केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है. आगामी वेतन आयोग में नई सैलरी स्ट्रक्चर, फिटमेंट फैक्टर और कर्मचारियों की मांगों को लेकर नेशनल काउंसिल जेसीएम (NC JCM) के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
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न्यूज़ तक (News Tak) से बातचीत के दौरान शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की वाजिब और जरूरी मांगों पर नकारात्मक रुख नहीं अपनाएगी और उम्मीद है कि कर्मचारियों को उनके अधिकारों के अनुकूल निर्णय देखने को मिलेगा.
कर्मचारियों को भी जीने लायक वेतन पाने का पूरा हक: मिश्रा
अक्सर यह चर्चा उठती है कि वेतन आयोग लागू होने पर सरकार कर्मचारियों के लिए खजाना खोल देती है. इस पर बात करते हुए शिव गोपाल मिश्रा ने कहा, "बहुत से लोग कहते हैं कि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए खजाना खोल दिया, लेकिन उन्हें यह सोचना चाहिए कि सरकारी कर्मचारी भी इंसान हैं और उन्हें जीने लायक वेतन चाहिए. अपने परिवार को चलाने, बच्चों को पढ़ाने और समाज में एक सम्मानजनक जीवन जीने का उन्हें पूरा हक है."
उन्होंने कहा कि जब भी सरकार वेतन आयोग लागू करती है, तो उसे कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों के हिसाब से फैसला लेना ही पड़ता है.
'सरकार के किसी सरप्राइज या नकारात्मक फैसले की उम्मीद नहीं'
जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी सरकार 8वें वेतन आयोग में कोई नया सरप्राइज या बदलाव कर सकती है, तो उन्होंने कहा कि सरकार के पास संसाधन मौजूद हैं और उन्हें उम्मीद नहीं है कि सरकार कर्मचारियों की जरूरी मांगों के प्रति कोई नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगी.
NPS से UPS तक का सफर
पेंशन व्यवस्था पर बोलते हुए कर्मचारी नेता ने बताया कि जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय न्यू पेंशन सिस्टम (NPS) का प्रस्ताव रखा गया था, तब जेसीएम के तहत यूनियनों ने सर्वसम्मति से इसका विरोध किया था. हालांकि सरकार ने नोटिस जारी कर इसे लागू कर दिया था.
शुरुआत में एनपीएस के बहुत फायदे बताए गए थे, लेकिन जब कर्मचारी रिटायर होने लगे तो इसके नकारात्मक परिणाम सामने आए. इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन तेज किया, जिसके बाद वर्तमान सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के माध्यम से 50% गारंटेड पेंशन की मांग को सुलझाने की दिशा में कदम उठाया.
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