8th Pay Commission news: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और राज्य कर्मचारियों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं. कर्मचारी संगठनों की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्र द्वारा वेतन बढ़ाने से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ेगा और क्या इससे अर्थव्यवस्था तथा बाजार को मजबूती मिलेगी?
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न्यूज Tak पर कर्मचारी प्रतिनिधि जनरल सेक्रेटरी (JCM) शिव गोपाल मिश्रा ने वेतन आयोग, राज्य सरकारों की स्थिति, अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव और महिला कर्मचारियों से जुड़ी अहम मांगों पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि जब भी केंद्र सरकार वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करती है, तो राज्य सरकारों पर भी अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने का दबाव बनता है.हर वेतन आयोग के समय एंप्लॉयर (सरकार) द्वारा यह तर्क दिया जाता है कि राज्यों की कमाई कम है और वे कंगाल हो जाएंगे.
लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले सात वेतन आयोगों में कभी कोई राज्य कंगाल नहीं हुआ. केंद्र के साथ-साथ राज्य कर्मचारियों को भी उनका हक मिलना चाहिए.
परचेजिंग पावर, जीडीपी और शेयर बाजार पर सकारात्मक असर
कर्मचारी प्रतिनिधि के अनुसार, वेतन बढ़ना केवल सरकार का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ती है.
जीडीपी में उछाल: जब कर्मचारियों के पास पैसा आता है, तो बाजार में मांग (Demand) बढ़ती है. लोग गाड़ियां, घर और रोजमर्रा का सामान खरीदते हैं, जिससे ऑटो और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर सहित पूरी इंडस्ट्री को ग्रोथ मिलती है.
शेयर बाजार को मजबूती: मार्केट में तरलता (Liquidity) बढ़ने से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है और इसका सीधा फायदा शेयर बाजार और देश की ओवरऑल जीडीपी को होता है.
आउटसोर्स और प्राइवेट कर्मचारियों का मुद्दा
सरकारी दफ्तरों और औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे नोएडा/फरीदाबाद) में काम करने वाले आउटसोर्स और ठेका मजदूरों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई. न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) न मिलना, पीएफ/ईएसआई की कटौती न होना और श्रम कानूनों का सही से पालन न होना गंभीर समस्या है. कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को भी बुनियादी सुविधाएं और न्यूनतम वेतन अनिवार्य रूप से दिया जाए.
महिला कर्मचारियों के लिए विशेष मांगें: मेंस्ट्रुअल लीव और वर्क फ्रॉम होम
वेतन आयोग के समक्ष महिला कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर कई बड़ी मांगें रखी गई हैं.
मेंस्ट्रुअल लीव (Menstrual Leave): महिला कर्मचारियों को हर महीने 3 दिन की विशेष छुट्टी (Menstrual Leave) दी जाए.
चाइल्ड केयर लीव (CCL) की बहाली: 7वें वेतन आयोग में दूसरे साल की लीव के दौरान 20% की कटौती की गई थी, उसे पूरी तरह 100% सवेतन बहाल किया जाए.
स्वास्थ्य संबंधी छुट्टियां: गर्भाशय के ऑपरेशन (Hysterectomy) और अन्य गंभीर महिला बीमारियों के लिए विशेष मेडिकल लीव की व्यवस्था हो.
फ्लेक्सी टाइमिंग व वर्क फ्रॉम होम: महिलाओं को वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने के लिए फ्लेक्सी लीव (Flexible Timings) और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) की सुविधा मिले.
कार्यस्थल पर सुरक्षा: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनी समितियों में महिला कर्मचारियों की वास्तविक और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए.
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