Air India : भारतीय विमानन क्षेत्र में विस्तार का दांव सिंगापुर एयरलाइंस के लिए फिलहाल भारी पड़ता दिखाई दे रहा है. एयर इंडिया में 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने वाली सिंगापुर एयरलाइंस को इस निवेश पर करीब 80 करोड़ डॉलर यानी लगभग ₹6,500 करोड़ का परिचालन घाटा हो चुका है. यह स्थिति निवेश के पूरा होने के दो साल से भी कम समय में सामने आई है. सिंगापुर एयरलाइंस ने नवंबर 2024 में एयर इंडिया में 25 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी. यह सौदा टाटा समूह की एयर इंडिया में वापसी और विस्तारा के एयर इंडिया में विलय के बाद पूरा हुआ था. उस समय इस निवेश को भारतीय विमानन बाजार में लंबे समय के लिए बड़ा अवसर माना गया था. लेकिन इसके बाद एयर इंडिया के सामने एक के बाद एक कई मुश्किलें खड़ी होती गईं.
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एयर इंडिया में 25 फीसदी हिस्सेदारी के लिए किया था बड़ा निवेश
एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी का रास्ता विस्तारा के जरिए बना. टाटा समूह ने जब 2021 में एयर इंडिया को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, तब सिंगापुर एयरलाइंस भी इस पूरी प्रक्रिया से जुड़ी हुई थी. बाद में विस्तारा का एयर इंडिया के साथ विलय हुआ. इस सौदे के तहत सिंगापुर एयरलाइंस ने एयर इंडिया में 25 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए करीब 82.2 करोड़ सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 642 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त पूंजी लगाई. बाकी 75 फीसदी हिस्सेदारी टाटा संस के पास रही. इस सौदे से सिंगापुर एयरलाइंस को करीब 110 करोड़ सिंगापुर डॉलर का एकमुश्त लेखांकन लाभ भी हुआ था. लेकिन इसके कुछ ही समय बाद एयर इंडिया को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ गई.
निवेश के कुछ ही महीनों बाद फिर लगानी पड़ी पूंजी
एयर इंडिया को मजबूत करने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस ने सौदा पूरा होने के करीब पांच महीने बाद फिर से लगभग 16.7 करोड़ सिंगापुर डॉलर की अतिरिक्त पूंजी लगाई. इस अतिरिक्त निवेश के बाद एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की कुल पूंजी प्रतिबद्धता करीब 98.9 करोड़ सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 77 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई. लेकिन इसके बाद एयर इंडिया के सामने ऐसी घटनाएं आईं, जिनका असर उसके कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा.
अहमदाबाद विमान हादसे से एयर इंडिया को लगा बड़ा झटका
एयर इंडिया के लिए सबसे बड़ा झटका अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के रूप में आया. एयर इंडिया की उड़ान 171 ने उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटना का सामना किया. इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हुई, जबकि जमीन पर भी लोगों की जान गई और कुल मृतकों की संख्या 260 तक पहुंची. हादसे के बाद एयर इंडिया को अपने बोइंग 787 विमानों की जांच करनी पड़ी. इसके अलावा उड़ानों से पहले अतिरिक्त सुरक्षा जांच बढ़ाई गई और कुछ समय के लिए उड़ानों का संचालन भी प्रभावित हुआ. हादसे की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. ऐसे में यह घटना एयर इंडिया के परिचालन और वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाली प्रमुख घटनाओं में शामिल रही.
पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद होने से भी बढ़ी मुश्किल
एयर इंडिया के सामने एक और बड़ी समस्या भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद सामने आई. पाकिस्तान ने भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया. इसका सीधा असर एयर इंडिया की उड़ानों पर पड़ा. कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों को बदलना पड़ा और विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ी. इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ीं. एयर इंडिया के अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद रहने से उसे करीब 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ.
विमानन उद्योग की वैश्विक समस्याओं ने बढ़ाया दबाव
एयर इंडिया की मुश्किलें सिर्फ घरेलू घटनाओं तक सीमित नहीं रहीं. पूरी दुनिया का विमानन उद्योग इस समय आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट, विमानों और कलपुर्जों की उपलब्धता में देरी और बढ़ती ईंधन कीमतों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. एयर इंडिया भी इन चुनौतियों से प्रभावित हुआ. कंपनी अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और विस्तार पर तेजी से काम कर रही है, लेकिन नए विमानों और अन्य उपकरणों की आपूर्ति में देरी ने इस प्रक्रिया को मुश्किल बनाया. इसके अलावा मध्य पूर्व में जारी संघर्षों के बीच विमान ईंधन की कीमतों में भी दबाव देखने को मिला. एयरलाइन के खर्च का बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में होता है. ऐसे में भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी एयर इंडिया की लागत को बढ़ाया.
