Adani Group : हिंडनबर्ग से जुड़े मामले में अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों का SEBI से Settlement, ₹1.51 करोड़ में निपटा मामला

तनीषा त्यागी

• 04:53 PM • 23 Sep 2026

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद शुरू जांच में अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने सेबी के साथ 1.51 करोड़ रुपये देकर मामला निपटाया. जानिए किसने कितना भुगतान किया.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

सेबी ने 15 फरवरी 2024 को कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजे

कुल 1.51 करोड़ रुपये देकर पांचों कंपनियों ने कार्यवाही निपटाई

अडानी एंटरप्राइजेज ने सबसे ज्यादा 76.05 लाख रुपये का भुगतान किया

Adani Group News : अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों से जुड़े हिंडनबर्ग मामले में एक अहम अपडेट सामने आया है. अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के साथ चल रही कार्यवाही को करीब 1.51 करोड़ रुपये का भुगतान करके समझौते के जरिए निपटा लिया है. इस मामले की जड़ जनवरी 2023 में आई हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ी थी. सेबी के 22 सितंबर 2026 के समझौता आदेश के मुताबिक, Adani Enterprises, Adani Green Energy, Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Energy Solutions से जुड़ी कार्यवाही को समझौते के जरिए निपटाया गया है. हालांकि, इस समझौते को कंपनियों की ओर से सेबी के आरोपों या कानूनी निष्कर्षों की स्वीकारोक्ति के तौर पर नहीं देखा जा सकता है.

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किन पांच कंपनियों ने सेबी के साथ किया समझौता ?

इस समझौते में अडानी ग्रुप की पांच कंपनियां शामिल हैं. इनमें Adani Enterprises, Adani Green Energy, Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Energy Solutions शामिल हैं. इन पांचों कंपनियों ने मिलकर करीब 1.51 करोड़ रुपये की समझौता रकम का भुगतान किया है. हालांकि, हर कंपनी की ओर से दी गई रकम अलग-अलग है और इसमें सबसे ज्यादा भुगतान Adani Enterprises ने किया है.

किस कंपनी ने कितने रुपये दिए ?

सेबी के समझौता आदेश के मुताबिक, Adani Enterprises ने करीब 76.05 लाख रुपये का भुगतान किया है. यह पांचों कंपनियों में सबसे बड़ी समझौता रकम है. Adani Green Energy ने करीब 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया है. वहीं Adani Total Gas, AWL Agri Business और Adani Energy Solutions ने करीब 9.75 लाख रुपये-9.75 लाख रुपये का भुगतान किया है. इस तरह इन पांचों कंपनियों की ओर से किए गए भुगतान को जोड़ने पर कुल समझौता रकम करीब 1.51 करोड़ रुपये बैठती है.

15 फरवरी 2024 को जारी हुए थे कारण बताओ नोटिस

इस पूरे मामले में सेबी ने 15 फरवरी 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे. इन नोटिस के जरिए कंपनियों से कथित नियमों से जुड़े मुद्दों को लेकर जवाब मांगा गया था. सेबी की जांच में कॉरपोरेट प्रशासन और जानकारी सार्वजनिक करने से जुड़े मुद्दे शामिल थे. इसके अलावा संबंधित पक्षों के साथ हुए कुछ लेन-देन की जानकारी और उनके जरूरी खुलासे से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा थे. शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने और जानकारी सार्वजनिक करने से जुड़ी आवश्यकताओं के संभावित उल्लंघनों की भी जांच की गई थी.

हिंडनबर्ग रिपोर्ट से कैसे जुड़ा था मामला

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जनवरी 2023 में आई हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट से जुड़ी थी. रिपोर्ट के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. इसके बाद अडानी ग्रुप से जुड़े कई कॉरपोरेट प्रशासन और जानकारी सार्वजनिक करने से जुड़े मुद्दे जांच के दायरे में आए. इसी व्यापक जांच के तहत सेबी की कार्यवाही में अलग-अलग कंपनियों से जुड़े नियामकीय और जानकारी सार्वजनिक करने से जुड़े मामलों को देखा गया. हालांकि, मौजूदा समझौते को समझते समय यह अंतर ध्यान रखना जरूरी है कि यह समझौता किन मुद्दों से जुड़ा था और कंपनियों ने इसके तहत क्या स्वीकार किया है.

