8th Pay Commission: ग्रेच्युटी पर कर्मचारियों की बड़ी मांग, 25 लाख रूपये की लिमिट बढ़कर 75 लाख रूपये होगी? जानें पूरा गणित

तनीषा त्यागी

• 11:08 AM • 20 Oct 2026

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रेच्युटी को लेकर बड़ी मांग सामने आई है. कर्मचारी संगठन मौजूदा 25 लाख रुपये की सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा कैलकुलेशन का तरीका बदलने और 16.5 गुना वेतन की सीमा हटाने का प्रस्ताव भी है. जानिए इन मांगों का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ सकता है.

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8th Pay Commission : रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम केंद्रीय कर्मचारियों के लिए काफी अहम होती है. अब 8वें वेतन आयोग के सामने इस रकम की अधिकतम सीमा बढ़ाने और कैलकुलेशन का तरीका बदलने की मांग रखी गई है. कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि मौजूदा 25 लाख रुपये की लिमिट को बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया जाए. इसके अलावा, ग्रेच्युटी की गणना में भी बदलाव की मांग उठी है. ऐसे में सवाल है कि अभी ग्रेच्युटी कैसे तय होती है, कर्मचारियों को कितनी रकम मिल सकती है और 8वें वेतन आयोग से उनकी क्या उम्मीदें हैं.

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ग्रेच्युटी क्या है और कर्मचारियों के लिए क्यों है जरूरी?

ग्रेच्युटी वह एकमुश्त रकम है, जो किसी कर्मचारी को लंबे समय तक नौकरी करने के बाद निर्धारित नियमों के तहत मिलती है. आमतौर पर यह राशि रिटायरमेंट के समय दी जाती है. सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की रकम उनकी आखिरी सैलरी और सेवा की अवधि के आधार पर तय होती है. ग्रेच्युटी को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सहारे के तौर पर देखा जाता है. नौकरी के दौरान नियमित कमाई होती है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद आय के स्रोत सीमित हो सकते हैं. ऐसे में ग्रेच्युटी से रोजमर्रा के खर्चों, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और दूसरी वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद मिल सकती है. इसकी गणना में बेसिक पे यानी मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) की अहम भूमिका होती है. यही वजह है कि कर्मचारी संगठन ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा के साथ-साथ उसके कैलकुलेशन के नियमों में भी बदलाव चाहते हैं.

अभी कितनी है ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा?

फिलहाल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये है. इसके अलावा, ग्रेच्युटी की रकम कर्मचारी के कुल वेतन के 16.5 गुना से ज्यादा नहीं हो सकती. इसका मतलब है कि कर्मचारी की सैलरी और सेवा अवधि के हिसाब से ग्रेच्युटी की गणना की जाती है, लेकिन अधिकतम भुगतान की तय सीमा भी लागू होती है. ऐसे में अगर कैलकुलेशन के हिसाब से रकम ज्यादा बनती है, तो निर्धारित अधिकतम सीमा का महत्व बढ़ जाता है. कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि समय के साथ महंगाई, इलाज और दूसरी जरूरतों पर होने वाला खर्च बढ़ा है. इसलिए उनका मानना है कि मौजूदा सीमा की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली रकम कर्मचारियों की जरूरतों के ज्यादा अनुकूल हो सके.

8वें वेतन आयोग से ₹75 लाख की ग्रेच्युटी की मांग

ग्रेच्युटी को लेकर सबसे बड़ी मांग इसकी अधिकतम सीमा बढ़ाने की है. नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने ग्रेच्युटी की मौजूदा 25 लाख रुपये की सीमा को तीन गुना बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. अगर इस मांग को मंजूरी मिलती है, तो ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बड़ा बदलाव हो सकता है. हालांकि, फिलहाल यह कर्मचारियों की ओर से रखी गई मांग है. इसे सरकार की ओर से मंजूर किया गया फैसला नहीं माना जाना चाहिए. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि रिटायरमेंट से जुड़े वित्तीय लाभों को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर बनाया जाए. ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ने से उन कर्मचारियों को खास फायदा मिल सकता है, जिनकी सेवा अवधि और अंतिम वेतन के आधार पर बनने वाली रकम मौजूदा सीमा के करीब पहुंचती है या उससे ज्यादा होती है.

सिर्फ लिमिट नहीं, ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन में भी बदलाव की मांग

कर्मचारी संगठनों की मांग सिर्फ ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा तक सीमित नहीं है. वे इसकी गणना के तरीके में भी बदलाव चाहते हैं. एक प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रेच्युटी की गणना 30 दिनों के बजाय 25 कामकाजी दिनों के आधार पर की जानी चाहिए. इसके साथ ही, ग्रेच्युटी की रकम पर लागू 16.5 गुना वेतन की सीमा को पूरी तरह हटाने की मांग भी की गई है. इस मांग का मकसद गणना के मौजूदा तरीके में बदलाव करना है, ताकि कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम बढ़ सके. हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा.

