले जनवरी 2024 में 4% डीए बढ़ाने से खजाने पर सालाना करीब 13 हजार करोड़ का असर हुआ था. खर्च इसलिए इतना अधिक है क्योंकि इसका सीधा फायदा करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को डीए और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों DR के माध्यम से मिलता है.
जैसे ही केंद्र सरकार DA बढ़ाती है, राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के लिए समान बढ़ोतरी की घोषणा करती हैं. अभी-अभी मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने कर्मचारियों के लिए 58% DA की मंजूरी दी है. अगर सरकार 50% DA को बेसिक पे में मर्ज करने का फैसला लेती है, तो यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय बदलाव होगा, लेकिन सवाल है कि सरकारी तिजोरी पर इसका कितना बड़ा बम फूटेगा?
Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, यदि 50% DA को मूल वेतन में मर्ज किया जाता है, तो केंद्र सरकार पर सालाना 40,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है. यह खर्च सिर्फ केंद्र का है, राज्यों का हिस्सा जोड़ दें तो यह आंकड़ा और भी बड़ा होगा. सरकार के फायदे की बात ये है कि कर्मचारियों को जो मिलेगा वो बाजारों में खर्च होगा. इससे इकोनॉमी को बूस्टर मिलेगा.
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