Adani Enterprises से जुड़ा क्या था मामला

इस पूरे मामले को समझने के लिए Adani Enterprises से जुड़े एक उदाहरण को देखा जा सकता है. सेबी के मुताबिक, कंपनी की एक सालाना रिपोर्ट में कुछ संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा सामने आया था. इन लेन-देन में Adani Estates Private Limited और Wakodar Investment Limited से जुड़े लेन-देन शामिल थे. यानी नियामक की जांच का एक अहम हिस्सा यह देखना था कि संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन की जरूरी जानकारी और खुलासा किया गया था या नहीं. इसके अलावा कार्यवाही में लेखा परीक्षण और सीमित समीक्षा रिपोर्ट से जुड़ा एक अन्य मुद्दा भी शामिल था. इसमें ऐसी लेखा परीक्षण कंपनियों की ओर से रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किए जाने का आरोप था, जिनके पास वैध सहकर्मी समीक्षा प्रमाणपत्र नहीं था.

समझौते का मतलब आरोप स्वीकार करना नहीं

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात समझौते को लेकर है. अडानी ग्रुप की इन पांच कंपनियों ने समझौते के तहत रकम का भुगतान किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने सेबी की जांच में सामने आए तथ्यों या कानूनी निष्कर्षों को स्वीकार कर लिया है. समझौते की शर्तों के मुताबिक, कंपनियों ने तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों या कानून से जुड़े निष्कर्षों को न तो स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है. इसलिए इस समझौते को सीधे तौर पर आरोपों की स्वीकारोक्ति के रूप में देखना सही नहीं होगा. समझौते का मतलब यहां तय शर्तों के तहत सेबी की कार्यवाही को निपटाना है.

क्या समझौते के बाद मामला पूरी तरह खत्म हो गया ?

सेबी ने समझौते के बाद इन कार्यवाहियों को निपटा दिया है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में आगे कार्रवाई की गुंजाइश बनी रह सकती है. अगर समझौता प्रक्रिया के दौरान कंपनियों की ओर से दी गई कोई जानकारी बाद में गलत पाई जाती है, या समझौते की शर्तों और किए गए वादों का पालन नहीं किया जाता है, तो नियामक आगे कार्रवाई कर सकता है. इसके अलावा अगर समझौते की शर्तें तय करते समय कोई महत्वपूर्ण गलती या अंतर सामने आता है, तो भी आगे की कार्रवाई संभव हो सकती है. इसका मतलब यह है कि समझौते के जरिए मौजूदा कार्यवाही का निपटारा हुआ है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में नियामकीय कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता.

समझौते की खबर के बाद शेयरों पर क्या असर

अब बात करते हैं इस खबर के बाद अडानी ग्रुप की इन पांच कंपनियों के शेयरों की. खबर लिखे जाने तक इन कंपनियों के शेयरों में कोई बहुत बड़ा एकतरफा बदलाव देखने को नहीं मिला था.

  • Adani Enterprises का शेयर करीब 0.01 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा था.
  • Adani Green Energy में करीब 0.19 फीसदी की गिरावट थी.
  • Adani Total Gas करीब 0.05 फीसदी की तेजी में था.
  • AWL Agri Business का शेयर करीब 0.74 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा था.
  • वहीं Adani Energy Solutions करीब 0.08 फीसदी नीचे था.

यानी शुरुआती कारोबार में समझौते की खबर का इन पांचों शेयरों पर मिला-जुला असर देखने को मिला.

1.51 करोड़ रुपये के समझौते में समझें पूरी कहानी

अगर पूरे मामले को आसान भाषा में समझें, तो अडानी ग्रुप की पांच कंपनियों से जुड़ी सेबी की कार्यवाही को करीब 1.51 करोड़ रुपये के समझौते के बाद निपटा दिया गया है. इस मामले की पृष्ठभूमि जनवरी 2023 की हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद शुरू हुई व्यापक जांच से जुड़ी थी. सेबी की कार्यवाही में जानकारी सार्वजनिक करने, संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन, कॉरपोरेट प्रशासन और लेखा परीक्षण रिपोर्ट से जुड़े मुद्दे शामिल थे. Adani Enterprises के मामले में संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन की जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर सवाल उठे थे. वहीं लेखा परीक्षण और सीमित समीक्षा रिपोर्ट से जुड़े मुद्दे भी कार्यवाही का हिस्सा थे. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि समझौते को आरोपों की स्वीकारोक्ति नहीं माना जाना चाहिए. कंपनियों ने तथ्यों से जुड़े निष्कर्षों और कानूनी निष्कर्षों को स्वीकार या खारिज नहीं किया है. फिलहाल समझौते के बाद इन कार्यवाहियों का मौजूदा चरण निपट गया है. अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले कारोबारी सत्रों में अडानी ग्रुप की इन कंपनियों के शेयर इस खबर पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं.

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