IRTSA ने ₹50 लाख की सीमा और अलग फॉर्मूले का दिया सुझाव

ग्रेच्युटी को लेकर इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने भी अपना प्रस्ताव रखा है. संगठन ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने की मांग की है. इसके अलावा, IRTSA ने ग्रेच्युटी की गणना के फॉर्मूले में भी बदलाव का सुझाव दिया है. संगठन चाहता है कि सेवा के हर छह महीने की अवधि के लिए बेसिक पे और महंगाई भत्ते के एक-तिहाई हिस्से के आधार पर ग्रेच्युटी की गणना की जाए. इस तरह ग्रेच्युटी को लेकर कर्मचारी संगठनों के सुझाव अलग-अलग हैं. NC-JCM के स्टाफ साइड ने जहां अधिकतम सीमा 75 लाख रुपये करने की मांग की है, वहीं IRTSA ने 50 लाख रुपये की सीमा और गणना के अलग तरीके का प्रस्ताव दिया है.

सरकारी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कैसे होता है?

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की गणना सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 2021 के तहत की जाती है. इसके अनुसार, पात्र कर्मचारी को सेवा के हर पूरे छह महीने की अवधि के लिए अंतिम बेसिक पे और DA के कुल योग का एक-चौथाई हिस्सा ग्रेच्युटी के रूप में दिया जाता है. इसे आसान भाषा में समझें तो कर्मचारी का अंतिम मूल वेतन और महंगाई भत्ता जोड़ने के बाद उस रकम का 25 फीसदी हिस्सा निकाला जाता है. फिर इसे सेवा की पात्र छह महीने की अवधियों की संख्या से गुणा किया जाता है. इस तरह बनने वाली रकम पर निर्धारित अधिकतम सीमा भी लागू होती है.

फॉर्मूला:

ग्रेच्युटी = (अंतिम बेसिक पे + DA) × 1/4 × सेवा की प्रत्येक छह महीने की अवधि की संख्या.

यहां ध्यान देना जरूरी है कि ग्रेच्युटी की वास्तविक रकम कर्मचारी के वेतन, सेवा की अवधि और लागू नियमों के आधार पर तय होती है. इसलिए सिर्फ अधिकतम सीमा जानने से यह पता नहीं चलता कि किसी कर्मचारी को रिटायरमेंट पर कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी.

प्राइवेट सेक्टर में कैसे होती है ग्रेच्युटी की गणना?

प्राइवेट सेक्टर में लागू सामान्य ग्रेच्युटी फॉर्मूला सरकारी कर्मचारियों की गणना से अलग हो सकता है. सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले में आखिरी सैलरी, सेवा के साल और 26 दिनों के आधार को शामिल किया जाता है.

फॉर्मूला:

ग्रेच्युटी = (अंतिम बेसिक सैलरी + DA) × 15 × सेवा के साल ÷ 26.

इस फॉर्मूले में अंतिम बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते को जोड़कर 15 से गुणा किया जाता है. इसके बाद सेवा के सालों से गुणा करके 26 से भाग दिया जाता है. हालांकि, वास्तविक पात्रता और भुगतान लागू कानूनों तथा संबंधित नियमों के अनुसार तय होते हैं. इसलिए सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की गणना को एक जैसा नहीं समझना चाहिए. दोनों के लिए लागू नियमों और पात्रता की शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी है.

8वां वेतन आयोग कब देगा अपनी रिपोर्ट?

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. आयोग तीन सदस्यीय पैनल है, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. दी गई जानकारी के मुताबिक, आयोग की अंतिम रिपोर्ट मई-जून 2027 तक आने की उम्मीद है. फिलहाल आयोग विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेने और परामर्श की प्रक्रिया में जुटा है. बेंगलुरु में इसकी बैठकें 8 अक्टूबर को समाप्त हुई थीं, जबकि अगली बैठक मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को होनी है. इस प्रक्रिया में कर्मचारी संगठनों की मांगें अहम हो सकती हैं, क्योंकि इन्हीं सुझावों के आधार पर वेतन, पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, किसी प्रस्ताव को स्वीकार करना या उसमें बदलाव करना आयोग और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा.

क्या जल्द बढ़ जाएगी ग्रेच्युटी की लिमिट?

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी की सीमा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने की मांग निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है. इसके साथ ही, गणना के तरीके में बदलाव और 16.5 गुना वेतन की सीमा हटाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है. वहीं, IRTSA ने ग्रेच्युटी की सीमा 50 लाख रुपये करने का सुझाव दिया है. लेकिन कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि ये सभी मांगें फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर हैं. अभी ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपये करने का कोई मंजूर फैसला नहीं हुआ है. अब सबकी नजर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार के फैसले पर रहेगी. जब तक नई व्यवस्था को औपचारिक मंजूरी नहीं मिलती, तब तक मौजूदा नियमों के आधार पर ही ग्रेच्युटी की गणना की जाएगी.

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