एयर इंडिया की फ्लाइट में 300 फीट नीचे गिरा विमान, हाइड्रोलिक सिस्टम से लेकर ऑटोपायलट तक में मिली गड़बड़ी

तनीषा त्यागी

• 11:21 AM • 13 Aug 2026

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 ओडिशा के ऊपर 300 फीट नीचे गई. अब हाइड्रोलिक, ऑटोपायलट और दूसरे अलर्ट की जांच तेज हो गई है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

फुकेत से दिल्ली आ रही एआई2379 ओडिशा के ऊपर अचानक नीचे गई

घटना में 20 यात्री और 4 केबिन क्रू घायल हुए

कथित रखरखाव रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम के कई अलर्ट दर्ज हुए

एयर इंडिया की एक फ्लाइट में उड़ान के दौरान अचानक 300 फीट की ऊंचाई गिरने के मामले ने विमान की तकनीकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 ओडिशा के ऊपर उड़ान भरते समय अचानक करीब 300 फीट नीचे चली गई. इस घटना में 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. घटना के बाद विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली में उतरा, लेकिन अब सामने आई कथित उड़ान के बाद की रखरखाव रिपोर्ट में कई तकनीकी चेतावनियों का जिक्र है. इनमें विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम, उड़ान नियंत्रण और ऑटोपायलट से जुड़ी चेतावनियां शामिल हैं. हालांकि, यह रिपोर्ट अभी यह साबित नहीं करती कि इन तकनीकी चेतावनियों और विमान के अचानक नीचे आने के बीच सीधा संबंध था.

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फुकेत से दिल्ली आ रही थी एयर इंडिया की फ्लाइट

एयर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 ने 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. यह विमान एयरबस ए320 था और इसका पंजीकरण वीटी-ईएक्सओ बताया गया है. विमान में कुल 137 यात्री सवार थे, जिनमें 3 शिशु भी शामिल थे. इसके अलावा विमान में 8 क्रू सदस्य मौजूद थे. इनमें 2 पायलट और 6 केबिन क्रू सदस्य शामिल थे. उड़ान के दौरान ओडिशा के ऊपर विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे चला गया. इस घटना के बाद विमान को स्थिर किया गया और अंत में इसे दिल्ली में सुरक्षित उतार लिया गया. हालांकि, अचानक ऊंचाई कम होने के कारण विमान में सवार 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी सामने आई.

उड़ान के बाद की रिपोर्ट में कई तकनीकी चेतावनियां

घटना के बाद सामने आई कथित रखरखाव रिपोर्ट में एयरबस ए320 के अलग-अलग सिस्टम से जुड़ी कई चेतावनियां दर्ज होने की बात कही गई है. रिपोर्ट में विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम से संबंधित कम दबाव की चेतावनियों का उल्लेख है. इनमें हरे, नीले और पीले हाइड्रोलिक सिस्टम शामिल हैं. इसके अलावा पीले और नीले हाइड्रोलिक रिजर्वायर में तरल पदार्थ का स्तर कम होने से जुड़ी चेतावनियां भी दर्ज होने की बात कही गई है. हाइड्रोलिक सिस्टम विमान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों के संचालन में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में उड़ान के दौरान इस सिस्टम से जुड़ी कई चेतावनियां सामने आना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है. हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित रखरखाव रिपोर्ट अपने आप में यह पुष्टि नहीं करती कि वास्तव में हाइड्रोलिक दबाव या तरल पदार्थ की गंभीर कमी हुई थी या नहीं.

ऑटोपायलट दो बार हुआ डिस्कनेक्ट

रिपोर्ट में ऑटोपायलट से जुड़ी भी अहम जानकारी सामने आई है. इसके मुताबिक उड़ान के दौरान ऑटोपायलट के दो बार डिस्कनेक्ट होने की जानकारी दर्ज की गई. इसके साथ ही विमान के बाएं और दाएं एलिवेटर के उड़ान नियंत्रण में गड़बड़ी से संबंधित चेतावनियां भी दर्ज होने की बात कही गई है. एलिवेटर विमान के उड़ान नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसकी मदद से विमान की ऊंचाई और उसकी दिशा में बदलाव किया जाता है. इसलिए एलिवेटर फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी चेतावनियां जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन चेतावनियों का विमान के अचानक 300 फीट नीचे आने की घटना से सीधा संबंध था या नहीं.

इंजन और आपातकालीन दरवाजों से जुड़ी चेतावनियां भी

कथित रखरखाव रिपोर्ट में केवल हाइड्रोलिक और उड़ान नियंत्रण से जुड़ी चेतावनियां ही नहीं बताई गई हैं. इसमें इंजन के एंटी-आइस सिस्टम से संबंधित संदेश भी दर्ज होने की बात कही गई है. इसके अलावा विमान के दाहिने हिस्से के आगे और पीछे वाले आपातकालीन निकास दरवाजों से जुड़े संकेत भी रिपोर्ट में दर्ज होने की जानकारी है. रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम, एलिवेटर कंप्यूटर और नोज लैंडिंग गियर डोर या इंजन एंटी-आइस वाल्व सिस्टम से जुड़े हाई-प्रेशर संकेत का भी उल्लेख किया गया है. इन सभी संकेतों की वास्तविक प्रकृति और घटना के दौरान उनकी भूमिका की जांच अभी बाकी है.

