Air India ने टाटा संस से मांगे 1.5 अरब डॉलर, क्यों पड़ी इतनी बड़ी पूंजी की जरूरत? जानिए पूरा मामला

सौरभ दीक्षित

• 01:31 PM • 26 Aug 2026

एयर इंडिया ने टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से 1.5 अरब डॉलर नई पूंजी मांगी है. बढ़ते घाटे, पुराने सिस्टम और फ्लीट विस्तार की जरूरत से उसकी वापसी की राह लंबी दिख रही है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

सूत्रों के मुताबिक रकम एक साथ नहीं, किश्तों में आ सकती है

सिंगापुर एयरलाइंस प्रस्तावित पूंजी में अपने हिस्से के मुताबिक 25% देगी

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का घाटा 22,238 करोड़ रुपये रहा

टाटा ग्रुप का हिस्सा बनने के बाद भी एयर इंडिया की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने अपने शेयरधारकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से 1.5 अरब डॉलर की नई पूंजी मांगी है.

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सूत्रों के मुताबिक यह रकम एक साथ नहीं, बल्कि किश्तों में दी जा सकती है. 2021 में टाटा ग्रुप का हिस्सा बनने के बाद यह एयर इंडिया के लिए सबसे बड़ी फंडिंग में से एक हो सकती है.

फंडिंग की जरूरत क्यों पड़ी

टाटा संस की FY2026 रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया में उसका निवेश 22,618 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा, जो एक साल पहले के बराबर है. इससे साफ है कि पूरे साल एयर इंडिया में कोई नई इक्विटी नहीं डाली गई.

सूत्रों ने कहा कि जून में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एयर इंडिया की फंडिंग जरूरतों पर चर्चा हुई थी. एयर इंडिया और टाटा संस ने इस मामले में सवालों का जवाब नहीं दिया.

अभी क्या स्थिति है

रिपोर्ट के अनुसार सिंगापुर एयरलाइंस इस फंडिंग में अपने हिस्से के मुताबिक 25% रकम देगी. वहीं टाटा संस ने मार्च 2026 तक अतिरिक्त इक्विटी सहायता रोके रखी थी.

एयर इंडिया को फाइनेंशियल ईयर 2026 में 22,238 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा है. टाटा ग्रुप की कंपनियों में सबसे ज्यादा घाटा एयर इंडिया को हुआ.

कंपनी ने यह नई पूंजी ऐसे समय मांगी है, जब एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने की तैयारी कर रहे हैं.

बोर्ड में किन बातों पर चर्चा हुई

सूत्रों के मुताबिक मई में टाटा संस के बोर्ड के सामने एयर इंडिया को पटरी पर लाने की योजना रखी गई थी. इसमें बड़े खर्च की योजना, कामकाज बढ़ाने की तैयारी, फ्लीट विस्तार और जरूरी इक्विटी निवेश का प्रस्ताव शामिल था.

चंद्रशेखरन ने FY2026 की रिपोर्ट में कहा कि एयर इंडिया को पूरी तरह पटरी पर लाने में एक दशक तक का समय लग सकता है. उनके मुताबिक यह काम अनुमान से ज्यादा लंबा और महंगा साबित हो रहा है.

एयर इंडिया के सामने बड़ी दिक्कतें क्या हैं

- कई साल से सप्लाई चेन की दिक्कतें बनी हुई हैं.

- एयरलाइन के पुराने सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है.

- कंपनी के काम करने के तरीके और फ्लीट दोनों में सुधार करना है.

- टेक्निकल और एयरलाइन प्रोफेशनल्स की बड़ी टीम तैयार करनी है.

- नुकसान कम करने के लिए एयर इंडिया ने एयरबस और बोइंग से ऑर्डर किए गए सैकड़ों विमानों की डिलीवरी टालने की कोशिश की है.

कुल मिलाकर एयर इंडिया को कारोबार संभालने, नुकसान कम करने और विस्तार की योजना आगे बढ़ाने के लिए नए निवेश की जरूरत है. रॉयटर्स की रिपोर्ट और सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी बताती है कि कंपनी की वापसी की राह अभी लंबी है.