Share Bazaar Crash : ईरान टकराव से शेयर बाजार में हड़कंप! 1600 प्वाइंट टूटा बाजार, मचा हाहाकार

तनीषा त्यागी

08 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 8 2026 4:00 PM)

अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की हलचल और महंगे कच्चे तेल ने शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया. सेंसेक्स-निफ्टी गिरे और निवेशकों की चिंता तेज हुई.

शेयर बाजार में भारी गिरावट से मचा हड़कंप
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न्यूज़ हाइलाइट्स

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ी सैन्य हलचल से वैश्विक चिंता बढ़ी

ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर पार गया, महंगाई और सप्लाई का डर बढ़ा

जापान और दक्षिण कोरिया समेत एशियाई बाजारों से कमजोर संकेत मिले

शेयर बाजार में आज यानी 8 जुलाई की दोपहर को हाहाकार मच गया। बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। ईरान के 80 ठिकानों पर देर रात हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने आज दोपहर 1.3 बजे ऐसा बयान दिया कि शेयर बाजार में भारी बिकवाली आ गई। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो अब ईरान के साथ डील नहीं चाहते हैं। वो ईरान के साथ युद्धविराम और समझौता ज्ञापन (MoU) असल में "खत्म" हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन ईरान की हरकतों का कड़ा जवाब देता रहेगा। इस बयान के बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट आ गई। बाजार एक झटके में 1600 अंक से ज्यादा टूट गया। सेंसेक्स 1700 से ज्यादा टूटकर 76,415 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी 540 अंक लुढ़कर 23,859 पर ट्रेड करता दिखा। 

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इससे पहले सुबह शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही. बाजार खुलते ही सेंसेक्स 550 अंकों से ज्यादा टूटकर करीब 77,600 तक आ गया. निफ्टी भी 150 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 24,220 के आसपास कारोबार करता दिखा.

लगातार चार दिनों की तेजी के बाद आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी. बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का रहा. मिडिल ईस्ट में बढ़ते टकराव और तेल की सप्लाई पर असर की आशंका से बिकवाली बढ़ी.

गिरावट की वजह क्या रही

बाजार जानकारों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने दुनिया भर के बाजारों में डर का माहौल बनाया. निवेशकों ने ज्यादा जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू की, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा.

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है. दुनिया के कुल तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है.

तनाव बढ़ते ही ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा करता है. यही डर शेयर बाजार पर भारी पड़ा.

एशियाई बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत

कमजोरी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. जापान और दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजार भी दबाव में दिखे. विदेशी निवेशकों का रुख भी कमजोर पड़ा, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार में नजर आया.

किन शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई

लगभग हर बड़े सेक्टर में बिकवाली देखने को मिली. लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों हिस्सों में दबाव बना रहा.

• एयरलाइन सेक्टर में इंडिगो करीब 1.81% टूटा.

• एशियन पेंट्स में 2.42% की गिरावट दर्ज हुई.

• रिलायंस इंडस्ट्रीज करीब 2.10% फिसला.

• बजाज फाइनेंस 1.70% नीचे रहा.

• आईटीसी में 1.60% की कमजोरी दिखी.

• महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.50% तक गिरा.

• हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी एचपीसीएल करीब 3.60% तक टूटा.

• अशोक लीलैंड में 2.60% की गिरावट रही.

• एनबीसीसी करीब 2.20% नीचे कारोबार करता दिखा.

• पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस में 2.10% की गिरावट दर्ज की गई.

अब आगे बाजार की चाल किस पर रहेगी

बाजार की अगली दिशा काफी हद तक मिडिल ईस्ट के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.

वहीं, अगर हालात सामान्य होते हैं और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार फिर से संभलने की कोशिश कर सकता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक घबराकर फैसला लेने से बचें, क्योंकि ऐसे समय में खबरों का असर बाजार पर तेजी से पड़ता है.

कुल मिलाकर, बुधवार की गिरावट के पीछे अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सबसे बड़े कारण रहे. आने वाले दिनों में यही हालात तय करेंगे कि बाजार पर दबाव और बढ़ेगा या फिर सुधार की कोशिश दिखेगी.