सरकारी कर्मचारियों और पेंशन पाने वालों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर फिर चर्चा तेज है. वजह यह है कि रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आयोग फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के आसपास रखने की सिफारिश कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी तो होगी, लेकिन 69 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी की जो उम्मीद लगाई जा रही थी, वह पूरी होती नहीं दिखेगी.
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कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखा जाए. उनका कहना है कि ऐसा होने पर न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 69 हजार रुपये तक पहुंच सकती है. लेकिन अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और 2.57 का आंकड़ा भी फिलहाल सिर्फ एक संभावित अनुमान माना जा रहा है.
8वें वेतन आयोग पर नया अपडेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के आसपास रखने की सिफारिश कर सकता है. यही आंकड़ा 7वें वेतन आयोग में भी लागू किया गया था. अगर इस बार भी वही स्तर रखा जाता है, तो बढ़ोतरी होगी, लेकिन वह कर्मचारियों की मौजूदा उम्मीद से कम हो सकती है.
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?
फिटमेंट फैक्टर वह आधार है, जिसके हिसाब से नई बेसिक सैलरी और पेंशन तय होती है. आसान भाषा में कहें तो यही वह नंबर है, जो बताता है कि वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी. इसी वजह से हर वेतन आयोग में सबसे ज्यादा नजर इसी पर रहती है.
कर्मचारी संगठन की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 3.83 होना चाहिए. उनका तर्क है कि महंगाई, रोजमर्रा के खर्च और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए ज्यादा बढ़ोतरी जरूरी है. इसी मांग के आधार पर 69 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही है.
रिपोर्ट्स और मांग के बीच कितना फर्क है
अभी जो संभावित आंकड़ा सामने आया है, वह 2.57 के आसपास है. दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन 3.83 की मांग कर रहे हैं. यानी चर्चा में चल रहे आंकड़े और कर्मचारियों की मांग के बीच साफ अंतर है. इसी वजह से 69 हजार रुपये वाली सैलरी फिलहाल मांग के स्तर पर ही दिख रही है.
सरकार सावधानी क्यों बरत रही है?
वेतन आयोग की सिफारिश का असर सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर पेंशन पाने वालों पर भी पड़ता है. साथ ही कई राज्य सरकारें भी इसी तरह के ढांचे को अपनाती हैं. ऐसे में अगर फिटमेंट फैक्टर बहुत ज्यादा बढ़ाया जाता है, तो सरकार पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार और आयोग दोनों खर्च के असर का आकलन कर रहे हैं.
फिलहाल प्रक्रिया कहां तक पहुंची है?
आयोग अलग-अलग राज्यों से सुझाव ले रहा है. राज्य सरकारों, कर्मचारी संगठनों और दूसरे पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन किया जाएगा. इसके बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा. यानी अभी आखिरी फैसला होना बाकी है.
7वें वेतन आयोग का आधार
7वें वेतन आयोग में भी फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. उसके बाद कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 7000 रुपये से बढ़कर लगभग 18000 रुपये हो गई थी. इसी पुराने आधार की वजह से 2.57 का आंकड़ा अब फिर चर्चा में है.
- रिपोर्ट्स में 2.57 के आसपास फिटमेंट फैक्टर की संभावना बताई जा रही है. - कर्मचारी संगठन 3.83 की मांग कर रहे हैं. - 69 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी की चर्चा इसी मांग से जुड़ी है. - अभी कोई अंतिम सिफारिश या सरकारी मंजूरी सामने नहीं आई है. - आयोग राज्यों और दूसरे पक्षों से मिले सुझावों का अध्ययन कर रहा है.
फिलहाल सबसे अहम बात यह है that 69 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक सैलरी पर अभी सरकार की मुहर नहीं लगी है. अगर फिटमेंट फैक्टर 3.83 के करीब जाता है तो कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन अगर सिफारिश 2.57 के आसपास रहती है, तो वेतन बढ़ेगा जरूर, मगर उम्मीद से कम. अब आगे का रास्ता 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के फैसले से साफ होगा.
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