सिंगापुर एयरलाइंस को हुआ करीब ₹6,500 करोड़ का घाटा
इन सभी परिस्थितियों का असर सीधे सिंगापुर एयरलाइंस के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा. मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान एयर इंडिया से जुड़े निवेश के कारण सिंगापुर एयरलाइंस को करीब 94.5 करोड़ सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 73.8 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ. इसके बाद अगली तिमाही में भी नुकसान बढ़ने के संकेत मिले. कंपनी ने बताया कि एयर इंडिया से संबंधित नुकसान पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 4.1 करोड़ सिंगापुर डॉलर और बढ़ गया. यानी एयर इंडिया में किया गया निवेश सिंगापुर एयरलाइंस के लिए फिलहाल कमाई का जरिया बनने के बजाय बड़ी वित्तीय चुनौती बन गया है.
अब सबसे बड़ा सवाल, क्या एयर इंडिया को और पैसा देना पड़ेगा?
एयर इंडिया के नकदी प्रवाह पर दबाव को देखते हुए अब निवेशकों और विश्लेषकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ रही है कि क्या सिंगापुर एयरलाइंस को एयर इंडिया में आगे भी अतिरिक्त पूंजी लगानी पड़ सकती है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर एयर इंडिया को अपने विस्तार, बेड़े के आधुनिकीकरण और परिचालन सुधार के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ती है, तो सिंगापुर एयरलाइंस के सामने फिर से निवेश करने का सवाल आ सकता है. सिंगापुर एयरलाइंस ने भी कहा है कि अगर एयर इंडिया की तरफ से भविष्य में अतिरिक्त पूंजी की मांग आती है, तो उसका बोर्ड समूह की दूसरी पूंजीगत जरूरतों और एयर इंडिया की कारोबारी रणनीति को ध्यान में रखकर फैसला करेगा.
एयर इंडिया फिलहाल बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. कंपनी अपने विमानों के बेड़े को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार करने, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और अपनी सेवाओं को अपग्रेड करने पर काम कर रही है. कंपनी में नेतृत्व परिवर्तन भी होने वाला है. इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तेवोल्डे गेबरियाम की एयर इंडिया के अगले मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्ति की तैयारी है. नए नेतृत्व के सामने एयर इंडिया को एक अधिक प्रतिस्पर्धी और आर्थिक रूप से मजबूत एयरलाइन बनाने की बड़ी चुनौती होगी.
सिंगापुर एयरलाइंस का दांव जोखिम भरा, लेकिन मौका भी बड़ा
सिंगापुर एयरलाइंस के लिए एयर इंडिया में निवेश को सिर्फ मौजूदा घाटे के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी. भारतीय विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है. अगर एयर इंडिया अपने विस्तार की योजना को सफलतापूर्वक लागू कर पाती है, बेड़े से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं, परिचालन प्रदर्शन सुधरता है और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क मजबूत होता है, तो लंबे समय में यह निवेश सिंगापुर एयरलाइंस के लिए बड़ा फायदा दे सकता है. लेकिन इसके लिए एयर इंडिया को मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकलना होगा. विमान हादसे के बाद सुरक्षा और भरोसा मजबूत करना, बढ़ती लागत को नियंत्रित करना, विमानों की उपलब्धता बढ़ाना और नए मार्गों पर बेहतर प्रदर्शन करना कंपनी के लिए बेहद जरूरी होगा. फिलहाल तस्वीर यह है कि सिंगापुर एयरलाइंस का एयर इंडिया पर लगाया गया दांव शुरुआती दौर में उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया है. करीब 80 करोड़ डॉलर के आसपास का नुकसान इस निवेश के जोखिम को साफ तौर पर दिखाता है. हालांकि, एयर इंडिया का कायाकल्प एक लंबी प्रक्रिया है. अगर टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस मिलकर एयरलाइन की परिचालन क्षमता, वित्तीय स्थिति और ग्राहक अनुभव में सुधार करने में सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में तस्वीर बदल सकती है. यानी अभी एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस की कहानी घाटे की जरूर है, लेकिन इस निवेश का अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि एयर इंडिया अपने बड़े बदलाव और विस्तार की योजना को कितनी तेजी और कुशलता से पूरा कर पाती है.
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