Apple के महंगे iPhone की मांग को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं. कंपनी ने सितंबर में iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च किए थे, लेकिन अब इनके कंपोनेंट्स के ऑर्डर में कटौती की खबर सामने आई है. Nikkei Asia की रिपोर्ट के मुताबिक, Apple ने अक्टूबर के लिए कुछ सप्लायर्स को इन मॉडल्स के कंपोनेंट्स के ऑर्डर 15-20% तक घटाने को कहा है. ऐसे में सवाल है कि क्या बढ़ती कीमतें ग्राहकों को नए iPhone खरीदने से रोक रही हैं?
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कंपनी के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि उसके प्रीमियम स्मार्टफोन पहले से महंगे हैं और उसका पहला फोल्डेबल iPhone भी करीब 3 लाख रुपये की कीमत के साथ चर्चा में है. हालांकि, कंपोनेंट्स के ऑर्डर में कटौती को सीधे बिक्री में गिरावट का संकेत नहीं माना जा सकता. इसके पीछे उत्पादन योजना और सप्लाई से जुड़े कारण भी हो सकते हैं.
महंगे iPhone की कीमत कितनी?
Apple के नए Pro मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी ग्राहकों के फैसले को प्रभावित कर सकती है. भारत में iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत ₹1,64,900 और Pro Max की ₹1,79,900 है. अमेरिका में भी दोनों मॉडल्स की शुरुआती कीमत पिछली पीढ़ी के मुकाबले 100 डॉलर ज्यादा रखे जाने की बात कही गई है.
इतनी बड़ी रकम खर्च करने से पहले ग्राहक यह देख सकते हैं कि नए फोन में पुराने मॉडल के मुकाबले कितना बड़ा बदलाव मिला है. बेहतर कैमरा, नई सुविधाएं और डिजाइन आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन अगर ग्राहक को अपग्रेड का फायदा कीमत के अनुपात में नहीं दिखता, तो वह फोन बदलने का फैसला टाल सकता है.
वेटिंग टाइम घटने से क्या संकेत मिलता है?
रिपोर्ट में UBS के विश्लेषकों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 30 से ज्यादा बाजारों में iPhone 18 Pro के औसत वेटिंग टाइम में कमी आई है. इसका मतलब है कि ग्राहकों को फोन की डिलीवरी के लिए पहले जितना इंतजार नहीं करना पड़ रहा.
हालांकि, इसके दो मतलब हो सकते हैं. कंपनी ने अगर सप्लाई बेहतर कर दी है, तो कम वेटिंग टाइम सामान्य बात है. दूसरी तरफ, अगर सप्लाई में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, तो यह मांग में नरमी का संकेत हो सकता है. इसलिए केवल वेटिंग टाइम के आधार पर बिक्री घटने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
करीब 3 लाख रुपये का फोल्डेबल iPhone
Apple का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo भी अपनी कीमत को लेकर चर्चा में है. भारत में इसके 256GB वेरिएंट की कीमत ₹2,99,900 बताई गई है. फोल्डेबल डिजाइन उन ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है, जो स्मार्टफोन में बड़ी स्क्रीन का अनुभव चाहते हैं. लेकिन इतनी ऊंची कीमत पर खरीदारों का दायरा सीमित रहने की आशंका भी है.
फोल्डेबल फोन बनाना सामान्य स्मार्टफोन के मुकाबले ज्यादा जटिल होता है. Apple के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन के दौरान गुणवत्ता, लागत और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना भी अहम होगा.
AI की मांग से बढ़ सकती है स्मार्टफोन की लागत
स्मार्टफोन बाजार पर एक और दबाव मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग से जुड़ा है. AI डेटा सेंटर तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे मेमोरी चिप्स की मांग और उनकी लागत पर दबाव पड़ सकता है. इसका असर स्मार्टफोन और कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ने की आशंका है.
रिसर्च फर्म IDC के अनुमान के मुताबिक, 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट 16.7% घट सकता है, जबकि औसत बिक्री कीमत 27.6% बढ़ सकती है. यह अनुमान बाजार में संभावित दबाव की ओर इशारा करता है. हालांकि, ये उद्योग के अनुमान हैं, Apple की बिक्री में गिरावट का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं.
क्या iPhone की कीमतें घटेंगी?
कंपोनेंट्स के ऑर्डर कम होने से यह जरूरी नहीं कि Apple तुरंत अपने फोन की कीमतें घटा दे. कीमतों पर कंपनी की रणनीति, उत्पादन लागत, मांग और प्रतिस्पर्धा का असर पड़ता है.
अगर आप नया iPhone खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कीमत घटने की उम्मीद में इंतजार करने के बजाय अपनी जरूरत, बजट और पुराने मॉडल्स पर उपलब्ध ऑफर्स की तुलना करना बेहतर होगा. आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं कि iPhone कितना प्रीमियम है, बल्कि यह भी है कि उसके फीचर्स उस कीमत के लायक हैं या नहीं.
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