Adani Airline : एयरपोर्ट के बाद एयरलाइन चलाएगा Adani Group? सरकार क्यों कर रही सावधानी से विचार

सौरभ दीक्षित

• 03:32 PM • 23 Sep 2026

अडानी ग्रुप की एयरलाइन योजना पर सरकार जल्द फैसला नहीं करेगी. एयरपोर्ट और एयरलाइन एक ही समूह के पास होने से बराबरी और यात्रियों के हित पर जांच होगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ

अडानी समूह पहले से कई हवाईअड्डे, प्रशिक्षण और ग्राउंड सेवाएं संभालता है

दोनों कारोबार एक समूह के पास हों तो बराबरी पर सवाल उठते

भारत के Aviation Sector में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्या जिस कंपनी के पास देश के बड़े Airports हैं, वही कंपनी अपनी Airline भी चला सकती है? मामला Adani Group से जुड़ा है.

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अब भारत के Aviation Sector में Adani Group की संभावित Airline Entry को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है. लेकिन कहानी को समझने के लिए पहले ये समझना जरूरी है कि सरकार Adani को Airline शुरू करने से रोकना चाहती है या नहीं. पूरा मामला समझिए.

सरकार Adani की Airline को लेकर क्या कह रही है?

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि सरकार Adani Group के Airline शुरू करने के प्रस्ताव पर सावधानी से विचार करेगी.

दरअसल, Adani Group पहले से ही कई Airports का संचालन करता है. ऐसे में Airport Operator के साथ Airline Business में उतरने से हितों के टकराव यानी Conflict of Interest को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

सरकार का कहना है कि भारत को ज्यादा Airlines की जरूरत है, लेकिन Airport और Airline के एक ही कारोबारी समूह के हाथ में होने के संभावित नुकसान को भी देखना जरूरी है.

नायडू ने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश में Airlines की संख्या बढ़ाना और मौजूदा IndiGo-Air India के प्रभुत्व वाले बाजार में ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराना है. लेकिन अगर कोई Airport Operator खुद Airline चलाता है, तो उससे पैदा होने वाले संभावित नुकसान का भी आकलन करना होगा.

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा सिस्टम बनाना चाहती है, जो इन चिंताओं को दूर कर सके. फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

Adani की Airline योजना की चर्चा कैसे शुरू हुई?

Adani Group की Airline योजना को लेकर चर्चा 4 जून के एक पत्र के बाद तेज हुई.

Adani Airports के CEO अरुण बंसल ने पत्र में बताया था कि Adani Defence & Aerospace Group के मौजूदा Aviation Ecosystem के विस्तार के तौर पर Airline शुरू करने की संभावना का मूल्यांकन कर रही है.

Adani Group के Aviation Business में Airports के अलावा Pilot Training, Maintenance and Repair और Ground Handling जैसी गतिविधियां भी शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, Adani Group ने Airport Operator को Airline में हिस्सेदारी रखने पर लागू प्रतिबंधों में छूट की मांग भी की थी.

Airport और Airline की एक ही कंपनी होने पर सवाल क्यों?

अब सवाल आता है कि आखिर Airport और Airline की एक ही कारोबारी समूह के पास Ownership होने से दिक्कत क्या है?

इसे आसान भाषा में समझिए.

Airlines के बीच बाजार में Competition होता है. लेकिन Airport किसी शहर में आने-जाने का प्रमुख Gateway होता है और कई मामलों में यात्रियों के पास उसके सीमित विकल्प होते हैं.

ऐसे में अगर एक ही कारोबारी समूह के पास Airport और Airline दोनों हों, तो दूसरी Airlines और यात्रियों के हितों को लेकर सवाल उठ सकते हैं.

मसलन, दूसरी Airlines के लिए Airport पर उपलब्ध सुविधाओं, Slots और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर बराबरी का व्यवहार सुनिश्चित करना एक Regulatory Concern बन सकता है.

IndiGo के Managing Director राहुल भाटिया ने भी Airport Operators को Airline चलाने की अनुमति देने पर इसे “massive conflict of interest” बताया था और कहा था कि इसका असर ग्राहकों पर पड़ सकता है.

Delhi और Mumbai Airport से जुड़े नियम क्या हैं?

Cross-Ownership को लेकर Delhi और Mumbai Airports के Privatization के समय से ही नियम मौजूद हैं.