एयर इंडिया ने शुरुआत में इसे अशांति से जोड़ा था

इस घटना के शुरुआती विवरण में एयर इंडिया ने विमान के अचानक नीचे आने को वायु अशांति यानी टर्बुलेंस से जुड़ा बताया था. लेकिन अब कथित उड़ान के बाद की रखरखाव रिपोर्ट में कई तकनीकी चेतावनियों का सामने आना जांच को एक नया आयाम देता है. हालांकि, सिर्फ रखरखाव रिपोर्ट में किसी चेतावनी का दर्ज होना यह साबित नहीं करता कि वही चेतावनी विमान के अचानक नीचे आने की वजह थी. यही वजह है कि मामले में तकनीकी आंकड़ों, विमान के सिस्टम रिकॉर्ड और पायलटों की कार्रवाई की विस्तृत जांच की जा रही है.

डीजीसीए और एएआईबी कर रहे हैं जांच

इस गंभीर घटना की जांच नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी एएआईबी कर रहे हैं. मामले को गंभीर घटना के तौर पर वर्गीकृत किया गया है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विमान की ऊंचाई अचानक क्यों कम हुई, उस समय विमान के अलग-अलग सिस्टम किस स्थिति में थे और पायलटों ने किस तरह प्रतिक्रिया दी. जांचकर्ता विमान के उड़ान से जुड़े आंकड़ों, सिस्टम चेतावनियों और चालक दल की कार्रवाई को एक साथ देखकर घटना का क्रम समझने की कोशिश करेंगे. फिलहाल एएआईबी की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है.

क्या हाइड्रोलिक गड़बड़ी ही 300 फीट नीचे आने की वजह थी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी चेतावनियों और विमान के अचानक 300 फीट नीचे आने के बीच कोई सीधा संबंध था. अभी इसका जवाब निश्चित तौर पर नहीं दिया जा सकता. कथित रखरखाव रिपोर्ट में हाइड्रोलिक सिस्टम के कम दबाव और तरल स्तर से संबंधित चेतावनियां दर्ज होने की बात कही गई है. लेकिन रिपोर्ट यह पुष्टि नहीं करती कि उड़ान के दौरान वास्तव में हाइड्रोलिक सिस्टम ने काम करना बंद किया था या दबाव में गंभीर गिरावट आई थी. इसी तरह ऑटोपायलट के दो बार डिस्कनेक्ट होने और एलिवेटर फ्लाइट कंट्रोल से जुड़ी चेतावनियों का भी घटना से सीधा संबंध अभी साबित नहीं हुआ है. इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी एक तकनीकी कारण को विमान के अचानक नीचे आने की वजह मानना जल्दबाजी होगी.

विमान सुरक्षित दिल्ली पहुंचा

घटना के बावजूद विमान को स्थिर किया गया और वह दिल्ली में सुरक्षित रूप से उतरा. विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों को घटना के दौरान चोटें आईं, लेकिन विमान की सुरक्षित लैंडिंग ने स्थिति को और गंभीर होने से रोकने में मदद की. एयर इंडिया की ओर से कहा गया है कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. एयरलाइन ने जांच कर रही एजेंसियों के साथ सहयोग करने की बात कही है. नागर विमानन मंत्रालय भी इस घटना पर नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं.

अब एएआईबी की रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल इस घटना से जुड़े कई सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे. खासतौर पर यह पता लगाना जरूरी होगा कि उड़ान के दौरान दर्ज हुई हाइड्रोलिक, ऑटोपायलट और उड़ान नियंत्रण से जुड़ी चेतावनियां किस प्रकृति की थीं और उनका विमान की ऊंचाई में आई अचानक कमी से कोई संबंध था या नहीं. जांच में विमान के तकनीकी आंकड़ों, सिस्टम रिकॉर्ड, चालक दल की कार्रवाई और घटना के पूरे क्रम का विश्लेषण किया जाएगा. फिलहाल इतना स्पष्ट है कि फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक 300 फीट की ऊंचाई कम होने की घटना के बाद कई तकनीकी संकेत जांच के दायरे में हैं. विमान सुरक्षित दिल्ली पहुंच गया, लेकिन 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू सदस्यों के घायल होने के कारण यह मामला गंभीर है. अब सभी की नजर डीजीसीए और एएआईबी की जांच के अंतिम निष्कर्ष पर है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि विमान के अचानक नीचे आने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और उड़ान के दौरान दर्ज की गई तकनीकी चेतावनियों की इसमें कितनी भूमिका थी.