2006 में जब इन Airports का Privatization हुआ था, तब Airport Operator और Airline के बीच Cross-Ownership को लेकर Restrictions रखी गई थीं.

अब इन प्रतिबंधों में किसी तरह का बदलाव करना है, तो इसके लिए संबंधित नियमों और समझौतों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है.

सरकारी अधिकारियों की चिंता यह भी है कि अगर इस तरह की पाबंदी हटाई जाती है, तो इसका फायदा किसी एक कंपनी को विशेष रूप से मिलने की धारणा बन सकती है. इसलिए सरकार इस मामले की सावधानी से समीक्षा कर रही है.

2019 में Tata Group से जुड़ा मामला भी आया था

Airport और Airline की Cross-Ownership को लेकर विवाद नया नहीं है.

2019 में Tata Group ने GMR Airports में करीब ₹8,000 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा था.

उस समय GMR दिल्ली और हैदराबाद Airports का संचालन करता था. लेकिन Solicitor General तुषार मेहता के विरोध के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी.

यानी Airport और Airline Business के बीच Ownership को लेकर सरकार पहले भी सावधानी बरत चुकी है.

सरकार को ज्यादा Airlines क्यों चाहिए?

अब कहानी का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी है.

सरकार का कहना है कि भारत में ज्यादा Airlines की जरूरत है.

Civil Aviation Minister राम मोहन नायडू के मुताबिक सरकार चाहती है कि कम से कम 5 Airlines 100-100 विमानों के साथ ऑपरेट करें.

इसका मकसद Aviation Sector में ज्यादा Competition और यात्रियों के लिए ज्यादा विकल्प तैयार करना है.

इसके साथ ही अलग-अलग Airlines को विशिष्ट क्षेत्रों पर फोकस करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए कोई Airline पूर्वोत्तर राज्यों को देश के दूसरे हिस्सों से बेहतर तरीके से जोड़ने पर ध्यान दे सकती है.

UDAN योजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी

सरकार इसके लिए UDAN योजना को भी अहम जरिया मान रही है.

UDAN यानी Ude Desh Ka Aam Nagrik योजना का मकसद देश के छोटे शहरों और कम कनेक्टेड इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है.

योजना के अगले चरण के लिए ₹28,840 करोड़ का प्रस्तावित बजट है. इसमें Airlines को Viability Gap Funding के साथ Airport और Heliport Development के लिए भी सहायता शामिल है.

इस योजना के जरिए Regional Connectivity बढ़ाने और देश के कम जुड़े इलाकों को Aviation Network से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा.

UDAN में Airport का चयन कैसे होगा?

UDAN के अगले चरण में Airports के चयन के लिए Challenge-Based System अपनाया जाएगा.

इसमें कई मानकों को ध्यान में रखा जाएगा.

जैसे संबंधित Airport पर्यटन स्थलों, औद्योगिक केंद्रों या प्रमुख Airports से कितना दूर है.

Airport पर Runway और Terminal जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं.

Airport के लिए जमीन की स्थिति कैसी है.

और राज्य सरकार उस Project के लिए कितनी Financial Participation करने को तैयार है.

यानी सरकार सिर्फ Airport की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि यह भी देखना चाहती है कि उस Airport से वास्तव में Regional Connectivity और Economic Activity को कितना बढ़ावा मिल सकता है.

Adani Airline के मामले में अब आगे क्या होगा?

कुल मिलाकर Adani Group की संभावित Airline Entry के मामले में सरकार के सामने दो बड़े पहलू हैं.

एक तरफ देश में नई Airlines आने और Aviation Sector में Competition बढ़ाने की जरूरत है.

दूसरी तरफ Airport और Airline के एक ही कारोबारी समूह के नियंत्रण में आने से जुड़े संभावित Conflict of Interest को रोकना भी जरूरी है.

Adani Group पहले से ही Aviation Sector में Airports और दूसरी Aviation Services के जरिए मौजूद है. ऐसे में अगर Group Airline Business में भी उतरता है, तो Airport-Airline Cross-Ownership से जुड़े मौजूदा नियम और Regulatory Safeguards महत्वपूर्ण हो जाएंगे.

फिलहाल सरकार ने इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं किया है. प्रस्ताव पर विचार करते समय सरकार Competition, यात्रियों के हित और Airport-Airline Ownership से जुड़े संभावित Conflict of Interest, इन सभी पहलुओं को ध्यान में रख रही है.